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ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर बढ़ती महंगाई का काला छाया से उद्योग का नहीं मिल रहा दर्जा

 ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर बढ़ती महंगाई का काला छाया से उद्योग का नहीं मिल रहा दर्जा

चाकघाट । ट्रक ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर बढ़ती महंगाई ने अपनी काली छाया फैला रखी है। निरंतर घाटे में चल रहे इस व्यवसाय ने व्यापारियों को कर्ज में डुबो दिया है। पग-पग पर लगने वाले टैक्स ने व्यापारियों की कमर तोड़कर रख दी है। विडम्बना है कि इस व्यापार को जीवित रखने वाले लोग जीवन से मोह छोडऩे का मन बना रहे हैं। जबकि सरकार ध्यान नहीं दे रही है। दो वर्षों में टायर, मोटर पाटर््स एवं अन्य खर्चों में बढ़ोतरी हुई है। जगह-जगह पर नए-नए टोल टैक्स एवं पुल टैक्स की बाढ़ आ गई है। गांव-गांव में चन्दा, पार्किंग, तहबाजारी एवं अवैध वसूली का जोर बढ़ा है।

किन्तु माल भाड़ा का दर अनुपात में ज्यों का त्यों ही बना हुआ है। फाइनेंस कंपनियों के द्वारा जिस ढंग से बिना किसी पूर्व सूचना के गाड़ी को जबदस्ती बीच रास्ते से उठाया जा रहा है उससे ट्रक द्वारा माल भाड़े का काम करने वाले व्यवसायी सकते में हैं। गत दो वर्षों में ट्रक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी निरंतर घाटे में चल रहे है। यही गति रही तो कर्ज में डूब रहे इन व्यवसायियों के पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

ट्रक मालिकों ने यह माना कि कोई भी मोटर मालिक ओवरलोड गाड़ी नहीं चलवाना चाहता है किन्तु बढ़ती महंगाई एवं फाइनेंस कम्पनियों के दबाव में उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है जिसके लिए वे मान-अपमान सहते हैं एवं भारी भरकम आर्थिक क्षति भी उठाते हैं। ट्रक ट्रांसपोर्ट जिसमें अकुशल श्रमिक वर्ग की ज्यादातर जीविका चलती है।

ऐसे व्यवसाय को कभी उद्योग का दर्जा नहीं दिया गया। ट्रक व्यवसायी को बैंक से ऋण की सुविधा नहीं मिलती। शासन बीमार उद्योग को ऋण एवं अनुदान तो देती है किन्तु ट्रक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी उद्योग का दर्जा न मिल पाने के कारण इस सुविधा से वंचित रह जाते हैं। शासन ट्रक ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को न तो उद्योग मा नरही है और न ही सामाजिक कार्य।

लगता है शासन प्रशासन की निगाह में ट्रक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी सिर्फ अपराधी हैं। जिन्हें हर स्तर पर प्रताडि़त एवं अपमानित करने का उपक्रम चलाया जा रहा है। इन सबके बावजूद भी ट्रक व्यवसायी सदैव प्रशसन की निगाह में अपराधी ही दिखता है। वाहन दुर्घटना के समय गाड़ी में लदा सामान लूट लिया जाता है।

टायर चोरी चला जाता है जिसकी रिपोर्ट तक नहीं लिखी जाती कार्रवाई एवं सुरक्षा तो दूर की बात है हर सतर पर ट्रांसपोर्ट व्यवसाइयों के हो रहे उत्पीडऩ पर पूर्ववर्ती सरकारों ने ध्यान नहीं दिया था।