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II कलेक्टरी की एडवांस बुकिंग : आइएएसों की पोस्टिंग पर वरिष्ठ पत्रकार अनिल द्विवेदी का कालम 'अफसरनामा' में पढ़िए : किरण का कौशल..विश्वास का डबल डोज..तारणहार आइएएस..मिस्टर भरोसेमंद..एल्मा की घर वापसी..मौर्य को राहत...जरा पता तो कीजिए..

II कलेक्टरी की एडवांस बुकिंग : आइएएसों की पोस्टिंग पर वरिष्ठ पत्रकार अनिल द्विवेदी का कालम 'अफसरनामा' में पढ़िए : किरण का कौशल..विश्वास का डबल डोज..तारणहार आइएएस..मिस्टर भरोसेमंद..एल्मा की घर वापसी..मौर्य को राहत...जरा पता तो कीजिए..

अनिल द्विवेदी

रायपुर. 29 आइएएसों की अचानक जारी हुई तबादला सूची ने सभी को भौंचक्क करके रख दिया. किसी भी सरकार में इस तरह की प्रशासनिक सर्जरी कोई नई बात नही है लेकिन कल हुए प्रशासनिक फेरबदल ने एक नये सवाल को जन्म दिया है, और वह यह कि क्या कलेक्टरी की एडवांस बुकिंग होने लगी है! आइएएस रानू साहू और आइएएस सौरभ कुमार, क्रमश: कोरबा और रायपुर के कलेक्टर बन सकते हैं, ऐसी घोषणा मीडिया ने एक महीने पहले ही कर दी थी और कल जारी हुई सूची ने इस पर मुहर भी लगा दी. आइएएस जिन्हें ब्रिटिश डिक्शनरी में बिग ब्रदर' कहा जाता है, के थोक में हुए तबादले के पीछे की कई कहानियां हैं. कुछ ऐसी हैं जिन्हें पत्रकारिता के नैतिक धरातल पर लिखा नही जा सकता. कनिष्ठ आइएएसों की नई खैप को जिस तरह जिम्मेदारियां दी गईं, वे तो सामान्य प्रक्रिया के अंग हैं, लेकिन  वरिष्ठ आइएएसों के कलेक्टरी हासिल करने के मामलों के पीछे बहुत से निहितार्थ छुपे हुए हैं. आइए इन्हें इस तरह से समझते हैं :

किरण का कौशल..

सबसे बड़ा आश्चर्य कोरबा कलेक्टर, आइएएस किरण कौशल के तबादले पर जताया जा रहा है. उन्हें अब संचालक खाघ नागरिक आपूर्ति उपभोक्ता संरक्षण तथा प्रबंध संचालक मार्कफेड का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. दोनों मलाईदार पद हैं और यहां पर उसी को पदस्थापना मिलती है जो अफसर सरकार के मुताबिक चलता है. किरण का कौशल सभी जाते हैं. कोरबा में रहकर उन्होंने सरकार को बखूबी अहसास करा दिया है. फिर अब चुनाव आ रहे हैं, नान घोटाला' का जिन्न फिर से मुंह उठायेगा. इस घोटाले में रमन सरकार का मुंह काला हुआ है. सरकार कुछ आरोपियों के हाथ मरोड़ने की तैयारी में है. किरण कौशल के तबादले से कोरबा के ही निवासी, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने राहत की सांस ली होगी. यकीन ना हो तो कोरबा में फोन लगाकर पूछ लीजिए किसी से.

विश्वास का डबल डोज..

आइएएस टोपेश्वर वर्मा को भी राजनांदगांव कलेक्टर पद से हटाते हुए राजधानी में बिठाया गया है. वे सचिव खादय नागरिक आपूर्ति, सचिव परिवहन, परिवहन आयुक्त, आयुक्त खादय नागरिक आपूर्ति जैसे महकमे दिए गए हैं. वर्मा को यह जिम्मेदारी मिलना यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री का भरोसा उन पर कायम हैं. अब रिश्तेदारी में हैं तो जलवा तो रहेगा ही. सरकार को इन दोनों विभागों से वह रिजल्ट नही मिल पा रहा था जिसकी उम्मीद थी. ऐसे में वर्मा सही चेहरा मिले हैं.

