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भाजपा ने इतिहास रचते हुए सपा के ताबूत में ठोंक दी आख़िरी कील

भाजपा ने इतिहास रचते हुए सपा के ताबूत में ठोंक दी आख़िरी कील

पंचायत चुनाव का बिगुल बजते ही सत्ताधारी दल में दिखने लगी थी बेचैनी
कन्नौज।  समाजवादी पार्टी (सपा) के गढ़ माने जाने वाली इत्र नगरी कन्नौज में दशकों बाद जिला पंचायत की कुर्सी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कब्जा हो गया।
भाजपा की प्रिया शाक्य ने सपा के श्याम सिंह यादव को हरा कर इतिहास रचते हुए कभी समाजवादी गढ़ कहे जाने वाले कन्नौज में सपा के ताबूत में आख़िरी कील ठोंक दी। जिला पंचायत चुनाव का बिगुल बजते ही सत्ताधारी दल में बेचैनी दिखने लगी थी। ग्रामीण इलाक़ों में कमजोर संगठन व टिकट न मिलने से नाराज़ नेताओं का विरोधी सुर मुख्य विपक्षी दल सपा को मज़बूत कर रहा था। जिला पंचायत चुनाव के परिणाम भी सत्ताधारी दल के पक्ष में नहीं आए, अधिकृत तौर पर 28 सदस्यीय जिला पंचायत में भाजपा के 7 प्रत्याशी ही चुनाव जीत सके। जिसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर सपा की उम्मीद बढ़ गयी थीं।
कन्नौज जिला पंचायत चुनाव में जहां भाजपा की कमान वर्तमान सांसद सुब्रत पाठक ने सम्भाली थी वहीं सपा की बागडोर स्वयं सपा मुखिया अखिलेश यादव सम्भाले थे। लोकसभा चुनाव में मिली हार का हिसाब बराबर करने के लिए सपा मुखिया लगातार चुनाव पर नज़र बनाए हुए थे। सूत्रों की मानें तो सपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य पिछले कई दिनों से लखनऊ में डेरा डाले थे, और शनिवार को सपा के प्रदेश अध्यक्ष कन्नौज में सदस्यों को वोट डालने के लिए लेकर पहुँचे थे।
वहीं दूसरी भाजपा का नेतृत्व स्वयं सांसद सुब्रत पाठक कर रहे थे। सांसद कुशल प्रबंधन के ज़रिए इस चुनाव को जीतकर प्रथम नागरिक की कुर्सी पर भाजपा को स्थापित करना चाहते थे। और वह अपने इस प्रयास में सफल भी हुए।
कन्नौज ज़िला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा को विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी जीत मिली है। 28 सदस्यीय जिला पंचायत में 15 मत पाकर भाजपा प्रत्याशी को बढ़ी जीत मिली है। हालाँकि भाजपा को मिली इस जीत में सपा की आपसी फूट की महती भूमिका है। चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रिया शाक्य को मिली जीत से समर्थकों में ख़ुशी की लहर है और जश्न का माहौल है।