breaking news New

ध्रुव शुक्ल की कविताः राम दुहाई! ये कैसी चौपाई!

ध्रुव शुक्ल की कविताः राम दुहाई! ये कैसी चौपाई!


बड़े भाग मानुस तन पावा।

हम को घेरे बाजार छलावा।।


बाढ़े खूब कुटिल अभिमानी।

होती राज धरम की हानी।।


बाढ़े खल बल चोर जुआरी।

कीसें कहें बिपति अति भारी।।


झूठइ लेना ----झूठइ देना।

झूठइ भाषन झूठ चबेना।।


सब दल कल्पित करहिं अचारा।

बरनि न जाय अनीति अपारा।।


जागो जन सब विविध शरीरा।

सब मिल हरो देश की पीरा।।


विकल सभी जन देश के। सूझ परहिं नहिं पंथ।।

पाखण्डवाद के सामने। गुमसुम सब सदग्रंथ ।।