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BIG NEWS : कमीशनखोर अफसर बोला-मेरा मुंह मत खुलवाना, नहीं तो खोल दूंगा सारा भ्रष्टाचार

 BIG NEWS : कमीशनखोर अफसर बोला-मेरा मुंह मत खुलवाना, नहीं तो खोल दूंगा सारा भ्रष्टाचार

इंदौर। कमीशनखोरी की वाइस रिकार्डिंग सामने आने के बाद भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे आइपीडीएस के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अशोक शर्मा ने बिजली कंपनी के अन्य इंजीनियों को धमकी दे दी है। इंजीनियरों के वाट्सएप ग्रुप पर शर्मा ने सीधे तौर पर लिख दिया कि मैंने मुंह खोला तो हरियाणा जैसा भ्रष्टाचार का मामला उजागर हो जाएगा।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा में आइपीडीएस योजना में बिजली कंपनी के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आपराधिक मामला बीते दिनों ही दर्ज हुआ है। इधर भ्रष्टाचार को दबाने के लिए निजी कालोनियों में लगाए गए खंभे निकालने का काम भी शुरू हो गया है। बिजली कंपनी के एमडी और सीजीएम की चुप्पी के पीछे शर्मा की धमकी को भी वजह माना जा रहा है।

ऑडियो हुआ था वायरल - आइपीडीएस के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अशोक शर्मा को आइपीडीएस के कामों का ठेका लेने वाली कंपनी के अधिकारी से कमीशन का मोलभाव करते आडियो रिकार्डिंग वायरल हुई थी। इसके बाद भी बिजली कंपनी ने शर्मा पर कार्रवाई तो दूर आइपीडीएस के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद से भी हटाना भी उचित नहीं समझा। बिजली कंपनी के एमडी अमित तोमर ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि रिकार्डिंग की जांच सीजीएम संतोष टैगौर करेंगे। टैगोर ने खामोशी ओड़ ली है।

दरअसल अंदरखाने में टैगोर की कुछ रिकाॢडंग की सुगबुगाहट भी चलने लगी है। मेरे पास भी है रिकाॄडग - इस बीच बिजली कंपनी के इंजीनियरों के ग्रुप पर इंजीनियर शर्मा ने सरेआम यह लिखकर खलबली मचा दी कि मेरे पास भी कुछ रिकाॄडग है जो सार्वजनिक कर सकता हूं। लेकिन मैं चाहता नहीं हूं कि उनका खुलासा करुं। अन्यथा मामला हरियाणा की तरह ही खुलेगा।

शर्मा ने यह भी लिखा कि अधिकारियों ने असल से अधिक बिल मंजूर किए। इससे बिजली कंपनी को भारी नुकसान हुआ। मैं खामोश हूं तो मुझे चुप्पी तोडऩे पर मजबूर न किया जाए। बताया जा रहा है कि शर्मा ने यह बात तब लिखी जब उनकी रिकाॄडग किसी ने इंजीनियरों के ग्रुप पर पोस्ट कर दी। हटने लगे पोल - इस बीच बिजली कंपनी ने महालक्ष्मी जोन से जुड़ी मांगलिया की रामेश्वर धाम कालोनी में लगे बिजली के लगे हुए खंभे हटवाने की बात सामने आई है। इस संबंध में एक वीडियो भी जारी हुआ है जिसमें पहले से लगे खंभे हटाए जा रहे हैं।

ये उसी कंपनी के खंबे हैं जो आपीडीएस में सपलाय हुए थे। बताया जा रहा है कि आगे की जांच और भौतिक सत्यापन में घोटाले के सबूत नहीं मिले इसलिए पहले से लगे खंभों को कोई जगह से हटाया जा रहा है। कालोनाइजरों को बेच दिए - दरअसल सरकार की योजना में आए खंबे कालोनाइजरों को बेचने के आरोप हैं।

इधर महालक्ष्मी जोन के इंजीनियर तरुण चावला ने यह कहकर इससे पल्ला झाड़ लिया कि निजी कालोनी से खंबे बिजली कंपनी नहीं कालोनाइजर निकलवा रहा होगा। चावला ने कहा कि वीडियो मैंने भी देखा है जहां खंबे हटाए वहां बिजली की चालू लाइन नहीं है। हम इस बारे में नहीं जानते।