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ध्रुव शुक्ल की कविताः सावधान! रास्ता बंद

ध्रुव शुक्ल की कविताः सावधान! रास्ता बंद


किये जा रहे बंद सब रास्ते

जन की पगडण्डियों को पाटकर

बनाया जा रहा कोई नया राजमार्ग


अपने जाने-पहचाने

रास्तों को पीछे छोड़

पार करके कई मोड़

भागे चले जा रहे लोगों को

नहीं मिल रहा रास्ता


कोई अनजाना डर

हाँक रहा जीवन को


जनपथ से गुजरता जुलूस

पहुँच नहीं पा रहा संसद तक


सावधान! रास्ता बंद