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सौर उर्जा चलित पम्प से कृषको की बदली तकदीर, कृषक ले रहे दोहरी फसल

सौर उर्जा चलित पम्प से  कृषको की बदली तकदीर, कृषक ले रहे दोहरी फसल

सुकमा --जिले के कृषक अब आधुनिक तकनिकों के उपयोग कर कृषि कार्य से अपने जीवन में बदलाव ला रहें हैं। शासन-प्रशासन की मदद से अंदरुनी क्षेत्रों में बसे कृषकों को अब विषम भौगोलिक स्थिति में भी कृषि कार्यों के प्रति प्रोत्साहन मिला है।

वे शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेते हुए उन्नत खेती कर एक बेहतर जीवनशैली की ओर आगे बढ़ रहें हैं। किसी भी फसल की अच्छी पैदावार के लिए उचित देखरेख के साथ आवश्यकतानुसार पानी जरुरी है, अंदरुनी क्षेत्र के गांवों में मूलतः विद्युत आपूर्ति की सुचारु व्यवस्था के अभाव में कृषकों को खेत तक पानी पहुँचाने की समस्या का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में फसलों को पानी देने के लिए कृषक बरसात पर निर्भर रहते हैं, या नदी-नाले, कुएं आदि से पानी लेकर खेतों तक पहुँचाते हैं, जिसमें उन्हें अनेकों प्रकार की परेशानियों को पार करना पड़ता है। क्रेडा विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से कृषकों को इस समस्या का समाधान मिल रहा है।

विद्युतविहीन खेतों में सोलर पम्प स्थापना से प्रदूषण रहित, निशुल्क बाधारहित सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है, सुकमा क्षेत्र के किसानों की दशा और दिशा बदलने में अब सौर सुजला योजना काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इस क्रम में विकासंखड कोन्टा के गोलापल्ली निवासी  सुन्नम भीमा ने भी अपने गांव में  प्रगतिशील कृषक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। वे बताते हैं कि पूर्व में उन्हें सिंचाई के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी, पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने से फसल का नुकसान भी झेलना पड़ता था।

उन्हे लगभग 500 मीटर दूर से अस्थाई बिजली कनेक्शन के माध्यम से सिंचाई हेतु जुगाड़ करना पड़ता था, तब कहीं जाकर वे अपनी फसलों के लिए सिंचाई की व्यवस्था कर पाते थे। इसके पश्चात् डीजल चलित पम्प की मदद से सिंचाई की, जिसमें खर्च अधिक था।

उनके ग्राम में अन्य कृषकों द्वारा सेालर पम्प स्थापित कर सिंचाई कार्य से प्रेरित होकर भीमा ने भी विभाग में सोलर पम्प लगाने हेतु आवेदन किया। सौर सुजला योजना फेस 4 के अन्तर्गत वर्ष 2019-20 में भीमा को सौर उर्जा चलित पम्प प्रदाय किया गया।