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टाउनशिप के लोग साफ पानी पीने के लिए दर-दर भटकने मजबूर,जाने क्या है कारण ,पढ़िए पूरी खबर

टाउनशिप के लोग साफ पानी पीने के लिए दर-दर भटकने मजबूर,जाने क्या है कारण ,पढ़िए पूरी खबर

भिलाई18 अप्रैल।  होली बीतने के तुरंत बाद भिलाई इस्पात संयंत्र प्रशासित नगरीय क्षेत्र में अचानक गंदे मटमैला पानी का वितरण नलों से चालू हो गया। कई प्रकार की शिकायतों के बावजूद साफ पीने का पानी संयंत्र प्रबंधन उपलब्ध नहीं करा सका।

संयंत्र प्रबंधन ने कर्मचारियों और अधिकारियों में ही अलग-अलग बयान बाजी सामने आई। संपूर्ण भिलाई क्षेत्र में मटमैला और बदबूदार पानी भेजने की शिकायतें बड़ी संख्या में आने लगी। यह सब ऐसे समय में होने लगा जब कोरोना वायरस संक्रमण के कारण संपूर्ण जिले में कर्फ्यू जैसे लॉकडाउन लगा दिया गया। स्थिति यह हो गई कि लोगों को साफ पानी पीने के लिए दर-दर भटकने की नौबत आ गई। अधिकांश घरों में पानी वितरण करने वाली कंपनियों के जार खरीदकर लाए जाने लगे हैं। पानी के जार भी इस विपरीत स्थिति में अपनी वास्तविक कीमतों से अधिक कीमत पर दिए जा रहे हैं।

संयंत्र की स्थापना के बाद से ऐसा पहली बार हुआ है जब संपूर्ण टाउनशिप में पीने का गंदा पानी इतने लंबे समय तक लगातार दिया जा रहा है और प्रबंधन साफ पानी देने  में अब तक पूरी तरह नाकाम है।



अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता सतीश कुमार त्रिपाठी ने संयंत्र के विभिन्न अधिकारियों से इस दिशा में तत्काल काम करने और साफ पानी मुहैया कराने हेतु अनुरोध किया। त्रिपाठी ने बताया कि प्रमाणित रीति से ऐसा पानी मिलता था कि गंभीर बीमारियों के फैलाव के समय भी संयंत्र प्रबंधन शासित क्षेत्र में कोई विशेष प्रभाव नहीं होता था। एक समय ऐसा भी था जब लगभग एक लाख लोग भिलाई इस्पात संयंत्र में काम करते थे और कई प्रकार की सामाजिक गतिविधियों में संयंत्र प्रबंधन सीधा कार्य करता था।

आज लगभग 20000 कर्मियों का संयंत्र अपनी सामाजिक सहभागिता से पूरी तरह पीछे हट चुका है, इसके बावजूद साफ पीने का पानी मुहैया करवा पाने में हाथ पांव फूल गए हैं। त्रिपाठी ने संयंत्र के वरिष्ठ महाप्रबंधक से भी बात की। बताया गया कि यह समस्या क्यों पैदा हुई, इसका कोई ठोस कारण अधिकारियों को समझ में नहीं आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अचानक कई जगहों से एक साथ फोर्स के साथ मरोदा टैंक में पानी आने के कारण मरोदा टैंक तालाब का सारा पानी हिल गया। इस कारण समस्या हुई।

 ज्ञातव्य है कि इस टैंक से पानी संयंत्र के टंकी मरोदा स्थित जल शोधन संयंत्र में पहुंचता है। वहां जल का शोधन किया जाता है। तब पानी की गुणवत्ता जांच कर उसे घरों में सप्लाई किया जाता है। इसलिए प्रबंधन का यह तर्क गले नहीं उतरता कि तालाब का पानी गंदा होने से सप्लाई के पानी में गंदगी हो रही है। यदि ऐसा है तो इसका मतलब संयंत्र का मरोदा स्थित जल शोधन संयंत्र फेल हो चुका है।

टेलीफोन पर बात करने से अधिकारियों का कहना है कि पानी के संबंध में जांच करने के लिए बाहर की एजेंसियों को बुलाया गया है। लेकिन अधिकारी यह बता पाने में पूरी तरह असफल है कि आखिर इस समस्या का निदान कब तक किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में एकाध महीने तक का समय भी लग सकता है।
त्रिपाठी का कहना है कि वह इस संबंध में छत्तीसगढ़ के चीफ जस्टिस को सोमवार को लिखित आवेदन भेजेंगे। स्वच्छ पेयजल जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। भिलाई इस्पात संयंत्र के जल प्रबंधन के अधिकारियों का उपेक्षा पूर्ण व्यवहार और काम करने का मूर्खतापूर्ण तरीका शहर के आम नागरिकों की जान को खतरे में डाल सकता है।

 जब पानी का रंग मटमैला है। तो उसे किसी भी आधार में साफ कह कर पीने लायक बताना संयंत्र प्रबंधन के अधिकारियों की लापरवाही और स्वयं को बचाने की नीति मात्र है। ऐसे समय में जबकि लोग घरों से बाहर ना निकल पाने के लिए मजबूर हैं। तब संयंत्र प्रबंधन की इस प्रकार की गतिविधियां संयंत्र में कार्य कर रहे अधिकारियों की अक्षमता को सिद्ध कर रहा है। कभी ऐसा भी समय था जब अधिकारी छोटी से छोटी बातों पर दिन रात एक कर के काम किया करते थे। आज स्थिति यह है कि अधिकारी स्वयं कह रहे हैं कि इस प्रकार की गतिविधियों को ज्यादा प्रचारित न करें। मुख्य न्यायाधीश से इस विषय में इसलिए भी शिकायत की जाएगी क्योंकि स्थापना के बाद से आज तक संयंत्र में कभी इस प्रकार की अनियमितता और लापरवाही नहीं हुई। इसलिए शासन प्रशासन सहित मुख्य न्यायाधीश से संयंत्र प्रबंधन और सेल के उच्चाधिकारियों पर कार्यवाही हेतु आवेदन किया जाएगा।