तारणहार आइएएस

अब तक सरकार के संपादक' माने जाने वाले आइएएस तारण प्रकाश सिन्हा को सरकार से बड़ा ईनाम मिला है. अब वे राजनांदगांव की कलेक्टरी संभालेंगे. यह जिला, पार्टी और मुख्यमंत्री की नजरों में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने तो उन्हें भरोसेमंद आयुक्त सह संचालक जनंसपर्क चाहिए था तब उन्होंने सिन्हा को इसकी कमान सौंपी थी. ढाई साल में ही मुख्यमंत्री बघेल की छबि का ग्राफ नेशनल लेवल पर बढ़ता ही गया. सरकार की योजनाएं भी इस कदर प्रसिद्धि पाईं कि प्रियंका गांधी ने इसकी सराहना करते हुए उसे यूपी सरकार के लिए आदर्श बताया था. जाहिर यह सब तारण सिन्हा की रणनीति और सूझबूझ का कमाल था क्योंकि उन्होंने नेशनल मीडिया का भरपूर उपयेाग किया. हालांकि सिन्हा को मुख्यमंत्री छोड़ना नही चाहते थे लेकिन राजनांदगांव का सवाल है! यह जिला अभी भाजपा के कब्जे में है, कांग्रेस इस गढ़ को पुन: जीतना चाहती है. देखते हैं तारण पार्टी के लिए कितना तारण' बन पाते हैं!

मिस्टर भरोसेमंद..

रायपुर कलेक्टर रहे, आइएएस एस भारती दासन को नया प्रभार मिलना तय माना जा रहा था. उनका कार्यकाल पूरा हो गया था और सरकार उन्हें किसी महत्वपूर्ण पद पर बिठाना चाहती थी. अब उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय में विशेष सचिव, विशेष सचिव कृृषि विभाग, नोडल अधिकारी नरवा गुरूवा बाडी का प्रभार दिया गया है. जनसंपर्क विभाग में आयुक्त सह संचालक का प्रभार मिलना यह दर्शाता है कि वे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भरोसेमंद अफसर बन चुके हैं. बतौर रायपुर कलेक्टर जिस तरह दासन अविवादित और परिणामदायी अफसर बने रहे, उससे साबित होता है कि रायपुर जैसे शहर में तीन तीन कांग्रेस के विधायक, एक मंत्री और विपक्ष के विधायकों को उन्होंने बखूबी साधे रखा, सरकार की छबि भी बनाए रखी. इसीलिए सीएम ने उन पर बड़ा भरोसा जताते हुए जनसंपर्क की कमान भी सौंप दी है.
दासन मीडिया फ्रेण्डली भी हैं. कुल मिलाकर वे सीएम के भरोसेमंद अफसर के तौर पर सामने आए हैं.

एल्मा की घर वापसी..मौर्य को राहत..

धमतरी जिला में पोस्टिंग करके सरकार ने एक तीर से दो निशान साधे हैं. यहां के कलेक्टर रहे आइएएस जे पी मौर्य को हटाते हुए सरकार ने 2010 के प्रमोटी आइएएस पदुम सिंह एल्मा को कलेक्टर बनाया है. मौर्य किसी भी जिले में टिक नही पा रहे. धमतरी के पहले राजनांदगांव में भी वे ज्यादा समय नही बिता सके और अब धमतरी से भी चलता कर दिए गए. सरकार के सूत्र बताते हैं कि लाटमेटा में एक राइस मिल का मामला, 40 एकड़ जमीन का विवाद, अवैध रेत खनन को लेकर कांग्रेस नेताओं की नाराजगी जैसे कारणों ने मौर्य की विदाई पर ठप्पा लगवा दिया. उधर पदुम सिंह एल्मा की घर वापसी माना जा रहा है क्योंकि इसके पहले यहां जिला पंचायत के सीईओ रह चुके हैं. तब भाजपा सरकार थी और एल्मा मंत्री अजय चंद्राकर के खासमखास थे. इसलिए चंद्राकर इस पोस्टिंग से खुश हो रहे होंगे. हालांकि तक एल्मा का कार्यकाल जनता में बहुत ज्यादा नही सराहा गया था. गुप्तचर बताते हैं कि जनता में कई तरह की अफवाहें उड़ा करती थीं. जिले में रेत माफिया काफी सक्रिय है, इसे लेकर सभी कलेक्टरों की कार्यवाही पर सवाल खड़े होते रहे हैं. बताते हैं कि एल्मा को भी एक खास मिशन से ही भेजा गया है धमतरी. हालांकि शिक्षा कर्मियों की भर्ती में उठा विवाद का साया भी सामने आ सकता है लेकिन एल्मा हमेशा सरकार और मंत्री के प्रति वफादार रहे हैं, आखिर जनता तो इन्हीं के पीछे खड़ी है ना!

जरा पता तो कीजिए..

आइएएस भोसकर विलास संदिपान 2011 बैच के आइएएस हैं और बेमेतरा के कलेक्टर बनाए गए हैं. सीएम हाउस में पैठ रखने वाले अफसर से तनातनी के चलते उन्हें कोरिया का कलेक्टर पद से हटा दिया गया था लेकिन अब पुन: कलेक्टर बन जाना इसका राज ढूंढ़ना अभी बाकी है.

अगली लिस्ट आइपीएस और आइएफएस की आ रही है. 20 से ज्यादा अफसर प्रभावित होने की संभावना है.

( लेखक दैनिक आज की जनधारा' के स्थानीय संपादक हैं )