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आदिवासियों ने साल के पत्तों का ही मास्क बनाकर उपयोग करना शुरू किया

  आदिवासियों ने साल के पत्तों का ही मास्क बनाकर उपयोग करना शुरू किया
कांकेर , 26 मार्च। कोरोना वायरस से बचने के लिये आपको किसी ने तीन परतों वाला मास्क पहनने की सलाह दी होगी तो किसी ने N95 मास्क का भी ज़िक्र किया होगा. लेकिन कोरोना वायरस के ख़तरे के बारे में जानने के बाद बस्तर के कुछ इलाकों में आदिवासियों ने साल के पत्तों का ही मास्क बनाकर उसका उपयोग करना शुरू कर दिया है.

असल में कांकेर ज़िले के अंतागढ़ के कुछ गांवों में जब एक बैठक बुलाई गई तो आदिवासी वहां पत्तों से बनाई गई मास्क पहनकर पहुंच गये.



भर्रीटोला गांव के एक नौजवान ने बताया, "कोरोना के बारे में गांव के लोगों ने सुना तो दहशत में आ गये. हमारे पास कोई और उपाय नहीं था. गांव वालों के पास तो मास्क है नहीं. इसलिये हमारे गांव के लोग अगर घरों से बाहर निकल रहे हैं तो वे सरई के पत्तों वाले मास्क का उपयोग कर रहे हैं."

गांव के पटेल मेघनाथ हिडको का कहना था कि हमें कोरोना वायरस की जानकारी मिली तो लगा कि ख़ुद ही उपाय करना पड़ेगा क्योंकि गांव से आसपास के सारे इलाक़े बहुत दूर हैं.

इसके अलावा इस माओवाद प्रभावित इलाके में आना-जाना भी बहुत आसान नहीं है.