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महामारी के प्रकोप को देखते हुए बिहार, झारखंड के निवासियों से अपील नियमों का पालन कर मनाये छठ महापर्व

महामारी के प्रकोप को देखते हुए बिहार, झारखंड के निवासियों से अपील नियमों का पालन कर मनाये छठ महापर्व

रायपुर।  छत्तीसगढ़ की रायपुर में रहने वाले  बिहार, झारखंड के मूल निवासी छठ महापर्व को लेकर काफी उत्साहित हैं। कोरोना महामारी के प्रकोप को देखते हुए तालाबों के किनारे पूजा करने और सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान विशेष सावधानी बरती जाएगी। एक ही जगह पर ज्यादा लोग एकत्रित ना हो इसका खास ध्यान रखा जाएगा, ताकि शारीरिक दूरी के नियमों का पालन किया जा सके।

छठ महापर्व समिति के राजेश सिंह ने बताया कि पति, संतान और पूरे परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर किए जाने वाले चार दिवसीय छठ पर्व की शुरुआत बुधवार 18 नवंबर से होगी और प्रतिदिन विविध रस्म निभाने के बाद 20 नवंबर को मुख्य छठ पूजा की जाएगी। 

शाम को सूर्य देव और छठी माता की पूजा करके अर्घ्य देने तालाब के किनारे जाने की परंपरा है। इसके अगले दिन 21 नवंबर को उगते सूर्य की पूजा करके व्रत का पारणा करेंगे। हर साल महादेव घाट समेत अन्य तालाबों में हजारों व्रती पूजा करने उमड़ते हैं। इस साल कोरोना महामारी के कारण ज्यादातर लोग घर पर ही पूजा की रस्म निभाएंगे। तालाब में दूर दूर तक अर्घ्य देने की व्यवस्था की जाएगी।

पहला दिन 18 नवंबर - महिलाएं इस दिन नहाना-खाना परंपरा के अंतर्गत स्नान- ध्यान करके सिर्फ लौकी की सब्जी व रोटी खाएंगी।

दूसरा दिन 19 नवंबर - गुरुवार को दिनभर 'खरना" (उपवास) रखकर शाम को खीर व रोटी खाएंगी।

तीसरा दिन 20 नवंबर - शुक्रवार को बिना पानी पिए 'निर्जला उपवास" रखेंगी और शाम को अपने घर के समीप स्थित नदी- तालाब में कमर तक जल में डूबकर ढलते सूर्य (सूर्यास्त) को अर्ध्य देंगी। घर आकर देर रात तक भजन- कीर्तन का दौर चलेगा और आधी रात को 2 बजे के बाद महिलाएं पुन: तालाब किनारे जुटकर पूजा- अर्चना करेंगी।

चौथा एवं अंतिम दिन 21 नवंबर- शनिवार को उगते सूर्य (सूर्योदय) को अर्ध्य देने के बाद गरम जल व प्रसाद ग्रहण कर अपना उपवास तोड़ेंगी।