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पिछली सरकार में जबरिया अनिवार्य सेवानिवृत्ति के शिकार 186 कर्मचारी अधिकारी पुनः बहाली के इंतजार में

पिछली सरकार में जबरिया अनिवार्य सेवानिवृत्ति के शिकार 186 कर्मचारी अधिकारी पुनः बहाली के इंतजार में


 अधिकारियों के अरुचि से सामान्य प्रशासन विभाग में प्रकरण की नस्ती 1 साल से केबिनेट के लिये लंबित है

मुख्यमंत्री से दिये भरोसा पर ट्यूट कर जबरिया रिटायर लोगो को बहाली मांग की

रायपुर, 10 जून। पूर्ववर्ती छत्तीसगढ़ राज्य सरकार  ब्यूरोक्रेट्स के सलाह पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नियमों के आड़ में विधान सभा चुनाव के पहले जबरिया सेवानिवृत्त कर नौकरी से हटाकर बेरोजगार कर दिया।

विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की नई सरकार के पदारूढ़ होने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अनिवार्य सेवानिवृत्त किये गए कर्मचारियों को पुनः सेवा में बहाल करने का भरोसा दिया था। वह भरोसा नई सरकार के ढाई साल बीतने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग छत्तीसगढ़ शासन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा पुनः बहाली के मामले में रुचि नहीं लेने कारण टूटने लगा है,क्योकि मिली जानकारी अनुसार  प्रकरण की नस्ती विभागों से सारी जानकारी प्राप्त करने के बाद लगभग 1साल से केबिनेट में रखे जाने हेतु सामान्य प्रशासन विभाग में लम्बित पड़ा हुआ है। इस पर राज्य कर्मचारी संघ के पूर्व प्रांताध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ राज्य सँयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने ट्यूट कर मुख्यमंत्री से कोरोना काल मे आर्थिक तंगी से जूझ रहे जबरिया रिटायर किये गये लोगो को तत्काल सेवा में बहाली करने की मांग की है।


 आगे बताया है कि तत्कालीन रमन सरकार में जबरन रिटायर किए गए शासकीय सेवकों की बहाली के लिये अनिवार्य सेवानिवृत्त किए गए शासकीय सेवकों के अभ्यावेदनों पर विचार हेतु सरकार ने सभी विभागों को 18/11/19 को आदेश जारी कर दिशा-निर्देश दिया कि 50 वर्ष की आयु अथवा 20 वर्ष की सेवा पूरा करने पर छानबीन समिति की अनुशंसा पर अनिवार्य सेवानिवृत्त किए गए शासकीय सेवकों के द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदनों पर विचार किया जाए और साथ यह भी निर्देश था कि यदि किसी प्रकरण में यह तय हो जाता है कि जिस व्यक्ति को अनिवार्य रूप से रिटायर किया है, उसे यदि उनके द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन पर विचारोपंरात पुनः सेवा में लिया जाए, तो अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्ति की तिथि तथा पुनः सेवा में लेने के बीच की अवधि का नियमितिकरण मूलभूत नियम54(ए) में उल्लेखित प्रावधानों के अनुसार किया जाए,तदनुसार निर्देश के पालन में विभागों ने अपनी जानकारी समयसीमा में सामान्य प्रशासन विभाग में प्रस्तुत कर दिया है।

आगे बताया गया है कि जबरिया सेवा से रिटायर के शिकार लोगों को मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रियों ने भी कर्मचारी संगठनों को समय समय पर उन्हें प्रत्यक्ष भेंट में शीघ्र बहाली का विश्वास दिया गया है और कुछ मन्त्रियों एवं कांग्रेस के विधायकों ने पुनः बहाली हेतु मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है, मगर सभी कवायद मंत्रालय के गलियारों में जाकर गुम हो गई है। विगत 2 वर्षों लगातार कोरोना के मार झेल रहे जबरिया रिटायर के शिकार लोग अब गम्भीर आर्थिक तंगी में जीवन यापन करने के लिये मजबूर परेशान जल्द बहाली के लिये मुख्यमंत्री और भगवान से गोहार लगा रहे हैं। 

 उन्होंने आगे बताया है कि छत्तीसगढ़ राज्य में डॉ रमन सिंह के कार्यकाल के अंतिम वर्षो में दसकों पूर्व से लागू इस आदेश का सन 2017 में   खूब दुरुपयोग किया गया और 4 भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी क्रमशः आईएएस बी एल अग्रवाल, अजयपाल सिंह तथा आईपीएस के सी अग्रवाल, एम जूरी, राजकुमार देवांगन को जबरिया अनिवार्य सेवानिवृती देकर सेवा से पृथक कर दिया गया। बाद में एक दो अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पुनः सेवा में बहाल हुए। यही स्थिति राज्य सेवा अधिकारियों एवं अनेक तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों के साथ भी हुआ।अनेक विभाग के अनेक कर्मचारी गण आज भी हाईकोर्ट बिलासपुर में याचिका दायर कर निर्णय के इंतजार कर रहें है।

 उन्होंने आगे बताया है कि जैसे ही सरकार बदली जबरिया सेवानिवृत्त किये गये कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भेंट कर विधायकों के माध्यम से, कर्मचारी संगठनों के द्वारा और व्यक्तिगत रुप से भेंट कर पत्राचार व चर्चा कर बाल बच्चों का हवाला देकर सेवा में पुनः बहाल करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने भी सबको भरोसा दिया कि वे सबको सेवा में बहाल कर वापसी करेगें। अधिकारियों को लिखित, मौखिक निर्देश दिये गये, मगर आज तक हाईकोर्ट के स्प्ष्ट निर्देश पर बहाली को छोड़कर अन्य बाकी बचे किसी भी प्रकरण पर  शासन से अंतिम निर्णय नही हो सका है। मंत्रालय सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार अनेक प्रकरण अंतिम निर्णय हेतु सामान्य प्रशासन विभाग छत्तीसगढ़ शासन में करीब 1 वर्ष से लटकी पड़ी है, क्योंकि अधिकारियों को इसमें कोई रूचि नही है और मुख्यमंत्री के कानों तक यह बात किसी माध्यम  पहुँचाई नहीं जा सकी है। अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश के शिकार लोग हर केबिनेट बैठक में अपने मुद्दे पर निर्णय के इंतजार में मुख्यमंत्री भूपेश बधेल के भरोसे पर विश्वास कायम रखें हुये हैं।