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धान खरीदी में अव्यवस्था, जिले के 64 केन्द्रों में क्षमता से अधिक धान जाम

धान खरीदी में अव्यवस्था, जिले के 64 केन्द्रों में क्षमता से अधिक धान जाम


मिलरों की लापरवाही से किसानों को आने वाले दिनों में आ सकती है दिक्कतें

विनोद (विभूति) कुमार

जगदलपुर, 24 दिसंबर। जगदलपुर जिले में धान खरीदी को शुरू हुए 21 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अव्यवस्थाओं ने इस कदर से कब्जा कर रखा है कि अगर व्यवस्थाओं को दुरूस्त नहीं किया गया तो आने वाले दिनों किसानों की मुसीबत बढ़ने के साथ ही खरीदी केन्द्रों में पडे़ हुए धान पर मौसम की कभी भी मार पड़ सकती है। 

दरअसल, जिले में कुल 64 धान खरीदी केन्द्र है, हर केन्द्र की क्षमता करीब ढाई लाख किवंटल के आसपास है, लेकिन इस बार खरीदी केन्द्रों में हो रही बंपर खरीदी के चलते क्षमता से आंकडा पार हो गया है। धान खरीदी कर रखने के लिए जो प्लेटफार्म खरीदी केन्द्रों में बनाए गए हैं वह पूरी तरह से लबालब हो चुके हैं। वर्तमान में खरीदी केन्द्रों में हर धान की आवक हो रही है, लेकिन धान का उठाव नहीं होने से आने वाले दिनो में किसानों को टोकन नहीं मिलने की परेशानी आने वाली है। 

आज की जनधारा  की टीम ने शहर से सटे पल्ली धान खरीदी केन्द्र का जायजा लिया, जहां पर क्षमता से तीन गुना धान खरीदा जा चुका है ..हालात ये है कि अब धान रखने की जगह बची नहीं हैं। धान की आवक लगातार हो रही हैं। जिस वक्त आज की जनधारा की टीम पल्ली धान खरीदी केन्द्र में पहुंची हुई थी उस समय बिरिंगपाल से करीब आधा दर्जन किसान धान लेकर पहुंचे हुए थे। बिरिंगपाल से आए किसान हरीराम बघेल और गणेश राम ने आज की जनधारा टीम से बातचीत करते हुए कहा कि इस बार उन्होंने काफी बडी मात्रा में धान लगाया था, फसल भी अच्छी हुई है अभी पहली खेप लेकर आए हैं ..इस धान के बिकने के बाद दूसरी खेप भी लेकर आएंगे, लेकिन उनकी चिंता इस बात की थी कि उन्हे टोकन तो दे दिया गया है। लेकिन खरीदी केन्द्रों में जगह नहीं होने से ऐसा न हो कि जगह खाली होने तक उन्हें इंतजार करना पडे। उधर, गणेश राम किसान ने पहली बार अपने खेत में धान लगाया था ..ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार ने इसबार बोनस दिया है।


इससे पहले बीजेपी के समय में बोनस नहीं मिलने से धान लगाना उसने किसी समय में बंद कर दिया था। अब पन्द्रह साल के बाद दुबारा धान लगाया है। करीब डेढ सौ किंवटल धान गणेश खरीदी केन्द्र में लेकर पहुंचा हुआ था। सरकार के लिए ये अच्छी बात है कि किसानेां को बोनस बांटे जानें से इस बार वे किसान भी धान की खेती किए थे जो धान लगाते ही नहीं थे..पल्ली केन्द्र में पहुंचे किसानेां केाई सौ किंवंटल तो कोई ढाई सौ से तीन किंवंटल धान लेकर पहुंचा था, लेकिन सवाल ये है कि खरीदी केन्द्रों में पिछले 21 दिनों से धान के जाम होने से और उठाव नहीं होने से चितां खरीदी केन्द्र प्रभारियों को बढ रही है ...जिला विपणन विभाग के जिम्मेदारों की मानें तो डी ओ कटना शुरू हो चुका है, और राइ्रस मिलर एक दो दिनों में धान का उठाव शुरू कर देगें, लेकिन हालात देखकर जिम्मेदारों के बयान पर यकीन नहीं हो रहा है। 

खरीदी केन्द्रों में धान के जाम होने के साथ एक बड़ी समस्या ये भी है कि धान को रखने के लिए सरकार ने जो दावा किया था कि खरीदी केन्द्रों में पर्याप्त मात्रा में बारदानें भेजे गए है, उसके उलट ही तस्वीर वहां पर दिखाई दी। पल्ली के वारदाना प्रभारी रघुनाथ के मुताबिक पुराने बारदाने जो कि कटे-फटे हैं और राइ्रस मिलरों से मिले हैं, उन्हीं बारदानों को धान संग्रहण के लिए उपयोग किया जा रहा है। 

कुल मिलाकर अव्यवस्था के आलम के बीच धान खरीदी जारी है। फिलहाल जरूरत इस बात कि है कि आने वाले दिनों में मौसम खराब हुआ तो खुले में पड़ा सैकडों क्विंटल धान खराब हो सकता है, ऐसे में उसका जिम्मेदार कौन होगा ...?