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कोरोना क्या खाएं, क्यों खाएं -डॉ राजाराम त्रिपाठी

कोरोना क्या खाएं, क्यों खाएं -डॉ राजाराम त्रिपाठी


पहला सुख निरोगी काया, इस बहुपरीक्षित पुरानी कहावत को पूरी तरह से भुलाकर अधिकाधिक पैसा, नाम, जमीन जायदाद ,भोग विलास, भौतिक सुखसाधन जुटाने की अंधी दौड़ में जुटे इंसान को इस नामुराद महामारी कोरोना ने मारक चाबुक के प्रहार से एक बार फिर इस पुरानी कहावत को न केवल याद दिला दिया है, बल्कि इस सोलह आने सच कहावत की सच्चाई का यकीन भी दिला दिया है। इस नए घातक वायरस से लड़ने के लिए यूं तो कई वैक्सीन बाजार में आ गई हैं, तरह तरह की दवाइयों के प्रयोग भी इस बीमारी में हो रहे हैं, जो काफी हद तक कारगर भी सिद्ध हुए हैं।परन्तु आज पर्यंत कोई भी इस बीमारी शत शत प्रतिशत बचाव अथवा इस बीमारी के शर्तिया सर्वमान्य समूल इलाज का दावा नहीं कर सकता। कहां जाने लगा है कि मानव को अब इस दुर्निवार्य बीमारी के साथ ही (अपने को बचाए रखते हुए), नई जीवनशैली विकसित करनी होगी। लेकिन जिस एक बात पर सारे विश्व के वैज्ञानिक निर्विवादित रूप से एकमत हैं, वह यह है कि इस महामारी से ग्रस्त हुए प्रति 100 मरीजों में जो औसतन 97 मरीज, कम से कम तकलीफ झेल कर, जल्द से जल्द पूरी तरह से स्वस्थ हुए हैं, उसका एकमात्र कारण मनुष्य को प्रकृति के द्वारा उपहार में दिया गया, अनमोल रक्षा कवच, अर्थात उनकी अपनी खुद की शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता ही है। यही वह अभेद्य रक्षा कवच है, जो मनुष्य जाति के विकास से लेकर अब तक तरह तरह के रोगों, व्याधियों, महामारियों के आक्रमण से मनुष्य को बचाते आया है । वर्तमान भोगवादी जीवन शैली ,रासायनिक खाद एवं रासायनिक दवाइयों के अंधाधुंध प्रयोग से प्रदूषित , विषैले खाद्य पदार्थों, प्रदूषित जल तथा वायु आदि ने इस अभेद्य कवच को बेतरह जर्जर कर डाला है। शारीरिक श्रम के सम्मान का सामाजिक अवमूल्यन भी इसका एक बड़ा कारण रहा है। हमारी पीढ़ियों के अधेड़ व बूढ़े रोगग्रस्त शरीरों में अब इतनी भी रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं बची कि मूलतः सर्दी जुखाम जैसे मौसमी बीमारी के इस म्युटेंट वायरस को अपने दम पर परास्त कर सकें, इसलिए पचास तथा उससे ज्यादा उम्र की लोगों में यह बीमारी सबसे ज्यादा मारक सिद्ध हुई है । 

हमारी प्राचीन चिकित्सा पद्धति का आधार आयुर्वेद तथा योग का सुयोग इस कठिन घड़ी में मानवता की सबसे ज्यादा मदद करने की स्थिति में है, इसमें किसी को शंका नहीं होनी चाहिए।

भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय आयुष ने इस वैश्विक महामारी के देश में दस्तक के साथ ही इससे लड़ने में हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक "आयुष क्वाथ" , हर्बल टी तथा अन्य सहायक जड़ी बूटियों के उपलब्ध चिकित्सीय सलाह के अनुसार सेवन की सलाह दी थी। इनका उपयोग करने वाले बहुसंख्यक लोगों ने यह साबित भी कर दिया कि, जिन लोगों ने इनका समुचित प्रयोग किया, उन्हें इसका जबरदस्त फायदा भी मिला है। हाल में ही भारत के आयुष मंत्रालय ने ऐसी 20 जड़ी बूटियों की सूची प्रकाशित की है, जिनके समुचित सेवन से जन सामान्य अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर इस महामारी से लड़ कर विजयी हो सकता है। इनमें प्रमुख रूप से हैं अश्वगंधा, हल्दी, तुलसी, अदरक,काली मिर्च, नीम, मुलेठी, लेमन ग्रास ,वन तुलसी, आंवला, कालमेघ, चिरायता, गिलोय,दालचीनी,अडूसा, पोखरमूल, भारंगी,लौंग,कटुकी । इसके अलावा कोरोना बीमारी से उबरने के बाद कोरोनावायरस कई तरह के दुष्प्रभाव हमारे शरीर में छोड़ जाता है उससे उबरने में सफेद मूसली, विशेष रुप से (क्लोरोफिटम बोरिविलयनम) बेहतरीन उपयोगी साबित हुई है। शरीर के मेटोबोलिज्म में सुधार कर सभी अंगों प्रत्येगों का पुनर्नवीकरण (Revitalize कर) प्राकृतिक रूप से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने तथा उसे बनाए रखने के लिए पर्याप्त प्रोटीन तथा अन्य सभी आवश्यक पोषक तत्वों की नियमित आवश्यकता होती है। हम बारी बारी से आयुष मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा अनुशंसित उपरोक्त बीसों जड़ी बूटियों की सही पहचान से लेकर उनके विभिन्न गुणों तथा उसके सही सेवन विधि पर अलग-अलग लेखों में विस्तार से क्रमशः प्रकाश डाल रहे हैं। उपरोक्त बीस वनौषधियों के अलावा हमें अपने नित्य के भोजन में और कौन-कौन से सहज उपलब्ध फल तथा सब्जियों को शामिल करना चाहिए,आम जनों को इसकी भी विज्ञान सम्मत जानकारी जरूरी है। इस कड़ी में सबसे पहले हम उस अनूठे 'फल की चर्चा कर रहे हैं, जिससे भलीभांति परिचित हैं। इसके बारे में कहा जाता है कि यह मनुष्य से पहले भी पर गिर के बगीचे में पाया जाता था और यही वह फल है जो मनुष्य को स्वर्ग से बाहर निकाल फेंकवाने के लिए भी किसी हद तक जिम्मेदार माना जाता है।

 इसके बारे में एक बड़ी पुरानी कहावत भी थी कि, "एन एप्पल ए डे कीप्स डॉक्टर अवे" यानी कि प्रतिदिन "एक सेब खांए और बीमारियों से बचे रहें। पर हालात ऐसे बने की सेब के फलों में जहरीले कीटनाशकों का इतना ज्यादा अनिवार्य रूप से छिड़काव किया जाता है कि अब ज्यादातर सेब जहर बुछे हुए होते हैं। इसलिए बाजार से लाए सेब को गुनगुने पानी में करीब आधे घंटे तक डुबा कर रखें , फिर इसका छिलका निकालने के बाद ही सेवन करें।

चूंकि बाजार में सेब की कई किस्में पाई जाती हैं, इसलिए कई बार यह सवाल बार-बार पूछा जा रहा है कि कौन सा सेब ज्यादा लाभदायक है। यहां पर हम स्पष्ट करना चाहेंगे कि बिना रासायनिक खादों व बिना जहरीली रासायनिक दवाओं के छिड़काव के भली-भांति प्राकृतिक रूप से पके हुए सेब के सभी स्वस्थ फलों में कमोबेश समान लाभकारी गुण होते हैं अतएव लाल पीला हरा जो भी सेब सहज उपलब्ध हो उसे अवश्य खाया जाना चाहिए, पर हरे सेब की बात ही कुछ और है।

आजकल यह देखने में आ रहा है एक कोरोना से ठीक हो जाने के बावजूद कोरोना सुधीर मनुष्य के शरीर से जाने के बावजूद कई दुष्प्रभाव छोड़ जाता है जिससे ज्यादातर लोग कई स्वास्थय संबंधित समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे मरीज चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार उपरोक्त जड़ी बूटियों का सेवन तो कर ही सकते हैं, साथ ही अपने आहार में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले फल, सब्जी व खाद्य पदार्थों को शामिल कर कोरोना के पश्चात होने वाली जटिलताओं से उबर सकते हैं।

