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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - कोई लौटा दे मेरे, बीते हुए दिन

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - कोई लौटा दे मेरे, बीते हुए दिन

-सुभाष मिश्र
साल भर से अकेले कोरोना वायरस के चलते दुनियाभर की पब्लिक गतिविधियां रुक सी गई थी। दुनिया के अधिकांश लोगों का चेहरा मास्क से ढका हुआ दिखा। बार-बार हाथों को सैनेटाईज करना, लोगों से दूर से बात करना, बहुत जरुरी हो तो ही घर से बाहर ऐहतियात के साथ निकलना। काढ़ा पीना, पूछ-पूछकर दवा खाना जरा सी खांसी-सर्दी से डर जाना। बुलाने पर भी किसी के घर नहीं जाना। गम हो या खुशी हो सबका इजहार वर्चुअल दुनिया यानि सोशल मीडिया व्हाट्सअप, फेसबुक पर करना आम हो गया। पूरी मानव सभ्यता के इतिहास में घर नामक संस्था बनने के बाद से कोई आदमी इतना घर में नहीं रहा होगा जितना कोविड-19 के चलते रहा। बहुत से लोगों को घर की महत्ता समझ में आ गई है। निदा फाजली का एक शेर है-
हमने भी सोकर देखा है नये-पुराने शहरों में
जैसा भी है अपने घर का बिस्तर अच्छा लगता है।।

कोरोना ने दुनिया को वर्चुअल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। सरकारें डिजिटलाईजेशन के लिए न जाने कितने उपाय करती है किन्तु कोरोना काल ने लोगों को डिजिटलाईजेशन की ओर तेजी से प्रेरित किया। अब ई-पेमेंट, ई-खरीदी, ऑनलाईन पढ़ाई, बातचीत उद्योग व्यापार सब तेजी से होने लगा। कोरोना संक्रमण की दहशत में बीते एक साल के पहले के समय को याद करके लोग अक्सर यही गुनगुनाते देखे जाते हैं-
कोई लौटा दे मेरे, बीते हुए दिन।
बीते हुए दिन वो हाय, प्यारे पल छिन।।

दुनिया में कोरोना की वैक्सीन आ गई। कुछ लोगों ने वैक्सीन लगा भी ली किन्तु अभी भी कोरोना का खौफ पूरी तरह से गया नहीं है। इसके बावजूद लोगों की दिनचर्या, बाजार सिनेमा हाल की रौनक, स्कूलों का शोरगुल सुनाई देने लगा है। धीरे-धीरे पटरी पर लौटती जिंदगी को इस कोरोना समय ने बहुत कुछ सिखाया है। हवाई जहाज, ट्रेन आदि के लंबे समय तक बंद रहने की वजह से सड़क परिवहन बहुत बढ़ा है। जो लोग थोड़े दिन पहले तक हाथ मिलाने से परहेज कर रहे थे, अब वे नमस्ते, प्रणाम की जगह हाथ मिलाने लगे हैं। कुछ लोगों को इससे आगे बढ़कर गले भी मिलने से अब कोई गुरेज नहीं है। होटलों में होने वाली पार्टियां अब फार्म हाउस में होने लगी है। जिनके पास विकल्प थे ऐसे लोगों ने बंद संकरे मोहल्लों ,घरों में रहने की बजाय खुली कालोनी, फार्म हाउस में रहना पसंद किया है। अब लोगों को साफ हवा, पानी और खुला-खुला आसमान चाहिए। सरकार ने अभी जरुरत के अनुसार ही ट्रेनें चलाई हैं, पर लोग उसमें भी झिझककर बैठ रहे हैं। बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं है लेकिन बच्चे अपने साथियों को देखकर स्कूल जाने बेताब हो रहे हैं। ऑनलाईन क्लास से उकता चुके विद्यार्थी अब दोस्तों के साथ बैठकर कुछ गर्मजोशी चाहते हैं।

अभी भी कोरोना संक्रमण का साया पूरी तरह चला नहीं है। ये सही है कि कोरोना संक्रमण का खतरा लगातार कम हो रहा है। कोरोना वैक्सीन लगाए जाने का अभियान तेज किए जाने से यह खतरा और कम हो गया है। दादर और नगर हवेली, दमन और दीव, लद्दाख और अंडमान एंड निकोबार आईलैंड कोविड-19 मुक्त होते नजर आ रहे हैं। कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस का कोई भी नया मरीज नहीं मिला है। देश में बीते 24 घंटों में कुल 9 हजार 309 नए मरीज मिले हैं। इस दौरान 87 लोगों की मौत हो गई है। देश में अब तक कोविड-19 के कुल 1 करोड़ 8 लाख 80 हजार मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से अब तक 1 लाख 55 हजार 447 मरीजों की मौत हो गई है। देश में फिलहाल 1 लाख 35 हजार 926 एक्टिव मामले हैं। www.covid19india.org के आंकड़े बताते हैं कि महाराष्ट्र और केरल देश के सबसे प्रभावित राज्यों में से एक है।

