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सफलता की कहानी : आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अतिसंवेदनशील क्षेत्र में बच्चों को सुपोषित करने का कर रही प्रयास

सफलता की कहानी : आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अतिसंवेदनशील क्षेत्र में बच्चों को सुपोषित करने का कर रही प्रयास


कृष्णा नायक दोरनापाल

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति से ग्राम में विभिन्न समस्याओं का हो रहा समाधान- ग्रामवासी

दोरनापाल . बच्चे किसी भी समाज के विकास का आधार स्तम्भ होते हैं, स्वस्थ और सुपोषित बच्चे एक सुदृढ़ समाज का निर्माण करते हैं। जिले के सुदूर क्षेत्रों में बसे ग्रामों में नक्सल प्रभाव के कारण यह क्षेत्र वर्षों से विकास की मुख्यधारा से अलग रहे हैं। ऐसे में यहां के निवासियों को अशिक्षा, पिछड़ेपन की वजह से कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ा है। जिसमें कुपोषण एक मुख्य समस्या बनकर उभरी है। कुपोषण से इन क्षेत्रों के बच्चों में शारिरिक और मानसिक विकास अन्य सामान्य बच्चों से कम हो जाती है।

ऐसे में कुछ कर्तव्य परायण शासकीय मैदानी कर्मचारियों द्वारा अपनी पूर्ण कार्यक्षमता से बच्चों को कुपोषण के कुचक्र से निकालने के लिये लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। इसी का उदाहरण कोण्टा विकासखण्ड के नक्सल प्रभावित ग्राम पायतुलगुट्टा में स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र की कार्यकर्ता तोडेम पार्वती प्रस्तुत कर रही है।

एकीकृत महिला बाल विकास परियोजना कोन्टा के अन्तर्गत सेक्टर किष्टाराम 01 के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र पायतुलगुट्टा आंगनबाड़ी केन्द्र विगत वर्ष जून 2020 में कार्यकर्ता सुश्री तोडेम पार्वती की नियुक्ति के उपरान्त ही प्रथम बार केन्द्र संचालित हुआ है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तोडेम पार्वती के परिश्रम एवं मनोबल से आज नियमित केन्द्र संचालन के साथ-साथ समय पर टीकाकरण, वी.एच.एस.एन.डी(ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस) कार्यक्रम, वजन कार्यक्रम आदि का संचालन हो रहा है।


पूर्व में होती थी समस्याएँ, आंबा कार्यकर्ता की नियुक्ति से हुआ समाधान

पायतुलगुट्टा के ग्रामीण बताते हैं कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति एवं केन्द्र के नियमित संचालन से ग्राम में विभिन्न समस्याओं के समाधान का एक महत्वपूर्ण विकल्प खुल गया हैं। कार्यकर्ता नियुक्ति के पूर्व ग्रामवासी महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं से वंचित थे।

ग्राम में पूर्व में टीकाकरण का अभाव था, प्रसव घरों में ही होते थे एवं कुपोषित बच्चों के चिन्हांकन व ईलाज से ग्रामवासी वंचित थे। परंतु आज कार्यकर्ता स्वयं ग्रामवासियों को प्रोत्साहित कर किष्टाराम पी.एच.सी. में टीकाकरण एवं प्रसव हेतु लेकर जाती हैं साथ ही कुपोषण मुक्ति के पथ पर अग्रसर है।

पार्वती की सहायता से ही ग्राम पंचायत किष्टाराम में मुख्यमंत्री बाल संदर्भ शिविर का आयोजन सफल हुआ। जिसमें बच्चों तथा माताओं को विशेष दवाईयों, प्रोटीन पाउडर तथा अन्य निःशुल्क सामाग्री वितरण कर लाभ प्रदाय किया गया।


आंबा सहायिका की नियुक्ति से मिल रहा सहयोग

आंबा कार्यकर्ता के सहयोगी के रुप में गत वर्ष जुलाई में ही पायतुलगुट्टा में आंगनबाड़ी सहायिका श्रीमती पायम रूकमणी की नियुक्ति की गई जिससे समस्त ग्रामवासी काफी उत्साहित हैं। सहायिका द्वारा सुपोषण केन्द्र में बच्चों के भर्ती के साथ अन्य गतिविधियों, गृह भेट में विशेष सहयोग किया जा रहा हैं।

वर्तमान में केन्द्र अन्तर्गत कुल 18 बच्चे 01 गर्भवती एवं 04 शिशुवती महिलाएं पंजीकृत हैं। तोडेम पार्वती द्वारा केन्द्र के 02 मध्यम कुपोषित बच्चों को मुख्यमंत्री सुपोषण केन्द्र में पंद्रह दिवस हेतु भर्ती कराया गया है। आज पर्यन्त तक पार्वती ने कुल 08 बच्चों को सुपोषण केन्द्रों की सुविधा से लाभान्वित कर चुकी है।

नक्सलवाद से पीड़ित ग्राम पायतुलगुट्टा आज महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा कुपोषण जैसे गंभीर समस्या के समाधान हेतु संचालित योजना से सुपोषित सुकमा की ओर अग्रसर हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं विभाग द्वारा ग्राम में निंरतर प्रयास एवं दृढ़ मनोबल के साथ आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हो रहा है।