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अवैध कोयला की खुदाई, वनों की कटाई केतका का जंगल सुर्ख़ियों में, अंकुश लगाने वाले जिम्मेदार अधिकारी मौन

अवैध कोयला की खुदाई, वनों की कटाई केतका का जंगल सुर्ख़ियों में, अंकुश लगाने वाले जिम्मेदार अधिकारी मौन

सूरजपुर।  ठंड का मौसम  की शुरुआत हो चुकी है। बंगला व चिमनी भठ्ठा द्वारा ईंट बनाने का कार्य किया जा रहा है। जिसमे बड़ी मात्रा में अवैध कोयला खपाया जाता है। जिन पर मांइनिग विभाग, वन विभाग, पुलिस विभाग द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नही की जाती है। 

इसी कड़ी में सुरजपुर जिले के केतका व राजापुर का जंगल अवैध कार्यों के लिए इन दिनों सुर्खियों में है। केतका लकड़ी कटाई के मामले में तो राजापुर जंगल से कोयला की चोरी आम बात हो गई है।राजापुर के जंगल में कोयला चोरी की शिकायत भी हो चुकी है। केतका परीक्षेत्र में जंगलों की अवैध लड़की की कटाई अनवरत जारी है और इसे रोक पाने में वन अमला पूरी तरह नाकामयाब साबित हो रहा है। स्थानीय ग्रामीण बताते है कि ऐसे अवैध धंधे को वन विभाग की खुली छूट मिली है। जिसके एवज में उन्हें भी आर्थिक सहयोग तस्करों द्वारा की जाती रहती है। दूसरी ओर राजापुर के जंगल में कोयला का काला कारोबार जोर-शोर से जारी है इस क्षेत्र में पथरी-सूजीडांड, नावापारा ऐसे जंगल हैं जहां कोयले का भंडार है। जिस पर कोयला तस्करों की पैनी नजर बनी हुई है, जो आस-पास के गांव के लोगों से संपर्क कर कोयले का अवैध उत्खनन करवाते हैं और उसे बाहर व स्थानीय होटलों, ईट भट्ठा में खपा दिया जाता है। बताया जाता है कि कोयले के अवैध उत्खनन के कार्य में परशुरामपुर, राजापुर, सेंदूरी गांव के ग्रामीण शामिल हैं जो रोजाना उत्खनन कर कोयला इकट्ठा करते हैं और पिकअप के माध्यम से बाहर भेज दिया जाता है। 

ग्रामीण मोटरसाइकिल व साइकिल से भी होटल व आसपास के दुकानों में छुपते छुपाते कोयला बेच रहे हैं। कोयले के इस अवैध उत्खनन में वन विकास निगम के अधिकारी कर्मचारियों की भी मिली भगत सामने झलक रही है। जो सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई करने से पीछे भागते हैं। सूत्र बताते हैं कि वन विकास निगम के कर्मचारियों का ग्रामीणों से सांठगांठ है और प्रति टन कोयला के हिसाब से उनका भी हिस्सा बना हुआ है जो हर सप्ताह पहुंचाया जाता है। सालही अमगांव खदान से भी सेटिंग में कोयला का अवैध कारोबार धड़ल्ले से किया जा रहा है। जिसकी भी शिकायत एसईसीएल के अधिकारियों से की गई है मगर उनके भी कान में जूं तक नहीं रेंग रहा है। राजापुर के जंगल में नाबालिक बच्चों से भी काम लिया जा रहा है जबकि ऐसे अवैध खदान से घटना दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। मगर पैसों की लालच में लोग जान जोखिम में डाल रहे हैं और इस पर अंकुश लगाने वाले जिम्मेदार अधिकारी मौन सहमति दी ही है। ऐसे में अवैध उत्खनन का कार्य रूक पाना संभव नहीं दिखता है। इधर वन विकास निगम को इस क्षेत्र के बिगड़े वनों को सुधारने की जिम्मेदारी दी गई है जिससे जंगलों में हरियाली बरकरार रहे मगर ऐसा दिखता नहीं है वह इसी की आड़ में अपना मकसद साधने में कामयाब है।