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विश्व आदिवासी दिवस पर दिखी आदिवासी संस्कृति की झलक

विश्व आदिवासी दिवस पर दिखी आदिवासी संस्कृति की झलक



संवैधानिक अधिकारों को लागू कराने सरकार नहीं दे रही है ध्यान-अरविंद नेताम


सिर्फ आरक्षण जरूरी नहीं,परंपरा और संस्कृति की रक्षा करना हमारा दायित्व-अजय चंद्राकर


अभिमन्यु नेताम

कुरूद:-हर साल की तरह इस साल भी विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर स्थित कृषि उपज मंडी में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के पूर्व चंडी मंदिर में पूजा पाठ के बाद शहर में भव्य रैली निकाली गई। रैली की अगुवाई आंगापेन ने किया,वही भोजली और डांग डोरी के साथ निकली इस रैली महापुरुषों की झांकी रेलापाटा नृत्य आकर्षण का केन्द्र रहा। इस दौरान शहर में जनप्रतिनिधियों सहित समाजसेवियों द्वारा जगह जगह रैली का स्वागत किया गया। पुरानी मंडी में आयोजित कार्यक्रम समाज के दिग्गज नेताओं सहित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। यहां मुख्य अतिथि बतौर सर्व आदिवासी समाज के सरंक्षक अरविंद नेताम शामिल हुए। अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में नन्दकुमार साय पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अजजा आयोग,अजय चंद्राकर विधायक कुरूद एवं पूर्व केबिनेट मंत्री छग, राजकुमारी दीवान उपाध्यक्ष अनुसूचित जनजाति आयोग छग,विशिष्ट अतिथि के रूप में तपन चंद्राकर अध्यक्ष नगर पंचायत,बीएस रावटे महासभा अध्यक्ष हल्बा समाज बालोद,आर एन ध्रुव प्रांताध्यक्ष अनुसूचित जन जाति शासकीय सेवक संघ,रूपेन्द्र नगारची प्रदेश अध्यक्ष नगारची समाज के अलावा पूर्व विधायक श्रवण मरकाम,पिंकी शिवराज शाह,अम्बिका मरकाम सहित सर्व आदिवासी समाज के प्रमुख समाजजन उपस्थित रहे।सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष जीवराखन लाल मरई ने स्वागत भाषण करते हुए कहा कि समाज के लिए यह दिन गौरव का दिन है क्योंकि हम अपने संवैधानिक अधिकारों पर बात करने के लिए एकत्र होते है। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित होने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने की जरूरत है। कुरूद विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं पूर्व कैबिनट मंत्री अजय चंद्राकर ने सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश के अधिकांश राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों में जाने का अवसर मिला,जहां आदिवासी नेतृत्व करते है। देश और प्रदेश में करीब एक शताब्दी तक आदिवासी समाज आरक्षण मिलना चाहिए,क्योंकि आज भी कई ऐसे क्षेत्र है जहां समाज के लोग पिछड़े हुए है हालांकि आरक्षण नौकरियों में मिलता है नौकरियां नहीं रहेगी तो आरक्षण का कोई मतलब नहीं होगा। पढ़ाई में सबसे आगे रहेंगे तभी आरक्षण का शत प्रतिशत लाभ मिल सकता है। समाज में नेतृत्व का अभाव नही है इसलिए राजनैतिक इस्तेमाल मत होइए।

आरक्षण की सूची में संधारण करने का अवसर राज्यों को मिलने वाला है तो आरक्षण का दुरुपयोग अब नही होगा। सिर्फ आरक्षण जरूरी नहीं है बल्कि परंपरा और संस्कृति की रक्षा करना हमारा दायित्व होना चाहिए। हमारी परंपराओं में कहीं भी शराब की जगह नहीं है शराब की बुराई का त्याग करेंगे तभी जल जंगल जमीन का दुरुपयोग बंद होगा।नंद कुमार साय ने कहा कि समाज अभी शिक्षा के क्षेत्र में पीछे है संविधान में लिखी गई बातें अमल नहीं हो पा रही है इसके लिए हमें प्रयास करना चाहिए। विदेशी संस्कृति को अपनाने के कारण हमारी परम्पराए धीरे धीरे विलुप्त हो रही है जो चिंता का विषय है आज हमें अपनी परम्पराओ को सहेजने की जरूरत है।

आदिवासी नेता अरविंद नेताम ने कहा कि धमतरी का आदिवासी समाज काफी जागरूक है यहां अपने अधिकारों के लिए लगातार समाज लड़ाई लड़ रहा है उन्होंने कहा देश में जमीन सबसे बड़ी समस्या है इसलिए हमें अपनी जमीन बचानी होगी सरकार में बैठे लोग हमारे अधिकारों को लागू कराने में कोई ध्यान नहीं दे रहे है इसलिए अब उन्हें भी समाज सबक सिखाएगा। उन्होंने कहा कि आगे हमें अपने अधिकारों की लड़ाई लड़नी होगी,क्योंकि कानून का पालन नहीं हो रहा है बल्कि कानून का उल्लंघन हो रहा है। बहुत से मसले को गंभीरता से लेकर समाज अध्ययन कर रहा है समाज कितना से आगे कदम उठाए जाएंगे। सरकार समाज के साथ दुर्व्यवहार कर रही है इसलिए सरकार ने समाज के जनप्रतिनिधि हैं उनकी भूमिका का आंकलन समाज कर रहा है ताकि आने वाले दिनों में उन्हें सबक सिखाया जा सके। उन्होंने कहा सरकार पेशा कानून की धज्जियां उड़ा रही है।इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी अध्यक्ष महेश रावटे,रामप्रसाद मरकाम,राजू सोम,मोहन पुजारी,घनश्याम सोरी,प्रेमसागर नागवंशी,देवेंद्र सूर्यवंशी,शिवचरण नेताम,स्कंद ध्रुव,सुरेश ध्रुव,रोशन लाल देव,उदय नेताम,वेदप्रकाश ध्रुव,प्रमोद कुंजाम, तीजेंद्र कुंजाम,संतोष कुंजाम,फागेश्वर कुंजाम,सन्त कुमार नेताम,इंद्रावन कंवर,देवनाथ नगारची,पोखनलाल कंवर समेत बड़ी संख्या में सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी और समाज के बड़ी संख्या में महिला पुरुष शामिल थे।