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बाढ़ प्रभावित किसानों को 8 महीने बाद भी नही मिली क्षतिपूर्ति...किसान नेता योगेश तिवारी ने उठाया मुददा..कोरोना संकट में आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं किसान..सर्वे रिपोर्ट भेजने के 8 महीने बाद भी राहत नही

बाढ़ प्रभावित किसानों को 8 महीने बाद भी नही मिली क्षतिपूर्ति...किसान नेता योगेश तिवारी ने उठाया मुददा..कोरोना संकट में आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं किसान..सर्वे रिपोर्ट भेजने के 8 महीने बाद भी राहत नही

जनधारा समाचार
बेमेतरा.  कोरोना संकट में हर वर्ग को आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। खासकर किसानों की परेशानी दिनोदिन बढ़ती जा रही है। एक ओर जहां कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है, वही सरकार से भी राहत मिलती नही दिख रही है। उक्त बातें किसान नेता किशोर तिवारी ने कही है।


उन्होंने कहा कि बीते वर्षा ऋतु में शिवनाथ व खारुन नदी के किनारे बसे बाढ़ प्रभावित गांव के किसानों को क्षतिपूर्ति का अभी भी इंतजार है। इस सम्बंध में रोज किसानों के फोन आ रहे हैं। किसानों ने अपनी आर्थिक दशा से योगेश तिवारी को अवगत करते हुए बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में आरबीसी 6-4 के तहत सर्वे हुए करीब 8 माह बीत चुके हैं । बावजूद अब तक क्षतिपूर्ति नही मिली है ।

कोरोना संकट में किसानों को सरकार से राहत की उम्मीद है, लेकिन राहत तो छोड़िए क्षतिपूर्ति की राशि नही मिल पा रही है । जो दुर्भाग्यपूर्ण है । ग्राम संडी, डंगनिया, ताकम, ढाबा, देवसरा, खुड़मुडी, अछोली, रवेली, सहगांव, जमघटडीह, मंगलोर, सलधा, कुम्हि, खमरिया ,बहेरघट भालेसर समेत नदी से लगे गांव के हजारो किसान प्रभावित हुए थे ।

किसान नेता ने कहा कि जिले में शिवनाथ नदी के किनारे बसे हुए गांव में बारिश व बाढ़ के चलते काफी बड़ा रकबा में लगी धान, सोयाबीन व अरहर की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी । किसानों की मांग पर उस समय राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को फसल क्षतिपूर्ति के लिए सर्वे के आदेश दिए थे । आदेश के तहत जिला प्रशासन द्वारा पूरे जिले में बाढ़ और बारिश से हुए फसल की तबाही सर्वे कर आरसीबी 6-4 के तहत प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजा गया था । करीब माह 8 महीने बाद भी किसानों को फसल क्षतिपूर्ति की राशि नहीं मिल पाई है । जिसका इंतजार आज भी है । वही इस मसले पर जनप्रतिनिधियों ने किसी तरह का कोई सकारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता भी नहीं समझी है ।