इस कड़ी में आज हम चर्चा कर रहे हैं हरा सेब की।

हरा सेब प्रायः फलों की सभी दुकानों में पाया जाता है। कई बार हम खूबसूरत लाल पीले चमकीले रंगों वाले सेब फलों की तुलना में हरा सेब को उपेक्षित कर देते हैं। जबकि यह हरा सेब गुणों की खान है। हरा सेब का पूरा नाम है,“ग्रैनी स्मिथ एप्पल (Granny Smith apples)”, जिसे बोलचाल की भाषा में हरा सेब कहते हैं।

 कई मामलों में यह हरा सेब, सेब की अन्य प्रजातियों की तुलना में अपने अनूठे गुणों के कारण 19 के बजाय 21 बैठता है। विशेषकर कोरोना के कारण हमारे फेफड़ों में कई समस्याएं पैदा होती हैं, तथा रक्त में थक्का जमने की भी गंभीर समस्याएं देखी गई हैं, पाचन तंत्र भी खराब हो जाता है और साथ ही साथ शरीर की रक्षा प्रणाली अर्थात संपूर्ण रोग प्रतिरोधक तंत्र भी कमजोर हो जाती है। ऐसे में हरे सेब का नियमित सेवन बेहद उपयोगी तथा सहायक है। हमारे शरीर में यह कैसे उपयोगी है, इसे निम्न वैज्ञानिक तथ्यों से समझेंगे।


इम्यून सिस्टम यानी की हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता:- नैसर्गिक रूप से तैयार, हरे सेब के नियमित सेवन से हमारे शरीर में कोरोना काल में उपयोग की गई शक्तिशाली एंटीबायोटिक्स व अन्यान्य औषधियों के संचित शेष विषैले पदार्थ शरीर से निकल जाते हैं. इसके सेवन से हमारा चयापचय यानी कि,मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है, और हमारा रोग प्रतिरोधक तंत्र यानी कि इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।


संकमण के बाद,फेफड़ों के स्वास्थ्य सुधार में भी सहायक है हरा सेब:

कोरोना की बीमारी से मनुष्य का जो अंग सबसे ज्यादा प्रभावित होता है वह हैं मनुष्य के प्राणपोषक फेफड़े । कोरोना वायरस का सबसे अधिक मारक वार हमारे स्वसन-तंत्र के आधार यानी कि,हमारे फेफड़ों पर ही होता है। एक शोध के अनुसार पता चला कि हरे सेब में पर्याप्त मात्रा में फ्लावोनोइड (पौधों में पाए जाने वाले पिग्मेंट) पाया जाता है। इसलिए फेफड़ों के मरीजों के लिए यह बहुत फायदेमंद होता है। इसके नियमित सेवन से फेफड़े की विभिन्न समस्याएं धीरे धीरे कम हो जाती हैं, यहां तक कि फेफड़े के कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है।

नियमित हरा सेब खाकर डायबिटीज टाइप-2 के मरीज भी लड़ सकते हैं कोरोनावायरस से:

पूरे विश्व में कोरोना से हुई मौतों के कारणों का अध्ययन करने पर यह तथ्य सामने आया है कि डायबिटीज से ग्रसित मरीजों को कोरोना से लड़ने में सबसे ज़्यादा दिक्कतें हुई और सबसे ज्यादा मृत्यु भी डायबिटीज से पहले से ही पीड़ित मरीजों की हुई है। कोरोना से लड़ने के लिए मधुमेह के रोगियों को हरा सेब खाना काफी फायदेमंद माना गया है। हरे सेब में लाल सेब की तुलना में कम शुगर और ज्यादा फाइबर पाए जाते हैं. इसलिए डायबिटीज यानी कि मधुमेह के रोगियों के लिए यह सरलता से पर्याप्त ऊर्जा देने वाला उपयोगी फल माना जाता है।


 कोरोना के मरीजों को प्रायः पेट खराब होने की भी शिकायत रहती है। कोरोना की शक्ति शाली एंटीबायोटिक्स दवाइयों के सेवन से भी कराया पाचन तंत्र प्रभावित होता है। हरे सेब में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है इसलिए यह मरीजों का पेट और पाचनतंत्र ठीक रखता है, तथा कब्ज नहीं होने देता । 


