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थियेटर : दो नाटकों के मंचन से गुलजार हुआ जनमंच, छत्तीसगढ़ फिल्म एण्ड विजुअल आर्ट सोसायटी ने की वीक एण्ड थिएटर की शुरूआत, आज खेले जाएंगे दो नाटक

थियेटर : दो नाटकों के मंचन से गुलजार हुआ जनमंच, छत्तीसगढ़ फिल्म एण्ड विजुअल आर्ट सोसायटी ने की वीक एण्ड थिएटर की शुरूआत, आज खेले जाएंगे दो नाटक

जनधारा समाचार
रायपुर. कोरोना काल के लम्बे समय से निकलते हुए छत्तीसगढ़ फिल्म एण्ड विजुअल आर्ट सोसायटी के सडडू स्थित जनमंच में आज से दो दिवसीय वीक एण्ड थिएटर की शुरूआत हुई. आज पहले दिन रंग मंडल जबलपुर के दो नाटकों की शानदार प्रस्तुति हुई.


कार्यक्रम की शुरूआत औपचारिक उदघाटन से हुई. इस अवसर पर छत्तीसगढ़ फिल्म एण्ड विजुअल आर्ट सोसायटी की निदेशिका श्रीमती रचना मिश्र तथा जनधारा मीडिया हाउस के प्रबंध संपादक, रंगकर्मी श्री सुभाष मिश्र ने प्रसन्नता जताई कि कोरोना की वजह से जनमंच बंद था लेकिन अब वीक एण्ड थिएटर की शुरूआत हो गई.

बड़के दा नाटक का मंचन

इसके बाद रंगमंच में पहली प्रस्तुति के तहत बड़के दा मंचित किया गया. प्रेम निषिद्ध की काव्य कथा पर आधारित एकल नाटक का निर्देशन और अभिनय विवेक पांडे ने किया है. इसकी कहानी सिर्फ एक व्यक्ति बड़के दा की ही कथा नहीं है। बाजारवाद, मॉल, मल्टीप्लेक्स, पैकेज ,सैलरी की दुनिया में गुम होती जा रही सहजता और सादगी की कथा है। ईमानदारी और इंसानियत की कथा है।  आज की दुनिया में जहां व्यावहारिक होने की परिभाषा है कि बेईमान हो जाओ, रिश्वत लेना और देना, दोनों आज की जरुरत बन गया है, ऐसे समय में अगर व्यक्ति अपने आदर्शों से समझौता ना करें तो उसे पागल कहा जाता है।

'वो दिन रंग बिरंगे ने बटोरी तालियां


दूसरा नाटक 'वो दिन रंग बिरंगे' की प्रस्तुति हुई जो अंतोन चेखव की मूल रचना पर आधारित है. विवेचना रंगमंडल के आशुतोष द्विवेदी 29 वर्षों से इस नाटक का मंचन भारत के अलग-अलग मंच में कर रहे हैं. इस नाटक में मुख्य किरदार आशुतोष द्विवेदी और संतोष राजपूत ने अभिनय किया. ये मूल रूप से बंगला कहानी है जिसे अनुवाद किया है अजितेश बंदोपाध्याय और हिंदी में अनुवाद किया है दिवेन्दी गांगुली ने। कहानी का निर्देशन आशुतोष द्विवेदी ने किया. एंतोंन चेखव ने 1886 में कलखाज़ कहानी लिखी. 1889 में इस पर नाटक बना स्वान सॉन्ग, स्वान सॉन्ग हंस के द्वारा मृत्यु के पहले गाया गया गीत है. किसी भी कलाकार के जीवन की अंतिम प्रस्तुति होती है, ये स्वानसांग कहलाती है। इस नाटक में 68 साल का बूढ़ा कलाकार बेहद शराब पीकर ग्रीन रूम में ही सो जाता है. आधी रात को उठने के बाद खाली हॉल में सुने स्टेज पर अपने बीते दिनों को याद करता है.   उसके साथ पुराना बूढ़ा कर्मचारी भी रहता है. इस पूरी बातों में कलाकार जीवन की त्रासदी, पब्लिक का कलाकारों से किया जाने वाला दोहरा व्यवहार, इन सबका दुख उसकी बातों में झलकता है. अपने कई हिट रह चुके किरदारों का अभिनय करता है और अंत में स्टेज से विदा लेता है।

नाटकों के साथ रंग संगीत की प्रस्तुति

आज कोरोना के बावजूद बड़ी संख्या में रंगकर्मी अरूण काठोटे सहित शहर के नाटक देखने वाले दर्शक उपस्थित थे. नाटक के प्रारम्भ में जनमंच की और से छत्तीसगढ़ फिल्म एंड विजुअल आर्ट सोसाइटी के अध्यक्ष सुभाष मिश्र ने आने वाले समय में होने वाले नाटकों की जानकारी दी और नाट्य गतिविधियों के बारे में बताया. एक नाटक से दूसरे नाटक के अंतराल के बीच में डॉ. सुयोग पाठक के संगीत निर्देशन में रंग संगीत की प्रस्तुति की गयी जिसमें उदय प्रकाश की कविता तानाबाना भगवत रावत की न जाने कब से मिलना विनोद शुक्ल की कुछ कुछ याद करते जीवन और एकांत श्रीवास्तव का बीज में पेड़ का गायन मंचित किया गया.

आज भी दो नाटक पेश होंगे

सडडू स्थित जनमंच में कल रविवार को दो नाटकों का मंचन होगा. इनमें नाकाजिमा अतशुसी लिखित पहला नाटक महाविज्ञ और दूसरा नाटक मखमल की म्यान जोकि हरिशंकर परसाई लिखित है, कल शाम को 6.30 बजे प्रस्तुत होगा. जनमंच का पता सेक्टर8, एचआईजी27, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, सडडू, अंबुजा मॉल के पीछे, रायपुर है. किसी भी जानकारी के लिए 8817438531 पर संपर्क कर सकते हैं.