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वेदांता को बड़ा झटका, केन्द्र के बाद अब वन विभाग ने भी सोने की खदान के लिए खनन पर जताई आपत्ति, खनिज विभाग ने भी डाला अड़ंगा

वेदांता को बड़ा झटका, केन्द्र के बाद अब वन विभाग ने भी सोने की खदान के लिए खनन पर जताई आपत्ति, खनिज विभाग ने भी डाला अड़ंगा

बलौदाबजार. जिले में स्थित सोनाखान इलाके में वेदांता लिमिटेड को सोना खदान के लिए पूर्वेक्षण के लिए अनुमति हेतु वन विभाग ने आपत्ति लगा दी है. विभाग ने कहा है कि इस क्षेत्र में दुर्लभ वन संपदा है जिसे नष्ट होने से यह दोबारा पैदा होना संभव नही है इसलिए यहां खनन की अनुमति हेतु अनापत्ति नही दी जा सकती.

इसके पहले केन्द्र सरकार द्वारा गठित एक पर्यावरणीय कमेटी ने पूर्वेक्षण करने से साफ इंकार कर दिया था. जानते चलें कि वेदांता कंपनी ने 144.60 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति हेतु राज्य शासन से अनापत्ति की मांग की थी जिसके बाद वन विभाग की एक टीम ने वेरी डेंस केटेगरी इलाके का दौरा करते हुए कहा था कि यहां कई दुर्लभ प्रजातियां उपलब्ध हैं साथ ही बारनवपारा अभयरण्य के विस्तार वाला इलाका है, इसलिए वेदांता कंपनी को खनन की अनुमति नही दी जा सकती.

इसके पहले केन्द्र के पर्यावरण मंत्रालय ने पर्यावरणीय प्रभाव का आंकलन करने के लिए सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. कमेटी ने पांच बिंदुओं पर अनी रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट के अनुसार 144.60 हेक्टेयर क्षेत्र में बारनवापारा अभयारण्य का विस्तार हो सकता है साथ ही दुर्लभ और विशिष्टि जानवरों की प्रजातियां भी रहती हैं. टाप केनापी में बहेरा, तेंदू, साजा, महुआ, कुसुम समेत 25 प्रजातियां उपलब्ध हैं. इसके अलावा यहां क्लाइम्बर्स भी हैं. इलाके में कई जानवरों की प्रजातियां भी अच्छी संख्या में हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित बोरहोल्स तक पहुचने के लिए बड़ी तादाद में पेड़ों की कटाई और सफाई करने की आशंका है जो वन और वन्य प्राणियों के लिए अत्याधि नुकसानदेह है. जानते चलें कि गुजरे 2016 में देश की सेाने की खदान के लिए पहला कामर्शियल आक्शन किया गया था. सबसे उंची बोली लगाने पर सोना खदान के पूर्वेक्षण का काम वेदांता को मिला था. लेकिन वन विभाग ने 608 के बजाय 400 हेक्टेयर में पूर्वेक्षण की अनुमति दी थी. तब भी खनिज विभाग ने इसे बैरन एरिया बताते हुए विरोध दर्ज कराया था.