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लगातार हो रहे नक्सली मूवमेंट ने सुरक्षा एजेंसियों के उड़ा दिए होश

लगातार हो रहे नक्सली मूवमेंट ने सुरक्षा एजेंसियों के उड़ा दिए होश

भोपाल । मप्र में नक्सली अपनी गतिविधियों को फिर से बढ़ाने लगे हैं। उन्हें हथियारों की भरपूर सप्लाई हो रही है, जिससे नक्सलियों के तमाम दलों के हौसले बुलंद हैं। उनके लगातार हो रहे मूवमेंट ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैँ। एजेंसियां नक्सलियों के खात्मे के लिए कई प्रयास कर रही हैं। प्रदेश में नक्सली कई रास्तों के सहारे पहुंच बनाते हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में नक्सलियों ने बीते कई वर्षों में किसी बड़ी वारदात को अंजाम नहीं दिया है, लेकिन कुछ दिनों पहले उन्हें हथियार सप्लाई करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। हाल ही में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में पता चला कि हथियार मुख्य रूप से राजस्थान से खरीदे जाते थे। यहां से उन्हें महाराष्ट्र ले जाया जाता था। इसके बाद महाराष्ट्र की सीमा से लगे मध्य प्रदेश के जिलों से इन्हें नक्सलियों तक पहुंचाय जाता था। गिरोह से बड़ी संख्या में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। इंस्पेक्टर जनरल (ढुत्र), (नक्सल विरोधी) फरीद शापू ने बताया कि मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ के ट्राई-जंक्शन में सक्रिय नक्सल दलों को अवैध हथियार, विस्फोटक सामग्री की सप्लाई महाराष्ट्र से होती है। पिछले एक साल सात-आठ बार विस्फोटक, नाईट विजन, बायनाकूलर, हाइरेंज टॉर्च, टेक्निकल शूज समेत अन्य घातक सामग्री नक्सलियों तक पहुंची है। बालाधाट जिले में सक्रिय टांडा, दलम, मलाजखण्ड दलम, दरेंकसा दलम, विस्तार प्लाटून-02, विस्तार प्लाटून-03 और खटिया मोचा एरिया कमेटी के नक्सलियों को अवैध हथियार मिल रहे हैं। रिटायर्ड डीजीपी आरएलस यादव ने बताया कि हथियारों की सप्लाई के लिए महाराष्ट्र से लगने वाले बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी जिलों की सीमाओं का उपयोग किया जाता है। खरगोन जिले की झिरन्या तहसील का पाल क्षेत्र और बड़वानी जिले के सेंधवा की सीमा आरोपियों के लिए ज्यादा आसान होती है। यह क्षेत्र घने जंगलों वाला है। साथ ही, आदिवासी बाहुल होने के कारण समाजसेवा के नाम पर नक्सलियों का कुछ नेटवर्क भी यहां है। इन्हीं क्षेत्रों में सिकलीगरों द्वारा अवैध हथियार बनाने का इतिहास रहा है। राजस्थान के गिरोह के अलावा सिकलीगर भी हथियार मुहैया कराते थे।