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जिला श्रम विभाग की देखरेख में मजदूरों का मानसिक शारीरिक आर्थिक शोषण जारी - विकास शर्मा सामजिक कार्यकर्ता

जिला श्रम विभाग की देखरेख में मजदूरों का मानसिक शारीरिक आर्थिक शोषण जारी -  विकास शर्मा सामजिक कार्यकर्ता


जिले में मजदूरों की मजदूरी के बारे में बात की जाए तो यह भी एक बहुत बड़ी समस्या है

सक्ती, 28 जून। एक मजदूर देश के निर्माण में बहुमूल्य भूमिका निभाता है और उसका देश के विकास में अहम योगदान होता है। किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की अहम भूमिका होती है। मजदूरों के बिना किसी भी औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए श्रमिकों का समाज में अपना ही एक स्थान है। लेकिन आज जिला जांजगीर चाम्पा में मजदूरों के साथ अन्याय और उनका शोषण हो रहा है आज जिले में बेशक मजदूरों के 8 घंटे काम करने का संबंधित कानून लागू हो लेकिन इसका पालन सिर्फ कागज में ही करते हैं, आज जिले के अधिकतर प्राइवेट कंपनियां या फैक्टरियां या गृहउधोग में भी अपने यहाँ काम करने वालों से 12 घंटे तक काम कराते हैं। आज भी जिले में कम मजदूरी पर मजदूरों से काम कराया जाता है। आज भी मजदूरों से फैक्ट्रियों या प्राइवेट कंपनियों द्वारा पूरा काम लिया जाता है लेकिन उन्हें मजदूरी के नाम पर बहुत कम मजदूरी दर पकड़ा दी जाती है। आज भी जिले में ऐसे मजदूर है जो 2000-8000₹ मासिक मजदूरी पर काम कर रहे हैं। जो कि एक प्रकार से मजदूरों का शोषण हैं।

जिले में मजदूरी में लैंगिक भेदभाव आम बात है। जिले के अधिकांश जगहों में आज भी महिलाओं को पुरुषों के बराबर वेतन नहीं दिया जाता है। बेशक महिला या पुरुष कार्यस्थल में समान काम कर रहे हों लेकिन बहुत सी जगह आज भी महिलाओं को समान कार्य हेतु समान वेतन नहीं दिया जाता है। जिले में महिलाओं से उनकी क्षमता से अधिक कार्य कराया जाता है। आज भी बहुत से जगहों में महिलाओं के लिए पृथक शौचालय की व्यवस्था नहीं है। महिलाओं से भी 10-12 घंटे तक काम कराया जाता है। यह भी मजदूरों का एक प्रकार से शोषण है। जो कि संविधान के अनुच्छेद 23 का पूर्णतः उल्लंघन है। संविधान की इस धारा के तहत भारत के प्रत्येक नागरिक को शोषण और अन्याय के खिलाफ अधिकार दिया गया है। लेकिन आज अपने अधिकारों के लिए बात करते हैं तो कुछ भी करके आवाज को दबा दिया जाता है ।

आज सरकार श्रमिक से सम्बंधित सभी कानूनों को कड़ाई से लागू करने के लिए संबंधित जिम्मेदार अधिकारी को निर्देशित किया गया है। अगर कोई इन कानूनों का उल्लंघन करे तो उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करनी है लेकिन कुछ भ्रष्टाचारी अधिकारी के कारण इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन होता रहा है जिसके मजदूरों को उनका अधिकार नही मिल रहा है ।

सामाजिक कार्यकर्ता विकास शर्मा द्वारा कई वर्ष से जिले में मजदूरों के सोसड के सम्बंध में प्रशासन को अवगत करवाया गया लेकिन कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति कर दिया जाता है जिसका मुख्य कारण यह है जिले में बैठे जिम्मेदार अधिकारी मजदूरों के सोसड करने वाले ठेकेदारो से 5000 से 30000 तक महीने ठेकेदार से ले रहे हैं ।