breaking news New

प्रधान मुख्य वनसंरक्षक ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में किया आदेश जारी

प्रधान मुख्य वनसंरक्षक ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में किया आदेश जारी

उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने 31 अगस्त 2019 को सुकदास नाग के जाति प्रमाणपत्र को किया था निरस्त


गीदम व बारसूर वनपरिक्षेत्र अधिकारी फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में दंतेवाड़ा वनमंडल कार्यालय में अटैच

दंतेवाड़ा, 18 दिसंबर। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी फ़र्ज़ी जाति प्रमाणपत्र के मामले में त्वरित कार्यवाही करते वन विभाग ने गीदम वन परिक्षेत्र अधिकारी सुकदास नाग व बारसूर वन परिक्षेत्र अधिकारी मोहनदास मानिकपुरी को अपने वर्तमान पद से 17 नवम्बर को जारी आदेश के तहत हटा दिया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी ने आदेश क्रमांक 2020/907 के तहत कार्यवाही करते हुये वन परिक्षेत्र अधिकारी गीदम सुकदास नाग को उनके पद परिक्षेत्र अधिकारी से हटाते हुये उन्हें प्रशासनिक दृष्टि से विशेष कर्तव्य दंतेवाड़ा वनमंडल दंतेवाड़ा में पदस्थ किया है। दोनो पदों पर अब नियुक्त के लिए कयास और प्रयास जोरों पर है।बहरहाल, विभाग पर लगातार इस फर्ज़ीवाड़ा पर प्रश्नचिन्ह लग रहे थे उसका किसी तरह से अंत हो गया और इस विषय में युवा डीएफओ दंतेवाड़ा की कार्यशैली की प्रंशसा होना भी लाज़मी है। गौरतलब है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी 267 जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति के जांच के बाद फ़र्ज़ी पाये गये और इसे सामान्य प्रशासन विभाग ने गंभीर मानते विभाग प्रमुखों को निर्देशित किया था कि इन सरकारी सेवकों पर सेवामुक्त करने की कार्यवाही करे।साथ ही न्यायालय द्वारा जिन लोगों ने स्थगन प्राप्त किया है उन्हें किसी भी महत्वपूर्ण दायित्व में न रखा जाये।


 इसी तारतम्य में गीदम में पदस्थ परिक्षेत्र अधिकारी सुकदास नाग भी इस सूंची में है। और जिन पर विभाग द्वारा कार्यवाही की गयीं है।एक ओर ऐसे लोग भी हैं जिनका जाति प्रमाणपत्र ही नहीं बन पा रहा है और वे शासन के अनेक लाभ लेने से वंचित हो रहें हैं तो दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी है जो फर्जी तरीके से जाति प्रमाणपत्र बना कर शासकीय नौकरी कर लेते है और ये सरकारी सेवक न्यायालय से स्थगन लेकर सेवानिवृत्त भी हो जाते हैं। छानबीन समिति का उद्देश्य ही ऐसे प्रकरणों को जांचना होता है। शासन/प्रशासन को चाहिये कि ऐसे सेवकों पर त्वरित कार्यवाही की जाये अन्यथा ऐसी प्रथा बढ़ती जायेगी और हकदार वंचित होते रहेंगे।