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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -सर्टिफिकेट के लिए परीक्षा प्रणाली क्या हो?

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -सर्टिफिकेट के लिए परीक्षा प्रणाली क्या हो?

-सुभाष मिश्र
दसवीं और बारहवीं के बोर्ड एक्जाम कोरोना संक्रमण की वजह से आगे बढ़ते दिख रहे हैं। इसके उलट सीबीएसई कह रहा है कि तय समय पर होगी बोर्ड परीक्षाएं। वहीं विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि बड़े हॉट स्पाट बन सकते हैं परीक्षा केंद्र। पिछले एक साल में बोर्ड परीक्षाओं को छोड़कर अधिकांश परीक्षाओं में जनरल प्रमोशन देकर विद्यार्थियों को आगे की कक्षाओं में भेज दिया गया। कोरोना संक्रमण की पहली लहर में थोड़ी शिथिलता आने पर तेजी के साथ सीबीएसई सहित बहुत से प्रदेश के हायर सेकेंडरी बोर्ड ने परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। कुछ स्कूल में भी ऑनलाईन की बजाय ऑफ लाईन पढ़ाई प्रारंभ हो गई थी। घर बैठे पढ़ाई कर रहे बच्चों के माता-पिता की जेब का बोझ, कतई कम नहीं हुआ, अलबत्ता बच्चों का खराब शिक्षण सामग्री कमजोर वाईफाई कनेक्शन और तकनीक की खराबी की वजह से आन लाईन पढ़ाई से मोह जरूर भंग हुआ। टीवी, लेपटॉप और मोबाइल की स्क्रीन पर एक से एक प्रोग्राम देखने वाले स्टुडेंट ने आनलाईन पढ़ाई को उसी तरह खारिज किया जैसा की टीवी के निजी चैनल एफएम रेडियो और ओटीटी प्लेटफार्म आने के बाद लोगों ने दूरदर्शन और आकाशवाणी से किनारा किया। विद्यार्थी से उपभोक्ता बना स्टुडेंट क्वालिटी चाहता है, जो आनन-फानन में तैयार शिक्षण सामाग्री में नहीं है। वह आन लाईन एक से एक गेम देखता है और बार-बार मना करने पर भी देखने से बाज नहीं आता। इस समय आन लाईन गेम की बिक्री करोड़ों में है।

इस समय हमारे देश में बेकाबू कोरोना रफ्तार के बीच ऑफलाइन आयोजित होने जा रही सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं को कैंसिल करने की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। परीक्षाओं को लेकर स्टूडेंट्स मांग कर रहे हैं कि बोर्ड एग्जाम रद्द किए जाएं या फिर ऑनलाइन आयोजित किए जाएं। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, अभिनेता सोनू सूद के बाद दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी एग्जाम कैंसिल करने की मांग की है। केजरीवाल ने कहा, दिल्ली में 6 लाख बच्चे सीबीएसई की परीक्षा लिखने जा रहे हैं। लगभग 1 लाख शिक्षक इसका हिस्सा होंगे। ये प्रमुख आकर्षण के केंद्र बन सकता हैं, जो कोरोना के बड़े स्तर पर फैला सकता हैं। बच्चों का जीवन और स्वास्थ्य है। हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मैं केंद्र से सीबीएसई परीक्षा रद्द करने का अनुरोध करता हूं। उन्होंने कहा है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर ऑनलाइन परीक्षा और छात्रों को बढ़ावा देने सहित अन्य तरीकों का पता लगा सकता है। अभिनेता सोनू सूद छात्रों के सपोर्ट में उतर आए हैं। उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए 2021 में ऑफलाइन आयोजित होने वाली बोर्ड परीक्षाओं को कैंसिल करने की मांग की है। सोनू सूद ने कहा कि देश में एक लाख 45 हजार केस रोजाना आ रहे हैं। ऐसे में स्टूडेंट्स एग्जाम के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनल असेस्टेंट जैसा कोई वैकल्पिक तरीका अपनाना चाहिए। ऐसे हालात में छात्रों को सपोर्ट करना बहुत जरूरी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच 4 मई से सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं आयोजित कराने पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। प्रियंका गांधी ने भी एग्जाम कैंसिल करने की मांग शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल को पत्र लिखकर कहा कि परीक्षा केंद्रों पर भीड़-भाड़ होने से छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना असंभव होगा। प्रियंका गांधी ने कहा कि सीबीएसई बोर्ड 2021 परीक्षाओं को या तो रद्द/रीशेड्यूल किया जाए या फिर इस प्रकार आयोजित किया जाए जिससे छात्रों को एग्जाम सेंटर्स पर पहुंचकर पेपर ना देने हों।

यहां सवाल यह भी है कि अभी तो कोरोना की दूसरी लहर है यदि अन्य देशों की तरह यहां भी तीसरी-चौथी लहर आई तो क्या होगा? हमने पिछले एक साल में ऐसा कौन सा बड़ा इन्फास्ट्रेक्चर तैयार किया है, जो बच्चों को आनलाईन पढ़ाकर, उनका आनलाईन एग्जाम ले सके। हमें नये सिरे से परीक्षा प्रणाली पर विचार करने की जरूरत है। हमारी परीक्षा मूल्यांकन पद्धति जिसमें हम छात्रों को सर्टिफिकेट या डिग्री देते हैं, जिसके आधार पर उन्हें आगे की पढ़ाई करने या नौकरी करने के अवसर मिलते हैं। बहुत सारे लोगों का मानना है कि किसी भी हालत में परीक्षाएं तो होनी ही चाहिए बिना मूल्यांकन और सर्टिफिकेट के छात्रों का भविष्य चौपट हो जायेगा। उन्हें कहीं एडमिशन नहीं मिलेगा, नौकरी नहीं मिलेगी। यहां सवाल यह भी है कि जब इस तरह के सर्टिफिकेट और डिग्री नहीं मिलते थे, बोर्ड एग्जाम नहीं होते थे, तो क्या लोगों को रोजगार, नौकरी नहीं मिलती थी? कितने सर्टिफिकेट धारियों, डिग्री धारियों को सरकारी नौकरी मिल गई। 10वीं और 12वीं के बाद कितना ड्रापआउट हो गए।

