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भानुप्रतापपुर पत्रकार संघ चुनाव बैस को हराकर अजय बने अध्यक्ष, संजय बने सचिव

भानुप्रतापपुर पत्रकार संघ चुनाव बैस को हराकर अजय बने अध्यक्ष, संजय बने सचिव


भानुप्रतापपुर। रविवार को भानुप्रतापपुर पत्रकार संघ की चुनाव हुए जिसमें अजय साहू अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित हुए वहीं संजय सोनी सचिव बने ।

भानुप्रतापपुर पत्रकार संघ में कुल 22  पत्रकार मतदाता थे।  जिसमें 20 ने अपना मताधिकार का प्रयोग किया। एक सदस्य ने मत नहीं दिया। एक मतदाता की अखबार की एजेंसी बदल जाने से कुछ सदस्यों ने आपत्ति करने पर चुनाव अधिकारी ने सदस्यता शून्य कर दिया। जिससे वे मत नहीं डाल सके। जिसमें अध्यक्ष पद के लिए सबसे अधिक 11 मत अजय साहू को मिले वहीं इसके विरुद्ध रिपुदमन बैस को 9 मत प्राप्त हुए।  अजय साहू अध्यक्ष निर्वाचित हो गए । वह सचिव पद के लिए संजय सोनी और दूसरे पक्ष के कैलाश शर्मा को  दस दस मत प्राप्त हुए। इसे निर्वाचन अधिकारी ने निर्णय सुनाया और इसमें संजय सोनी को सचिव घोषित किया।

 चुनाव हारते देख दूसरे पक्ष ने चुनाव का बहिष्कार  का एलान

रिपुदमन बैस एवं उसके पैनल ने मतदान के बाद एवं मतगणना के पूर्व अपनी हार को देखते हुए चुनाव बहिष्कार की घोषणा करते हुए एक आवेदन प्रस्तुत किया और मतदान कक्ष से सभी सदस्य बाहर चले गए जिस पर निर्वाचन करा रहे राजकुमार दुबे, ने मतगणना कराई।

इस दौरान अंतागढ़ से आए 2 स्वतंत्र पत्रकार साथी भी पूरी कार्रवाई के दौरान मौजूद रहे। मतगणना में उपरोक्त अनुसार मत प्राप्त हुए सचिव पद के 2 प्रत्याशियों को बराबर 10- 10 मत प्राप्त हुए जिस पर राजकुमार दुबे ने कहा कि आधे घंटे में दूसरे पक्ष के प्रत्याशी भी यहां पहुंचे उनके सामने टॉस की कार्रवाई की जाएगी और नहीं आने पर उपस्थित पक्ष को विजयी घोषित किया जाएगा । कैलाश शर्मा दोपहर 1 बजे तक मतदान स्थल पर नहीं पहुंचे। ना ही उनका कोई प्रतिनिधि पहुंचा जिसके बाद संजय सोनी को राजकुमार दुबे के द्वारा सचिव पद पर विजयी घोषित कर दिया गया

 जिसमें चुनाव अधिकारी राजकुमार दुबे और फिरोज खान थे।  इस मौके पर सुमंत सिन्हा, दीपक शर्मा, राजू ठाकुर, कस्तूरचंद जैन, अखिलेश शुक्ला, राजेश रंगारी, मयंक सोनी, संतोष तिवारी आदि उपस्थित थे।

 चुनाव का अनोखा बहिष्कार



पत्रकार को समाज का चौथे स्तम्भ एवं सबसे जागरूक नागरिक कहा जाता है, लेकिन भानुप्रतापपुर के कुछ चुनिंदा पत्रकार भाइयों को शायद बहिष्कार का नियम ही नही मालूम है, यदि चुनाव का बहिष्कार किया जाना था तो कोई भी सदस्य को मत नही डाले जाने थे,लेकिन पूरे सदस्यों ने मत डालने के बाद हार का अंदाज़ा होने के बाद बहिष्कार किया जाना गलत एवं न्यायोचित नही है।