II प्रधान संपादक सुभाष मिश्र आगाह कर रहे हैं कि अकाल में उत्सव मनाने वालों को आने वाले समय में हम सब मिलकर सफल ना होने दें

II प्रधान संपादक सुभाष मिश्र आगाह कर रहे हैं कि अकाल में उत्सव मनाने वालों को आने वाले समय में हम सब मिलकर सफल ना होने दें
  • सुभाष मिश्र


इस समय देश में तबलीगी जमात और मौकापरस्त जमात के लोगों का ही बोलबाला है। सारा मीडिया ये दोनों जमातों की कारगुजारियों, इनके द्वारा फैलाये जा रहे तरह-तरह के वायरस से संक्रमित है। खुद कुछ मीडिया संस्थान, व्यक्ति भी अपनी मौकापरस्ती, स्वामीभक्ति दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं। मौका देखकर चौका मारने वाले मौकापरस्त लोग हमेशा से सक्रिय रहते हैं, जैसे बिल्ली के भाग्य से छिंका टूटता है' वैसे ही ये मौकापरस्त लोग अवसर की तलाश में रहते हैं। इस बार तबलीगी जमात के कुछ जाहिल, अंधविश्वासी लोगों ने बैठेठाले कुछ ऐसे लोगों को भी मौका दिला दिया है जिनके मन में सांप्रदायिकता भरी है और कई बार तो ये अवसरों को प्रायोजित करते हैं।

भूख, गरीबी, महामारी, अकाल, चीजों का अभाव, समाज में व्याप्त भय और संकट की घड़ी में सर्वाधिक मुनाफा कमाने को आतुर व्यवसायियों की जमात के कुछ लोग कफन चोरी में भी पीछे नहीं रहते। उदारीकरण और तकनीकीकरण के पहले ये तत्व अधिकमत मुनाफा कमाने, कालाबाजारी करने के लिये बहुत सी सरकारी सहायता को गड़ीगप कर लेते थे। इंटरनेट के जरिये मिलने वाली आनलाईन सुविधा और सिस्टम में आई थोड़ी बहुत पारदर्शिता के कारण कई बार चाहकर भी इनकी दाल नहीं गल पाती पर लहरों के राजहंस अपने लिये कोई न कोई तोड़ ढूंढ़ ही लेते हैं।

सूदखोरी, मुनाफाखोरी, कालाबाजारी के जरिये अधिकतम मुनाफा कमाने वाले ऐसे लोग मरी का माल खरीदने के उस्ताद होते हैं। जैसे ही किसी किसान, परिवार पर स्वास्थगत या पारिवारिक कारणों से आर्थिक तंगी आती है, ये लोग उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर औने—पौने में उसकी जमीन, जायदाद वस्तुएं खरीद लेते हैं। इस जमात के लोग कोरोना समय में भी बहुत सक्रिय हैं। आने वाला आर्थिक संकट काल, ऐसे लोगों के लिये स्वर्णकाल सिद्ध हो सकता है. हमारे छत्तीसगढ़ के बहुत से भू—माफियाओं ने यहां के जरूरतमंद किसानों की जमीन, बयाना राशि दे करके बहुत कम कीमत पर खरीदी और खरीद रहे हैं। कानूनी दांवपेंच के जानकार ये लोग लोगों की अज्ञानता का भरपूर लाभ उठाते हैं। अब एक बार इस कोरोना कालखंड के चलते सबसे ज्यादा किसान, मजदूर और लघु उद्योग में लगे लोगों पर आर्थिक मार पड़ी है।