दक्षिण कोरियाई सिनेमा का नया अवतार

दक्षिण कोरियाई सिनेमा का नया अवतार

अजित राय

एक जमाने में दक्षिण कोरिया के जीनीयस फिल्मकार किम कि डुक की फिल्मों का दुनिया भर में डंका बजता था पर हाल के वर्षों में उनकी चमक फीकी पड़ने लगी थी। लेकिन पिछले  दो तीन वर्षों से कोरियाई सिनेमा ने कान फिल्म समारोह के साथ साथ दुनिया भर के फिल्म समारोहों में अपनी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज की है। जब पिछले साल 72 वें कान फिल्म समारोह में दक्षिण कोरिया के बोंग जून हो की फिल्म " पारासाइट " को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार " पाम डि ओर " मिला तो सभी को अचंभा हुआ। अभी उस पुरस्कार की चमक फीकी भी नहीं पड़ी थी कि  इसी हप्ते 92 वें एकेडमी अवार्ड्स में उसने चार चार पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया। पारासाइट को बेस्ट पिक्चर, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट ओरिजनल स्क्रीन प्ले और बेस्ट इंटरनेशनल फिल्म का पुरस्कार मिला।

किम कि डुक की कालजयी फिल्म स्प्रिंग समर फाल विंटर....एंड स्प्रिंग (2003)  से उन्हें दुनिया भर में ख्याति मिली। उनकी नई फिल्म ह्यूमन स्पेस टाइम एंड ह्यूमन (2018) दिल दहलाने वाली फिल्म है जिसमें भूख मिटाने के लिए इंसान इंसान का मांस खाता है। यह फिल्म मानव सभ्यता का दुखांत रचती है।

         तीन साल पहले दक्षिण कोरिया से आस्कर अवार्ड के लिए नामांकित  किम जी वुन की " दि एज ऑफ शैडोज "   को देखकर पता चलता है कि एक थ्रिलर भी सिनेमाई गुणवत्ता के उत्कर्ष पर जा सकता है। कोरिया के दो सुपर स्टार अभिनय मे एक दूसरे पर बीस पड़ते है- सोंग कॉग हो और  गोंग यू। पटकथा इतनी सधी हुई कि भाषा न जानने के बावजूद दो घंटा बीस मिनट कब बीता, पता नही चलता। कला निर्देशक ने जिस कुशलता से 1920 के शंघाई और सिओल को रचा है वह जादुई आकर्षण पैदा करता है। हम सॉस रोककर देखते है कि अब क्या होगा तभी कोई घटना तेज गति से पटकथा को घूमा देती है। शंघाई से सिओल जा रही ट्रेन मे जापानी सेना का खोज अभियान काफी दिलचस्प है।


पटकथा बस इतनी है कि 1920 के दशक में  कोरिया पर जापान का शासन था  । जापानी सेना का एक कोरिआई कमांडर  ली जूल चुल को कोरियाई क्रांतिकारियों के बीच घुसपैठ के सीक्रेट मिशन पर भेजा जाता है।वह क्रांतिकारियों के नेता किम वु जिम से मिलता है। इतिहास के उस नाजुक मोड़ पर दो विरोधी एक-दूसरे का मतलब समझते हुए भी करीब आते है। सिओल के जापानी मुख्यालय को बम से उड़ाने की योजना के साथ सारे क्रांतिकारी शंघाई मे जुटते है जहॉ जापानी सेना पहले से ही उनका इंतजार कर रही है। दोनो ओर से खुफिया सूचनाएँ लीक होती है। कोई नही जान पाता कि यह काम कौन कर रहा है। संशय के माहौल मे बम बनाने के सामान से लदा एक ट्रक सिओल की ओर जा रहा है। जिस ट्रेन से क्रांतिकारी सिओल जा रहे है उसमे भी जापानी सेना के अधिकारी उनकी खोज में है। जापानी सेना का एक कोरिआई कमांडर ली जूल चुल ट्रेन मे कई बार क्रांतिकारियों ने नेता किम वु जिम को जापानियों से बचाता है। उसपर राष्ट्र द्रोह का अभियोग लगता है। उसे एक महीने की जेल हो जाती है और नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाता है ।