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हिंदू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति के साथ होगा खरमास समाप्त

हिंदू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति के साथ होगा खरमास समाप्त

भोपाल । हिंदू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व शुक्ल पक्ष की द्वादशी की तिथि को मनाया जाएगा। यह तिथि 14 जनवरी को पडऩे से इसी दिन संक्रांति मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि इस दिन सूय्र धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

सूय्र जब धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इस प्रक्रिया को संक्रांति कहा जाता है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु भक्ति-भाव से भगवान सूर्य की उपासना करते हैं।

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास की समाप्ति होगी और विवाह आदि शुभ कार्यों का शुभारंभ हो जाएगा। 14 जनवरी से खरमास समाप्त हो जाएगा और विवाह फिर से होना शुरु होंगे। हालांकि 22 फरवरी को गुरु देव ब्रहस्पति के अस्त होने से विवाह नहीं होंगे।

देव गुरु 23 मार्च तक अस्त रहेंगे, उसके पश्चात चार मार्च से नौ मई तक विवाह होंगे, फिर होलिकाष्टक लग जाएंगे। होलिका अष्टक के बाद अप्रैल में विवाह प्रारंभ होंगे। संक्रांति कथा : पौराणिक कथा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र भगवान शनि के पास जाते हैं। उस समय भगवान शनि मकर राशि का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं।

शनि, मकर राशि के देवता है, इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर जब कोई पिता अपने पुत्र से मिलने जाता है, तो उसकी सारी समस्या दूर हो जाती है। कुछ राज्यों में इस दिन पतंग महोत्व भी मनाया जाता है।