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वन भूमि के गैर वानिकी उपयोग मामले की केंद्र ने शुरू की जांच

वन भूमि के गैर वानिकी उपयोग मामले की केंद्र ने शुरू की जांच

 भोपाल ।  केंद्र सरकार ने मप्र में सामुदायिक संसाधनों पर वनाधिकारों को मान्यता और वानिकी की भूमि को गैर वानिकी में उपयोग किए जाने के मामले की जांच शुरू कर दी है। केंद्रीय वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह जानकारी कांग्रेस विधायक व जयस के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. हिरालाल अलावा को एक पत्र लिखकर दी है। डॉ. अलावा ने पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर को सामुदायिक संसाधनों पर वनाधिकारों को मान्यता देने की मामले की जांच क लिए पत्र लिखा था।

उनका कहना था कि वन संरक्षा कानून 1980 लागू किए जाने के बाद भारत सरकार का पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय बार-बार दोहरा रहा है। मप्र से 1980 से मप्र के वन मंडलों की कार्य आयोजना का अनुमोदन कर अंतिम स्वीकृति प्रदान कर रहा है। वन विभाग एवं वन अधिकारियों द्वारा वन भूमियों के गैर वानिकी उपयोग की अनुमति कर रहा है। डॉ. अलावा ने बताया कि मप्र में अनुमोदित एवं स्वीकृति वर्किंग प्लान में भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा चार में अधिसूचित धारा पांच से 19 तक की जांच के लिए लंबित आरक्षित वन बनाए जाने के लिए प्रस्तावित भूमियों को संरक्षित मानकर उसक नियंत्रण, प्रबंधन एंव विदोहन की योजना को स्वीकृति दी जा रही है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कांग्रेस विधायक डॉ. अलावा को पत्र का जवाब देते हुए कहा कि वे मप्र ऐसे मामलों की जांच कर रहे हैं।