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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -वर्चुअल दुनिया का फर्जीवाड़ा

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -वर्चुअल दुनिया का फर्जीवाड़ा

-सुभाष मिश्र
पिछले दिनों किसी ने फेसबुक पर मेरा फर्जी अकाउंट बनाकर मेरे बहुत सारे मित्रों से मेरे नाम से पैसे मांगने शुरू किया। एक के बाद एक जब मेरे दोस्तों के फोन आना शुरू हुए तो मैंने साइबर क्राईम ब्रांच में इसकी रिपोर्ट लिखाकर फेसबुक पर भी अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई। अपने सभी दोस्तों को इसकी सूचना दी। ऐसे फ्राड की सूचनाएं मित्रों, जान-पहचान वालों से रोज ही मिल रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2020 और 2021 के बीच 120 मिलियन लोगों ने साइबर अपराध का अनुभव किया। साइबर अपराधियों ने कोरोना काल में टीकाकरण के लिए नकली वेबसाइट बनाकर फर्जी आनलाईन अप्वाइंटमेंट कर लोगों से अग्रिम भुगतान करके टीको की प्री-बुकिंग तक कर डाली। पिछले एक साल में 27 मिलियन से अधिक भारतीय अपनी पहचान चोरी के शिकार हुए हैं। साइबर अपराधियों के लिए यह आपदा में अवसर खोजने जैसा था।

डिजिटल इंडिया को सर्वाधिक गति लाकडाउन में मिली। गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि बिन भय होए, ना प्रीत गोसाई। लोगों को लगने लगा कि नोट के लेनदेन से यहां तक की अखबारों से भी कोरोना फैल सकता है। लोगों ने न्यूज पेपर के ई-पेपर व पीडीएफ पढऩे की आदत डाल ली। आनलाईन पढ़ाई-लिखाई, लेन-देन, खरीदी, मनोरंजन, कुकरी क्लास से लेकर सब कुछ होने लगा। किसी समय रिलांयस कंपनी ने अमन मोबाइल को लांच करते समय कहा था कर लो दुनिया मुट्ठी में, सो अब आपके मोबाइल पर आपकी दुनिया है। मोबाइल पर उपलब्ध नेट बैंकिंग से लेकर ओटीपी प्लेट फार्म के जरिये नये पुराने मनोरंजन की दुनिया है। शब्दकोष यानी डिक्शनरी, लाइब्रेरी सब कुछ मोबाइल में है। मोबाइल पर गूगल बाबा की मदद से आप बहुत कुछ ढूंढ लेते हैं, यहां तक की किसी का घर, उसकी लोकेशन। मोबाइल क्रांति ने जहां लोगों के जीवन को सुलभ, पहुंच को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों के लिए भी बहुत से लूट के नये-नये अवसर उपलब्ध कराए है। जिस तरह पूर्व में बहुत से लोगों ने भोले-भाले वनांचल में रहने वाले आदिवासियों, ग्रामीणों को अपनी चालाकी और ज्ञान के बूते लूटा था, वहीं लूट डिजिटल प्लेटफार्म पर तकनीक के जानकार कर रहे हैं। सभ्यता के विकास के साथ लूट के नये-नये तरीके भी विकसित हुए हैं, यह लूट का उत्तर आधुनिक तरीका है।

बहुत सारे साइबर ठग नामी गिरामी कंपनियों के नाम का सहारा लेकर लोगों को फ्री गिफ्ट के नाम पर छूट के नाम पर लूट रहे हैं। वे लोगों को ठगने के लिए प्रमोशन के लिंक में वायरस छिपाकर भेज रहे है। मोबाइल या लैपटाप यूजर जैसे ही इस लिंक को क्लिक करता है तो उसका मोबाइल/लैपटाप हैक हो जाता है और उसकी जानकारी ठगों तक पहुंच जाती है।