परीक्षा प्रणाली पर जब भी पुर्नविचार की बात आती है तो लोगों का कहना होता है कि यदि सभी को एक साथ बिठाकर परीक्षा लेना संभव न हो तो बहुत सारे सेंटर बनाकर या फिर आंसर कापी देकर घर से पेपर लिखकर लाने की सुविधा होनी चाहिए। ओपन स्कूल की तरह ओपन बुक सिस्टम से भी एग्जाम लिया जा सकता है। ग्राम पंचायत और अन्य शासकीय भवनों को परीक्षा केंद्र बनाकर भी परीक्षाएं कोविड नियमों का पालन करते हुए की जा सकती है। आंसर कापी देकर भी समय सीमा में एग्जाम लिए जा सकते हैं।

शासकीय और निजी विद्यालयों, महाविद्यालयों के टीचर का कहना है कि हमें तो पूरे सालभर स्कूल/कालेज बुलाकर काम लिया गया। अब जब एग्जाम की बात आई है तो तब तक बहुत से टीचर कोविड पाजिटिव हो गये। सरकार चाहे तो आफ लाईन एग्जाम भी हो सकती है। वैसे बहुत सारे प्रदेशों में आनलाईन एग्जाम कराए हैं। आन लाईन एग्जाम कराने के लिए स्कूल/कालेजों में आधुनिक तकनीक के संसाधन के साथ उसकी जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों की सेवाएं लेनी होगी। एक दूसरे विकल्प के रूप में होम थियेटर की तरह टीवी के माध्यम से लाईव क्लास हो सकती है। यह क्लास घरों में, सार्वजनिक भवनों में बड़े स्क्रीन लगाकर चौपाल कार्यक्रम की तर्ज पर ली जा सकती है और इसी के साथ एग्जाम भी हो सकती है।

कोरोना संक्रमण के चलते पिछले साल यूजीसी ने डिग्री के लिए एग्जाम की अनिवार्यतता को मानते हुए जुलाई-अगस्त में एग्जाम लिए थे। उनका मानना है कि बिना परीक्षा लिए डिग्री की मार्कशीट की कोई वैल्यू नहीं है। प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और मूल्यांकन के लिए परीक्षा मूल्यांकन पद्धति के आधार पर विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट डिग्री मिलनी चाहिए। यदि केवल जनरल प्रमोशन के आधार पर दसवी, 12वीं या ग्रेजुएशन की डिग्री दे दी गई, तो उससे विद्यार्थियों का भविष्य चौपट हो जायेगा। बहुत सारे शिक्षाविदों का मानना है कि छात्रों को जो साल भर पढ़ाया जाता है, वह उन्हें थोड़े दिन याद रहता है यदि समय पर परीक्षा न हो तो बहुत से छात्र-छात्रा क्लास में पढ़ाया हुआ भी भूल जाते हैं।

नई शिक्षानीति हमारी परीक्षा प्रणाली को लेकर बहुत कुछ नहीं कहती। छात्रों का भविष्य उनके मूल्यांकन पर टिका है। यह कोरोना समय सफल मूल्यांकन की, आफ लाईन परीक्षा इजाजत नहीं देता की ओर आन लाईन परीक्षा के लिए संसाधनों की कमी है, ऐसे में आगे क्या होगा पता नहीं। नई शिक्षानीति में प्रावधानिक हैं कि नई शिक्षा नीति के तहत, बहुप्रतीक्षित 10 वीं और 12 वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा, जो छात्रों के लिए अत्यधिक तनावपूर्ण मानी जाती है, को भी फिर से शुरू किया जाएगा। ध्यान अब छात्रों की मुख्य दक्षताओं (अवधारणाओं) का परीक्षण करने के लिए स्थानांतरित किया जाएगा और रट्टा सीखने में नहीं। इसका उद्देश्य बच्चों में ज्ञान की खोज को बढ़ावा देना और उनके समग्र विकास में मदद करना है। एनईपी के अनुसार, सभी छात्रों को किसी भी दिए गए स्कूल वर्ष के दौरान दो बार बोर्ड एक्जाम लेने की अनुमति दी जाएगी, एक मुख्य परीक्षा और एक सुधार के लिए, यदि वांछित है।

यहां सवाल यह है कि महाराष्ट्र में 30 अप्रैल तक संपूर्ण लाकडाउन है। दिल्ली भी लाकडाउन की ओर बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ के बहुत सारे शहरों में लाकडाउन है। पंजाब, मध्यप्रदेश सहित बहुत से प्रदेश कोरोना से बुरी तरह प्रभावित है। इस समय 12,64,698 एक्टिव केस है। एक दिन में कोरोना के नये 1,61,736 प्रकरण पाये गये और 879 लोगों की मौत हुई। ऐसे में क्या बोर्ड की परीक्षाएं होना संभव है। आने वाले दिनों में यह संक्रमण और बढ़ा तो फिर परीक्षा के पक्ष में क्या तर्क होंगे।