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मलेरिया उन्मूलन के लिए छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के 38 गांवों में हुआ सर्वे

मलेरिया उन्मूलन के लिए छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के 38 गांवों में हुआ सर्वे


 खैरागढ़ के 17, छुईखदान के 7 तथा लांजी विकासखंड के 3 और बिरसा के 11 ग्रामों में बड़ी संख्या में हुई लोगों की जांच, संवेदनशील गांवों में मच्छरदानी का वितरण, फुल बाजू के कपड़े पहनने की अपील
राजनांदगांव। मलेरिया से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती गांवों में साझा अभियान चलाया जा रहा है। दोनों प्रदेश के सीमावर्ती गांवों में मच्छर रोधी दवा का छिड़काव किया जा रहा है। जन-जागरुकता के लिए गांव-गांव में रैली निकाली जा रही है तथा मच्छरदानी का वितरण भी किया जा रहा है। इसी क्रम में राजनांदगांव जिला प्रशासन के निर्देश पर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों की टीम ने एक ही दिन में दोनों तरफ के 38 गांवों में जाकर घर-घर सर्वे किया तथा लोगों में मलेरिया की जांच की।
राजनांदगांव कलेक्टर तारण प्रकाश सिन्हा के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, राजनांदगांव डॉ. मिथलेश चौधरी तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बालाघाट (मध्यप्रदेश) डॉ. मनोज पांडेय के संयुक्त मार्गदर्शन में मलेरिया उन्मूलन हेतु छत्तीसगढ़ के विकासखंड खैरागढ़ और छुईखदान के अंतर्गत मध्यप्रदेश बार्डर क्षेत्र में ग्राम स्तर पर मास स्क्रीनिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मास स्क्रीनिंग के अंतर्गत सर्वे दल के द्वारा विकासखंड खैरागढ़ के 17, छुईखदान के 7 तथा मध्यप्रदेश सीमा क्षेत्र के लांजी विकासखंड के 3 और बिरसा के 11 ग्रामों में मलेरिया मास स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान जनसमुदाय के शत-प्रतिशत लोगों के खून की जांच की गई। रिपोर्ट में मलेरिया के सकरात्मक प्रकरण पाए जाने पर संबंधित मलेरिया पीड़ित को संपूर्ण उपचार सेवा प्रदान की जाएगी। मलेरिया पर नियंत्रण तथा लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जागरूकता रैली व नाटक का आयोजन किया जा रहा है। जिले भर के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जन-जागरुकता संबंधी बैनर-पोस्टर व होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इस संबंध में मलेरिया कार्यक्रम की जिला सलाहकार संगीता पांडेय ने बताया, मलेरिया, डेंगू व डायरिया पर नियंत्रण के लिए जिला स्तर पर 371 सर्वे दल का गठन किया गया है जिनके द्वारा गृह भेंटकर बड़ी संख्या में लोगों की जांच की जा रही है। वहीं शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में सोर्स रिडक्शन एक्टीविटी संपादित की जा रही है। संवेदनशील वार्डों एवं अन्य समस्त शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में टेमीफास का छिड़काव किया जा रहा है। मलेरिया रोधी कार्यक्रम में मितानिन को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। विभिन्न स्थानों पर वह गृह भेंटकर विभिन्न प्रचार माध्यमों से लोगों को मलेरिया व डेंगू की रोकथाम तथा इससे बचाव के तरीके बता रही हैं।
साझा अभियान के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया, कलेक्टर तारण प्रकाश सिन्हा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा समन्वय के साथ मलेरियारोधी अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा दोनों तरफ के 38 गांवों में जाकर घर-घर सर्वे किया गया तथा लोगों में मलेरिया की जांच की गई। उन्होंने बताया, मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए जनसमुदाय को मच्छरदानी का उपयोग करने व फुल बाजू के कपड़े पहनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही घर में रखे गमले की ट्रे, कूलर, फ्रिज तथा पानी की टंकी को खाली कर सुखाने के बाद उपयोग करने तथा पुराने टायर, मटके, कबाड़ आदि में बरसात का पानी एकत्र न होने देने के बारे में जानकारी दी जा रही है ताकि मच्छर के अंडेए लार्वा को नष्ट किया जा सके।