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खुलासा : 500 करोड़ की आरी-डोंगरी खदान का टेण्डर आफलाइन, लेकिन बोली आनलाइन लगेगी, अफसरों ने नही दिए टेण्डर, चहेतों को खदान बांटने नियम कानून की उड़ाई धज्जियां

खुलासा : 500 करोड़ की आरी-डोंगरी खदान का टेण्डर आफलाइन, लेकिन बोली आनलाइन लगेगी, अफसरों ने नही दिए टेण्डर, चहेतों को खदान बांटने नियम कानून की उड़ाई धज्जियां

जनधारा समाचार
रायपुर. खदान आबंटन के मामले में अब राज्य ‘बिहार और यूपी‘ बनता जा रहा है. सारे नियम-कानूनों को धता बताते हुए और बिना किसी को अवसर दिए बगैर, सरकार और प्रशासन का बेजा इस्तेमाल कर खदानें हथियानें का सिलसिला शुरू हो गया है. ताजा मामला 500 करोड़ के मूल्य वाली भानुप्रतापपुर विकासखण्ड की आरी-डोंगरी खदान का सामने आया है जहां खदान आबंटन के लिए पहले तो आनलाइन के बजाय आफलाइन निविदा जारी की गई और उसके बाद जब आवेदक टेण्डर लेने सरकारी कार्यालय पहुंचे तो उन्हें टेंडर देने से इंकार कर दिया गया. सरकारी अफसरों का कहना है कि उनके उपर सरकार के स्तर पर दबाव है.


आनलाइन के बजाय  आफलाइन टेण्डर
सारा मामला भानुप्रतापपुर विकासखण्ड में स्थित आरी-डोंगरी की आयरन ओर खदान आबंटन से जुड़ा है. खदान आबंटन के लिए केंद्र शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया अपनाए जाने के निर्देश तमाम राज्य सरकारों को दिए गए है. इसके तहत टेंडरों को ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत जारी किया जाता है लेकिन आरी-डोंगरी खदान मामले में ऑफलाइन प्रकिया अपनाई गई. खदान की नियमानुसार आवंटन प्रक्रिया अपनाने से राज्य सरकार को करोड़ों की आमदनी हो सकती है लेकिन भाई भतीजावाद और अपनों को उपकृत करने के लिए जिम्मेदार अफसरों ने कायदे कानूनों को ताक पर रख दिया है.

अफसरों ने टेण्डर ही नही लेने दिए

पूरे मामले में कांग्रेस के एक बड़े नेता की भूमिका देखी जा रही है जो सिर्फ अपने चहेते को ही टेंण्डर दिलाना चाहते हैं. सूत्रों ने बताया कि टेण्डर जारी होने के बाद जब वे इसे लेने के लिए सरकारी कार्यालय पहुंचे तो पहले गोलमोल जवाब दिया गया, फिर अधिकारियों के पास घुमाया जाता रहा और उसके बाद टेण्डर देने से साफ मना कर दिया गया. इसके लिए जब छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के चेयरमेन गिरीश देवांगन से संपर्क किया गया तो उनका मोबाइल लगातार कॉल फॉर्वडिंग बताता रहा. फिलहाल शिकायतकर्ता मांग कर रहे हंै कि आयरन ओर की इस खदान आवंटन प्रकिया को नियमानुसार ऑनलाइन किया जाए. उनकी दलील है कि खदान आवंटन मामले में भ्रष्टाचार की बू आ रही है लिहाजा इस दिशा में राज्य सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए.

टेण्डर लेने के इच्छुक एक अन्य आवेदक ने बताया कि अफसरों की कार्यशैली के बारे में जब अध्यक्ष को बताया गया तो उन्होंने चुप्पी साध ली. इससे साफ जाहिर है कि खदान चहेतों को आवंटित करने की साजिश की गई है और इसके पीछे भ्रष्टाचार की बू आ रही है. ऑफ लाइन टेंडर पर जोर देने वाले अफसर उन्हें ना तो टेंडर फॉर्म दे रहे हंै और ना ही किसी तरह का सहयोग कर रहे हैं.

सरकार को 500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
शिकायतकर्ता यह भी कह रहे है कि अफसरों ने उन्हें साफ कर दिया है कि वे टेंडर फॉर्म के लिए जोर आजमाईश ना करें. उन्हें कुछ खास लोगों को ही टेंडर फॉर्म उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया है. बताया जाता है कि वैधानिक प्रक्रिया नहीं अपनाने से इस खदान के आवंटन मामले में राज्य सरकार की तिजोरी को 500 करोड़ से ज्यादा का चूना लग सकता है.

आनलाइन नीलामी होगी : समीर विश्नोई, संचालक, खनिज

इस मामले में जब खनिज संचालक, आइएएस समीर विश्नोई से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमारे पास कोई लिखित शिकायत नही आई है. वैसे भी आबंटन प्रक्रिया आनलाइन फारवर्ड आक्शन के तहत होगी. एक निश्चित समय तय करके आॅनलाइन बोली लगाई जाएगी. जिसकी बोली सबसे ज्यादा होगी, उसे खदान आबंटित कर दी जाएगी. विश्नोई से पूछा गया कि टेण्डर आॅनलाइन के बजाय आॅफलाइन क्यों जारी किए गए तो वे नियमों का हवाला देने लगे. अफसरों ने किसी को टेण्डर ही नही दिया, ऐसे में लोग आवेदन कैसे करेंगे तब चहेते लोग ही बोली में शामिल हो सकेंगे.