वर्चुअल दुनिया का फर्जीवाड़ा केवल पैसे-कौड़ी तक सीमित नहीं है। इस फर्जीवाड़े में लोगों के इमोशन, प्यार, यौन उत्कंठा, प्रतिभा प्रदर्शन के नाम पर देह का प्रदर्शन और उन प्रदर्शनों को भी शामिल किया है जो समाज में प्रतिबंधित है। नेट के जरिये पोनोग्राफी और सेक्स सौदे का एक नया बाजार भी उपलब्ध हुआ है। अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर बहुत से लोग तरह-तरह से, इमोशनल ब्लेकमेल कर रहे हैं। बहुत सारे प्रतिभाहीन या जल्दी प्रसिद्धि पाने की लालसा रखने वाले और अपने फॉलोअर्स की संस्था के जरिये मुनाफा कमाने वाले लोग, संस्थाएं फेक फॉलोअर्स खरीदते हैं। बहुत सारे लोग आनलाईन शापिंग के जरिये बड़ी-बड़ी कंपनियों का सामान मंगाकर दो-चार दिन उसका उपयोग कर दिखावे के बाद उसे वापस कर रहे हैं। डेटिंग एप टिंडर, अजहर के जरिए भी लोग एक-दूसरे को बहुत से उल्टे सीधे ऑफर देते हैं। इंस्ट्राग्राम पर कालगर्ल पेटीएम भुगतान के आधार पर अपने अंगो का प्रदर्शन कर आमंत्रण स्वीकार कर रही हैं। नये तरह से ग्राहक तलाशने का एक बड़ा माध्यम सोशल मीडिया प्लेटफार्म हो गया है। बहुत से लोग इस पर मीम बनाकर लोगों का मजाक उड़ा रहे हैं तो कुछ लोग बुलिंग कर रहे हैं। यह लोगों को गलत-सलत जानकारी देने का, गुमराह करने और अफवाहों को फैलाकर वैमनस्यता पैदा करने का भी बड़ा माध्यम बन गया है।
साइबर अपराधियों ने अपने को बैंक अधिकारियों के रूप में पेश किया और शुल्क के लिए ऋण स्थगन की पेशकश की। पीएम केयर फंड के लिए नकली यूपीआई हैंडल तक बने।

साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए कई तरह से आधार, पैन कार्ड और मोबाइल नंबर की जानकारी का इस्तेमाल करते हैं। आपकी पहचान चुराकर, वे आपके नाम पर ऋण ले सकते हैं, बैंक खाते खोल सकते हैं और अवैध धन हस्तांतरित कर सकते हैं और यहां तक कि सिम-स्वैप धोखाधड़ी भी कर सकते हैं।  
नकली आनलाईन शापिंग पोर्टल से लेकर पैसे के एवज में नौकरी देने और पैसे निकालने के लिए मोबाइल फोन पर फिशिंग लिंक भेजने तक, साइबर अपराधी यह कर रहे हैं। भरतपुर, मथुरा और मेवात, अब नए जामतारा के रूप में उभरे हैं, जो कुख्यात फिशिंग हमलो के लिए जाना जाता है।

लोगों को ठगने और ब्लैकमेल करने के जो नए तरीके सामने आए हैं। उनमें जालसाज एक वीडियो कॉल का लिंक भेजता है और फिर कॉल को रिकॉर्ड करता है। कैशबैक की पेशकश से लेकर आलीशान होटल में मुफ्त ठहरने के लिए एक एसएमएस आता है जो स्क्रैच कार्ड पोर्टल पर ले जाता है। यह लोगों को उनके पैसे से ठगने का एक तरीका बन गया है। जहां डिजिटल प्लेटफार्म में हमारे जीवन में बहुत सारे सकारात्मक बदलाव, सुख-सुविधा का विस्तार किया है वहीं कुछ लोगों के कारण यह ठगी का एक बड़ा हथियार भी बनता जा रहा है।

सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म के लिए जो गाईडलाईन जारी की है उससे उन प्लेटफार्म तो शिकंजा कस सकता है, जो सरकार के खिलाफ है। सरकार अपने आलोचकों का मुंह बंद कराकर उन पर कार्यवाही कर सकती है। किन्तु आन लाईन फ्राड को नहीं रोक सकती। जब तक सोशल मीडिया पर फेक एकाउंट बनेंगे उससे अपराधी पकड़ में नहीं आयेंगे। सोशल मीडिया पर उपलब्ध एप, प्लेटफार्म पर अकाउंट वेरिफिकेशन का ऐसा सिस्टम, प्रावधान बनाने की जरूरत है जो फर्जी आईडी से बनने वाले अकाउंट को रोक सके। अकाउंट बनाने के लिए वोटर आईडी, आधार कार्ड नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस आदि को आधार बनाया जा सकता है। जिस तरह इंस्ट्राग्राम, फेसबुक, ट्विटर पर ब्लू टिक का प्रावधान है जिससे मालूम पड़ जाता है कि यह अकाउंट वास्तविक है, वैसे ही सारे अकाउंट के लिए भी प्रावधान जरूरी है। वर्चुअल दुनिया में वास्तविक पहचान जरूरी है।