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कोरोना का ख़ौफ़, पॉजिटिव आने के बाद छिप रहे कोरोना मरीज

कोरोना का ख़ौफ़, पॉजिटिव आने के बाद छिप रहे कोरोना मरीज

रायगढ़। कोरोना का खतरा लगातार जिले में मंडरा रहा है। कभी कम तो कभी ज्यादा केस मिल रहे हैं। मौतों का सिलसिला भी बदस्तूर जारी हैमगर इस बीच इससे जुड़ी एक चौंकानेवाली खबर सामने आयी है। जिले के 861मरीज कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव आने के बाद से गायब हैं। अब तक न तो वे अस्पताल पहुंचे हैं और न ही स्वास्थ्य विभाग उनकी पहचान कर सका है। इनमें से अधिकांश ऐसे लोग हैं जो कोरोना के

खौफ से इलाज कराने से कतरा रहे हैं और अपनी पहचान छुपाकर सरेआम घूमरहे हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कोरोना संक्रमण को लेकर लगातार जनजागरूकता लाने का प्रयास कर रही है। लोगों को समझाने का प्रयास कर रही है कि कोरोना से डरें नहीं बल्कि हल्का लक्षण दिखते ही सीधे अपने नजदीकी कोविड कलेशन सेंटर में जाकर अपना कोरोना टेस्ट करायें और पॉजीटिव आने पर अस्पताल में दाखिल हों ताकि जल्द से जल्द

उनका उपचार शुरू किया जा सके। इसके पीछे प्रशासन की सिर्फ यही मंशा है कि जिले में कोरोना के संक्रमण को रोका जा सके और लगातार बढ़ रहे मौत के आंकड़ों पर भी काबू पाया जा सके। इसके लिए प्रशासन की ओर से लगातार लोगों को समझाईश दी जा रही है कि इस संक्रमण काल में एक छोटी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है और आपके साथ आपका पूरा परिवार भी खतरे में पड़ सकता है। मगर विडंबना यह है कि जिले में संक्रमण का आंकड़ा 20 हजार के करीब और मौतों का ग्राफ ढाई सौ तक पहुंचने के बाद भी कोरोना को लेकर लोग गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।

लापरवाही की हद तो तब हो रही है जब कोरोना पॉजीटिव आने के बाद भी लोग अस्पताल जाने के बजाये खुद को छिपा रहे हैं और बिना इलाज के ही घूम रहे हैं। जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास अब तक ऐसे ही 861 केस सामने आ चुके हैं। जिसमें पॉजीटिव आने के बाद संबंधित पते पर मरीज नहीं मिल रहे हैं और उनकी पहचान करने में विभाग के पसीने छूट रहे हैं।

शुरूआती दौर से बनी है यह समस्या

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि यह समस्या पिछले 9 महीने से बनी हुई है। हर महीने 50 से 100 ऐसे केस मिल रहे हैं जिसमें पॉजीटिव आने के बाद जब विभागीय टीम उन्हें हॉस्पीटल शिफ्ट करने के लिए पहुंचती है तो पता चलता है कि वह शस यहां रहता ही नहीं है। इस तरह यह आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जानबूझकर भी छिपा रहे हैं पहचान अधिकारियों की मानें तो कोरोना टेस्ट कराने के समय लोगों को अपना पूरा पता और मोबाईल नंबर संबंधित सेंटर में दर्ज कराना पड़ता है ताकि पॉजीटिव आने की स्थिति में उनसे संपर्क किया जा सके मगर कुछ लोग जानबुझकर या तो अपना पता ही गलत दर्ज करा रहे हैं या फिर मोबाइल नंबर गलत देकर अपनी पहचान छिपा रहे हैं। हालांकि कुछ ऐसे भी केस इसमें शामिल हैं जिसमें एक व्यक्ति  के दो-तीन बार टेस्ट कराने से यह स्थिति बनी है।