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कोरोना बताकर चिकित्सक ने वसूले 63 हजार, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाया गलत ईलाज का आरोप

कोरोना बताकर चिकित्सक ने वसूले 63 हजार, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाया गलत ईलाज का आरोप


मामला-श्री सिद्धी विनायक हॉस्पिटल मगरलोड का

संजय जैन

धमतरी, 7 जून। चिकित्सा जैसे पुनीत पेशे से जुड़े कुछ लोगों द्वारा मरीजों के साथ बिमारी का डर बताकर किस प्रकार स्वार्थपूर्ति की जा रही है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण सिद्धी विनायक हॉस्पिटल मगरलोड से दिया जा सकता है जिसे पूर्व में लायसेंस नवीनीकरण कार्य नहीं कराये जाने को लेकर यह अस्पताल कुछ दिनों तक बंद भी कराया गया था। यह मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक बार फिर से इस अस्पताल का वीडियो कुछ लोगों द्वारा वायरल किया गया है जिसमें बताया गया है कि फूलसिंह निषाद ग्राम भोथा के व्यक्ति को कोरोना कोविड का इंफेक्शन बताकर 23 अप्रेल से 27 अप्रेल तक ईलाज किया गया। जब सुधार नहीं हुआ तो उसे दूसरे अस्पताल में रिफर कर अस्पताल का भारी-भरकम 63 हजार रूपये का बिल थमा दिया गया जिसे लेकर उसके परिवारजनों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। 


मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि सिद्धी विनायक हॉस्पिटल मगरलोड में फूलसिंह निषाद नामक ग्राम भोथा के एक व्यक्ति जिसे सामान्य बुखार आ रहा था, उसे कोरोना बताकर उक्त तिथि तक ईलाज किया गया। पांच दिनों तक कोरोना का ईलाज कर रहा हुं कहकर चिकित्सक द्वारा बात बताई गई। परिवारजनों द्वारा चिकित्सक से कई बार आग्रह किया गया कि यदि आपसे ईलाज नहीं हो पाता है तो दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर दो पर चिकित्सक द्वारा यह कहा गया कि मैं ईलाज सहीं कर रहा हुं और मरीज को उक्त चिकित्सक द्वारा 18 से 20 इंजेक्शन लगाया जाता रहा है। गलत तरीके से ईलाज के कारण जब फूलसिंह निषाद को दूसरे अस्पताल रिफर किया गया तो रास्ते में ही उसका निधन हो गया। यदि यही बात उसके परिजनों को पहले बता दी जाती तो वे धमतरी या रायपुर में स्थित नामचीन अस्पतालों में उसका ईलाज कराते। फूलसिंह निषाद के पुत्र ने वीडियो वायरल करते हुए बताया कि कोरोना के ईलाज के नाम पर सामान्य बुखार का ईलाज किया गया जिसके कारण उसके पिता का स्वास्थ्य खराब हो गया। ईलाज की अवधि में परिवारजनों द्वारा ऑक्सीजन की व्यवस्था भी की गई थी। लेकिन वहां ईलाज सहीं नहीं हुआ और दूसरे अस्पताल रिफर करते तक रास्ते में ही फूलसिंह निषाद का निधन हो गया। 

चिकित्सालय के चिकित्सक द्वारा जब 63 हजार रूपये की मांग की गई तो उसके पुत्र ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि आपके गलत ईलाज के कारण ही मेरे पिता की मृत्यु हुई है। जब ईलाज के संबंध में उससे संबंधित दस्तावेज उसके पुत्र द्वारा मांगा गया तो 6.5.2021 को डॉक्टर ने फर्जी तरीके से दूसरी बिमारी का बिल बनाकर दिया है। इस संबंध में उसके पुत्र द्वारा जो वीडियो वायरल किया गया है, उसमें चिकित्सक का कथन है कि मैने सहीं ईलाज किया है और इसीलिये मैं आपको 63 हजार रूपये का बिल बनाकर दे रहा हुं। कोई चिकित्सक ऐसा बिल बनाकर नहीं देता है। लेकिन मैं आपको यह सुविधा उपलब्ध करा रहा हुं ताकि भविष्य में आपको इसका लाभ मिल सके। इस प्रकार चिकनी-चुपड़ी बातें कर फूलसिंह निषाद के परिजनों को चिकित्सक ने दिग्भ्रमित किया है। पूर्व में भी इस अस्पताल के चिकित्सक द्वारा नवीनीकरण नहीं कराये जाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग धमतरी ने उसे सील कर दिया था। इस प्रकार मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले इस चिकित्सक के विरूद्ध निषाद परिवार में बेहद आक्रोश व्याप्त है। इनका कहना है कि कोरोना का भय दिखाकर भारी-भरकम राशि ली गई है जबकि बिल में कोरोना कोविड का कोई उल्लेख नहीं है। 

कोरोना कोविड-19 को लेकर जिला प्रशासन द्वारा नीम-हकीमों के साथ साथ ऐसे चिकित्सक जो ग्रामीण क्षेत्र में आमजनों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले हैं, उन पर नकेल कसने के लिये कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य ने खोज खबर शुरू करने एवं इन पर कार्यवाही करने का निर्देश दिया है जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग द्वारा नीम-हकीमों के विरूद्ध सघन अभियान चलाया जा रहा है और ऐसे लोगों पर कार्यवाही करने में कोताही नहीं बरतने की बात कही गई है। जबकि कुछ ऐसे भी चिकित्सक हैं जो कोरोना को आधार बनाकर मरीजों के परिजनों से भारी-भरकम बिल वसूल रहे हैं जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण सिद्धी विनायक हॉस्पिटल मगरलोड जो कि धमतरी जिले के अंतर्गत आता है, उसके द्वारा भी उक्त परिवार के साथ कोरोना का नाम लेकर भारी-भरकम राशि वसूल की गई है जिसकी जांच की मांग उसके परिजनों द्वारा की जा रही है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ डी के तुर्रे से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि हमें अभी शिकायत नहीं मिली है। जैसे ही शिकायत प्राप्त होगी, उसकी जांच पश्चात शिकायत सहीं पाई जाती है तो अवश्य कार्यवाही होगी। इस प्रतिनिधि ने जब सिद्धी विनायक हॉस्पिटल मगरलोड के चिकित्सक से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि मेरे मैनेजर से बात कर लें, इसलिये उनका पक्ष नहीं रखा जा सका।