कोरोना से व्याप्त भय को कम करने में कोरोना वैक्सीनेशन ने अहम भूमिका निभाई है। अभी तक देश में अब तक 75 लाख 5 हजार 10 लोगों को वैक्सीन लगा दी गईं है। देश में 16 जनवरी 2021 से वैक्सीन प्रोग्राम की शुरुआत की गई है। कोरोना महामारी रोकने के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण अप्रैल में डिजिटल पेमेंट में करीब 60 फीसदी की गिरावट आई थी लेकिन अब जैसे-जैसे लॉकडाउन खुल रहा है वैसे-वैसे डिजिटल पेमेंट का उपयोग भी बढ़ रहा है। ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ता नकदी के माध्यमों से बिल का भुगतान और खरीदारी करने से बच रहे हंै, जिसके कारण डिजिटल पेमेंट में बढ़ोतरी हुई है। गूगल पे प्लेटफॉर्म पर बिलों के भुगतान और ऑनलाइन रिचार्ज में 180 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, नेशनल पेमेंट्स कॉर्प (एनपीसीआई) द्वारा संचालित यूपीआई ने 28 जून तक 2.31 लाख करोड़ रुपए के 1.42 अरब ट्रांजेक्शन प्रोसेस किए। यह इस प्लेटफॉर्म के जरिए एक महीने में सबसे अधिक ट्रांजेक्शन है। इससे पहले अप्रैल में इस चैनल से 1.5 लाख करोड़ रुपए के 99 करोड़ ट्रांजेक्शन प्रोसेस किए गए थे। 2016 में इस प्लेटफॉर्म के शुरू होने के बाद यह सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी। इसी तरह कार्ड से होने वाला लेनदेन भी प्री-कोविड के स्तर पर पहुंच चुका है। अधिकांश निजी बैंकों का कहना है कि उनका कार्ड बेस्ड ट्रांजेक्शन प्री-कोविड वॉल्यूम के 70 से 80 फीसदी पहुंच चुका है।  
 भारत में कोविड-19 के मामले रोजाना कम हो रहे हैं। कई राज्यों मेें लॉकडाउन के चलते कई महीनों तक स्कूल-कालेज बंद रहने के बाद अब फिर से शुरु हो गये हैं। बाजारों की रौनक लौट रही है। वित्त वर्ष 2019-20 में अर्थव्यवस्था में कमजोरी, अमेरिका-चीन में टकराव, एनबीएससी सेक्टर में संकट ने बाजार पर दबाव बनाए रखा था। अब हालात सुधर रहे हैं।

गुजरात में राज्य सरकार ने श्रम कानून में संशोधन करने का ऐलान करते हुए दुकानों, रेस्टारेंट्स एवं होटल को लेकर अहम फैसला लिया है। सरकार ने इन्हें 24 घंटे खुले रखने की अनुमति दे दी है। यानि, अब बाजार रात में भी ओपन-अलाउड रहेंगे। होटल-रेस्टारेंट के मालिक अपनी इच्छा से 11 बजे तक भी चालू रख सकते हैं। अब ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ का मंदिर रविवार समेत पूरे हफ्ते खुला रहेगा। इसके साथ ही श्रद्घालु आनंद बाजार स्थल पर महाप्रसाद ग्रहण कर पाएंगे।

कोरोना महामारी को देखते हुए पिछले साल 18 मार्च को माता वैष्णो देवी की ऐतिहासिक यात्रा स्थगित किए जाने के साथ ही गर्भ जून गुफा भी बंद कर दी गई थी।  बीते वर्ष 16 अगस्त को एक बार फिर मां वैष्णो देवी यात्रा शुरु कर दी गई है।  
अब सभी जगहों पर मंदिर की घंटी, मस्जिद की अजान और गुरुद्वारों की गुरुवाणी, गिरिजाघरों की प्रार्थनाओं के स्वर सुनाई देने लगे हैं। स्कूलों में बच्चे पढऩे जरुर जा रहे हैं पर सामूहिक प्रार्थना से परहेज है। रंगशालाओं में नाट्य मंचन शुरु हो गये हैं। बहुत दिनों से बंद जनमंच की गतिविधियां अब 27-28 फरवरी को विवेचना रंगमंडल जबलपुर के चार नाटकों के मंचन से शुरु होने जा रही है। उसके बाद 3-4 मार्च को हीरा मानिकपुरी के निर्देशन में फिर नाट्य प्रस्तुति होगी। ये सिलसिला अब यूं ही चलते रहेगा। जनमंच की तरह अब सब जगह धीरे-धीरे रौनक लौट रही है। इंशाअल्लाह सब कुछ लौटे पर कोरोना न लौटे सब यही दुआ कर रहे हैं।