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तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं

तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं


 डॉ. ममता व्यास

हम अपने रोजमर्रा के जीवन में कई लोगों से मिलते हैं , बात करते हैं उनके साथ काम करते हैं, लेकिन उनमें से कितने लोग मानसिक परेशानियों से जूझ रहे होते हैं हम नहीं जान पाते। जरुरत है मन स यमन को जोड़ने की। मन के भीतर चल रही उलझनों पे बात करता है तेरा मेरा मनवा।

समस्या -मैं बाईस वर्षीय कालेज गोइंग स्टूडेंट हूँ। मेरी समस्या ये है कि मैं जब भी ट्रेन में बैठती हूँ ,मुझे बहुत डर लगता है। प्लेटफार्म पर आने वाली हर ट्रेन को देखकर लगता है वो अब मुझसे ही आकर टकराएगी। जब कभी ट्रेन में बैठती हूँ तो उसके चलते ही मुझे घबराहट होने लगती है। लगता है मुझे अटैक ही आ जाएगा| सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। उल्टी होने लगती है। इस डर के कारण मैं कहीं भी आ जा नहीं पाती क्या ये कोई मानसिक रोग है? मुझे डॉक्टर के पास जाने में डर लगता है|

समाधान आप घबराये नहीं,कई लोगों को बस, ट्रेन या फ्लाइट में बैठने से भय लगता है। उन्हें लगता है कि अगर वे इन साधनों से यात्रा करेंगे तो जरूर एक्सीडेंट हो जाएगा या वे मर जाएँगे। ये सब एक प्रकार की आशंका और फोबिया के कारण हो सकता है। आप किसी .काउन्सलर से मिल सकती है। उनसे मिलकर आप अपनी बात बताए वे आपकी मदद जरूर करेंगे।


समस्या –मैं चालीस वर्षीय हाउस वाइफ हूँ | मुझे ना जाने क्यों अपनी ज़िंदगी में कुछ भी अच्छा नहीं लगता। किसी भी चीज या कोई भी बात मुझे संतोष नहीं देती | मन बहलाने को म्यूजिक सुनती हूँ लेकिन वो भी शोर जैसा लगता है। घर के किसी भी सदस्य से यहाँ तक कि बच्चों से भी बात करने का कोई मन नहीं होता | बेमन से घर के सभी काम निपटा देती हूँ | लेकिन मन की उदासी नहीं जाती। ना खाना अच्छा लगता है न नींद ठीक से आती है। ज़िंदगी बोझ सी क्यों लगने लगी है? 

समाधान – सबसे पहले तो खुद को शांत रखें। कभी –कभी ऐसा दौर हम सभी के जीवन में आता है जब ज़िंदगी के मायने खोने लगते हैं। ये अवसाद या बहुत चिंता करने से होता है। जहां तक मैं समझ पा रही हूँ आपने अपनी बहुत सी इच्छाओं को दबाया है। आप अपनी किसी भी हॉबी या शौंक को अपने भीतर खोजिए | नृत्य, संगीत, पेंटिंग या कुकिंग या जो भी आपको सुकून दे,ऐसा काम कीजिये | सुबह थोड़ी देर ध्यान या मेडिटेशन जरूर कीजिये | मन को शांत कीजिये। कुछ देर नेचर के पास बैठिए | आपको प्रकृति से जुड़ कर अच्छा लगेगा। ज़िंदगी बहुत खूबसूरत है उसे जीने की कला सीखनी होती है। काउंलसर से जाकर मिल सकती है |


समस्या –मैं एक कंपनी में काम करता हूँ अपने सहकर्मियों के साथ अक्सर मेरी अनबन होती थी लेकिन मैंने कभी भी खुल कर उनसे झगड़ा नहीं किया। घर परिवार में भी मैंने कभी किसी से भी कोई बात को खुल कर नहीं बोला| स्ट्रेस को कम करने के अक्सर मैं शराब पी लेता था फिर मुझे शराब की लत गयी। अब जरा भी स्ट्रेस हो तो मुझे शराब पीनी पड़ती है| अब तो सुबह उठते ही मुझे शराब की तलब होती है| इस वजह से घर में सभी मुझसे से नाराज रहते हैं। मैं नौकरी भी ठीक से नहीं कर पा रहा। पिछले दिनों तबीयत खराब हुई तो डॉक्टर ने बताया लीवर पर सूजन आ गयी है | शराब कैसे छूटेगी ?

समाधान – आपके केस में बस एक बात ही सकारात्मक है कि आप खुद शराब छोडना चाहते हैं | अगर आप वास्तव में शराब छोड़ना ही चाहते हैं तो आपको पक्का इरादा करना होगा। सबसे पहले तो अपनी भावनाओं को दबाना बंद कीजिये। अगर कोई व्यक्ति आपको परेशान करता है घर में या बाहर आप उसका विरोध करना सीखिये।अगर अपनी बात नहीं कहेंगे तो आप भीतर ही भीतर घुटेंगे और शराब की याद आएगी।| एकदम से शराब बंद मत कीजिये। धीरे धीरे पीना कम करना शुरू कीजिये या नजदीक के नशा मुक्ति केंद्र में जाकर आप मदद ले सकते हैं।


 समस्या –मैंने दो वर्ष पहले ही विवाह किया था। ससुराल वाले अक्सर वे मेरे साँवले रंग पे ताने देते हैं, मजाक बनाते हैं, तो कभी मेरे मायके वालों का मजाक बनाते हैं। मेरे पति भी उन लोगों के पक्ष में ही बोलते हैं। मुझे बहुत ही इन्सीक्योर फील करती हूं। मुझे लगता है कि मुझे ससुराल से अलग रहना चाहिए। मैंने पति से बोला तो वे कहते हैं मुझमें सेंस ऑफ ह्यूमर नहीं है, और वो कभी भी अपने परिवार से अलग नहीं हो सकते। बहुत दुखी हूँ क्या करू ?

समाधान – देखिये जब भी कोई नयी जगह या नए लोगों के बीच हम जाते हैं तो उनके व्यवहार को समझने में वक्त लगता है। जो चीजें हम नहीं बदल सकते उन्हें बदलने की कोशिश में खुद को दुखी न करें। लोगों को माफ़ करना करना सीखे। लोगों के व्यवहार को समझना सीखे। गलतियाँ घर के बड़े भी कर सकते हैं लेकिन समझदारी से काम लेना आना चाहिए। छोटी –छोटी बातों से घबरा कर बड़े फैसले नहीं लिए जाते। आप खुद को नेगेटिव एनर्जी से दूर रखिये। अपने दोस्तों से बात कीजिये। अच्छी किताबे पढ़िए। जिन्दगी को जिन्दादिली से जीने की कोशिश कीजिये।