कोरोना में रक्त में थक की जमने की समस्या यानी कि ब्लड क्लॉट की समस्या में भी हरा सेब है मददगार :- 

 कोरोना से मनुष्य की लड़ाई के दरमियान अवलोकन में यह पाया गया कि बहुसंख्यक कोरोना के मरीज इलाज के दरमियान अथवा कोरोना से पूरी तरह ठीक होने के बाद भी खून में थक्का जमने के कारण हृदयाघात (हार्ट अटैक), मस्तिष्कघात (ब्रेन हेमरेज) से मृत्यु को प्राप्त हुए हैं।

हरे सेब में पाए जाने वाला विटामिन k 'के' शरीर में खून के थक्के बनने से रोकता है।वैज्ञानिकों के अनुसार नियमित रूप से हरे सेब का सेवन करने से खून समुचित रूप से पतला तथा विकाररहित होने लगता है, और इससे कोरोना से होने वाले हृदयाघात का खतरा काफी कम हो सकता है, साथ ही मस्तिष्क में थक्का जमने के कारण होने वाला पैरालिसिस अर्थात पक्षाघात की संभावना भी काफी कम हो जाती है। 


एंटी-एजिंग यानी कि बुढ़ापे की रोकथाम का जबरदस्त गुण : कहावत है कि "बुढ़ापा सबसे बड़ा रोग है"। उम्र बढ़ने के साथ ही साथ हमारी त्वचा में नई कोशिकाओं के बनने की दर घटने लगती है, इससे त्वचा कांतिहीन हो जाती है तथा चेहरे और शरीर में कई जगह झुर्रियां बन जाती हैं, शरीर का क्षरण तो झुर्रियों में दिखता है पर हृदय किडनी फेफड़े लीवर आदि में हुई कोशिकाओं का क्षरण हमें दिखता नहीं है, पर यह इन्हें कमजोर तो बनाता ही है। यही बुढ़ापे के मुख्य लक्षण भी हैं। कोरोना अथवा अन्य गंभीर बीमारियों से ठीक होने के बाद भी शरीर की अवस्था कमोबेश यही होती है, शक्तिशाली एंटीबायोटिक तथा अन्य दवाइयों के उपयोग के भी कई दुष्परिणाम शरीर पर दिखाई देते हैं। इसलिए बीमारी के पहले भी और बीमारी से उठने के बाद भी हरा सेब सेब तथा अन्य उपयोगी खाद्य पदार्थ नियमित रूप से खाना चाहिए। हरे सेब में एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होता है. इसके नियमित सेवन से त्वचा में चमक आ जाती है, धीरे-धीरे झुर्रियां भी कम हो जाती है, और आप जवान दिखने लगते हैं।


कोरोना बीमारी के इलाज के बाद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है, जिसके कारण कई मरीजों में बेहद खतरनाक "ब्लैक फंगस" की बीमारी भी हो रही है। इससे बचाव में भी हरे सेब का नियमित सेवन काफी मदद कर सकता है।

हरा सेब आंखों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। हरे सेब में उपयोगी विटामिन्स " ई " और फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है,जो आंखों के लिए फायदेमंद होती है. इसके नियमित सेवन से आंखों की रोशनी बढ़ती है और मानसिक तनाव/मेंटल स्ट्रेस भी कम होता है.


हड्डियों के लिए भी फायदेमंद: 

 हमारी रोग प्रतिरोधक तंत्र का एक मजबूत प्रहरी "कैल्शियम" भी है, इसलिए कोरोना के मरीजों को कैल्शियम भी दिया जाता है। हरे सेब में हड्डियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी विटामिन ए, कैल्शियम, प्रोटीन, मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटेशियम सहित अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं , हड्डियों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले कुछ अन्य खनिज जैसे कॉपर, आयरन, जिंक, विटामिन-ए और विटामिन-के भी पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता वृद्धि करने में सहायक होने के साथ ही साथ हड्डियों के बोन मास बढ़ाने व हड्डियों को मजबूत रखने में भी सहायक माने जाते हैं । इसके नियमित सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं और गंभीर बीमारी से उठने के बाद तथा बुढ़ापे में होने वाली 'ऑस्टियोपोरोसिस' जैसी बीमारी का खतरा भी कम हो जाता है.

हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरूरी है हमारे लिवर का स्वस्थ होना, और लिवर के अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी हरा सेब है जरूरी:

हरे सेब में कई प्रकार के फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं और इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है, ''क्वेरसेटिन" (Quercetin) । यह एक प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो लिवर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने और स्वस्थ रखने में लाभदायक हो सकता है।

कैंसर:-

सेब के छिलकों में पाए जाने वाले खास एंटीऑक्सीडेंट गुण लिवर को कैंसर के खतरे से बचाने में भी सहायक हो सकते हैं ।

यौन शक्ति ह्रास: कोरोना से उबरे व्यक्तियों में प्रायः यौनशक्ति राशि की शिकायत आ रही है। पहले से ही डायबिटीज से पीड़ित रहे व्यक्तियों के लिए तो यह एक बड़ी समस्या ही बन जाती है। इसके लिए आप हरा सेब के नियमित सेवन के साथ ही, विशेष रूप से जैविक पद्धति से उगाई गई शुद्ध सफेद मूसली ( विशेष रूप से 'क्लोरोफाइटम बोरीविलिएनम' प्रजाति ) का 2 ग्राम पाउडर प्रति दिन, गुनगुने दूध के साथ नाश्ते में अथवा सोने के पूर्व अथवा अपनी सुविधानुसार कभी भी ले सकते हैं। इसके लगातार सेवन से जल्द ही आप न केवल अपनी खोई हुई ताकत हासिल कर लेंगे, बल्कि जोड़ों में दर्द संपूर्ण शरीर में दर्द लगातार कमजोरी का एहसास जैसी अन्य शारीरिक समस्याओं से उबरने में भी आपको आसानी रहेगी। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे संपूरक खाद्य पदार्थ की तरह आराम से रोजाना ले सकते हैं।इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। अगर अन्य कोई दवाइयां चल भी रही हैं तब भी इसे लिया जा सकता है।

तो यह रही कुछ खास बातें हरे सेब के बारे में। प्रतिदिन कम से कम एक से दो स्वस्थ हरा सेब अच्छे से धो कर साफ़ कर सेवन करें, और इसके फायदे उठाएं। यहां महत्व अंत में एक बार हम फिर साफ कर देना चाहेंगे की कोरोना हो अथवा अन्य कोई बीमारी, हरा सेब तथा अन्य सभी पोषक आहार किसी भी रोग की दवाई बिल्कुल ही नहीं हैं, यह केवल उस रोग से लड़ने में आपकी सहायता करते हैं। किसी भी रोग से ग्रस्त होने की दशा में आप उस रोग के विशेषज्ञ चिकित्सक से अवश्य सलाह लें, तथा चिकित्सक की सलाह का सर्वोपरि कड़ाई से पालन भी करें।

और हमारे बुजुर्गों की सलाहियत, यह 24 कैरेट वाली शुद्ध सही कहावत को सदैव ध्यान में रखें कि, "पहला सुख निरोगी काया" ही है।


बाक्स : हरा सेब का सेवन कैसे करें:

1- रोज सुबह नाश्ते में एक या दो हरे सेब को अच्छे से धोकर छिलके समेत सेवन किया जा सकता है।

2-चाहे तो हरा सेब का जूस निकालकर भी पी सकते हैं, पर फल को छिलका समेत खाना ज्यादा लाभदायक होता है।

3-दलिया, सेवईं, ओटमील और कार्न फ्लैक्स में ड्राई फ्रूट्स के साथ हरे सेब के छोटे छोटे टुकड़े मिलाकर भी खा सकते हैं।

दूध में पपीता, संतरा और हरा सेब मिलाकर स्मूदी बनाकर भी खा सकते हैं।

4-अन्य मौसमी फलों के साथ हरा सेब और ड्राई फ्रूट्स मिलाकर फ्रूट सलाद बना कर भी खा सकते है।


(डॉ राजाराम त्रिपाठी, सदस्यराष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड,आयुष मंत्रालय भारत सरकार)