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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते

- सुभाष मिश्र
जब हरिद्वार के कुंभ से एक साथ गंगा स्नान करके बहुत से साधु-संत और धर्म परायण जनता कोरोना संक्रमित होकर पूरे देश में कोरोना संक्रमण फैलाने निकल पड़ी, तब आपको ध्यान आया की कुंभ को प्रतीकात्मक किया जाये। ये पहल, अपील, आप पहले भी तो कर सकते थे। एक अपील अपनी पार्टी के लोगों से बंगाल चुनाव में वर्चुअल रैली के लिए भी लगे हाथ कर देते। सबसे ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा की तर्ज पर एक बार कह सकते हो ना मै चुनाव रैली संबोधित करने आऊंगा, ना कोई नेता रैली करे। जनता से सोशल मीडिया और गोदी मीडिया के जरिये अपील कर लेते वो तो तुम्हारे भक्ति रस में डूबा हुआ है।

राजेश रेड्डी का एक शेर
मातम का नाम ह़ाकिम ने जश्न कर दिया है
रोती है अब रिआया ताली बजा-बजा कर।।

तुमने देश के लोगों को कहा काला धन आ जायेगा, लोगों ने मान लिया। तुमने रातों-रात नोटबंदी कर लोगों को लंबी-लंबी लाईन में लगवा दिया, लोग राष्ट्र भक्ति की भावना से ओतप्रोत होकर लाईन में लग गये। जनता को लगा वो भी सैनिको की तरह देश की आर्थिक बार्डर की रक्षा में तैनात हैं। तुमने कहा पाकिस्तान को पुलवामा का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सर्जिकल स्ट्राईक जरूरी थी, हमने दुश्मन के घर में घुसकर मारा, लोगों ने मान लिया। तुमने कहा देश में बहुत से घुसपैठियें आ गये हैं उन्हे पहचानकर बाहर निकालने के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर जरूरी है, लोगो ने मान लिया। तुमने कहा जो भारत माता की जय नहीं बोलता, वंदे मातरम नहीं बोलता वह राष्ट्रदोही है, बहुत से लोगों ने मान लिया। तुमने कहा किसान आंदोलन राष्ट्र विरोधियों की, खलिस्तानियों की साजिश है, तुम्हारे भक्तों सहित बहुत से लोगों ने मान लिया। गोदी मीडिया ने इस संदेश को बहुत तेजी से फैलाया। आंदोलनकारी किसानो के अलावा सबको यह समझाने मे ंकामयाब रहे की तीनो नये कृषि कानून किसानो के हित में हैं। भक्तगणो को लगा ये किसान सिरफिरे हैं। बेमतलब बॉर्डर पर, लालकिले पर प्रदर्शन करके देश को बदनाम कर रहे हैं। तुमने कहा एक देश-एक टैक्स लोगों ने मान लिया।

तुमने डीमानेटाईजेशन यानी विमुद्रीकरण की बात करके कहा की इससे टेरर फंडिग रूकेगी, भ्रष्टाचार दूर होगा, बाहर के देशों से काला धन वापस आयेगा, सबके खातों में 15-15 लाख आयेंगे सबने मान लिया। जीएसटी को महिमा मंडिन करके तुमने 15 अगस्त, 26 जनवरी की तरह लाईटिंग कर आघी रात को जश्न मनाकर लोगो को झूठे सपने दिखाये लोगों ने फिर भी मान लिया। कोई इस की असफलता के बारे में सवाल नहीं पूछता। कुछ राज्य जरूर बीच-बीच में अपने हिस्से के लिए आवाज उठाते हैं, उससे तुम्हे और तुम्हारी सरकार को क्या फर्क पड़ता है। तुम तो कांग्रेस मुक्त भारत या कहे विरोध मुक्त भारत बनाने निकलो हो। तुमने अच्छे दिन आने के सपने दिखाएं और पेट्रोल-डीजल सहित बहुत सी चीजे मंहगी हो गई। विश्वव्यापी कोरोना महामारी को भी तुमने अपने हुनर और जादूई बयानो, भाषणों के जरिये आपदा में अवसर ढूंढने जैसी बात कही लोगो ने मान लिया। तुमने और तुम्हारी पार्टी के लोगों ने बहुमत की आपदा में फंसी विपक्षी सरकारों के विधायकों को कृत्रिम आपदा खड़ी करके सत्ता में रहकर कमाने खाने का अवसर देकर, विपक्ष की सरकारों, बहुमत की अनदेखी करके अपनी सरकार बना ली तो भी लोगो ने तुम्हारे और मोटा भाई के राजनैतिक कौशल की तारीफ की। तुमने मन की बात के जरिये राजनीति में सुचिता की बात की लोगों ने इसे भी सच मान लिया। बहुमत हो ना हो तुम सरकार बनाओ ये नये किस्म की डेमोक्रेसी है, लोगो ने जयघोष के साथ इसे भी स्वीकार कर लिया। तुम्हारी बात मानकर लोगों ने कोरोना से लडऩे के लिए घर से बाहर निकलकर ताली-थाली बजाई, दीये जलाएं। तुम्हारे भक्तों के कहने पर तबलीगी जमात सहित सारे मुसलमानो को कोरोना बम बताकर उनके खिलाफ नफरत फैलाई गई। संविधान में प्रदत नागरिक अधिकारों की अनदेखी कर लोगो के बीच भेदभाव किया गया, लव जिहाद के नाम पर कानून बनाए गये। रोमियो स्काट बनाकर मासूम प्रेम करने वालों को जेल भिजवाया और खुश हुए की भारतीय संस्कृति की रक्षा हो गई।

धर्म निरपेक्ष देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आप अपने आपको संविधान का सबसे बड़ा रक्षक बताते नहीं थकते। परन्तु वे 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में चुनावी अभियान शुरूआत मतुआ संप्रदाय के 100 साल पुराने मठ में बोरो मां का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 1.84 करोड़ है, और इसमें 50 फीसदी मतुआ संप्रदाय के लोग हैं। आपकी लीला अपरमपार है और जो कहते हैं उसके ठीक उल्टा करते है। गॉंधीजी पता नहीं क्यों कहते थे, आपका आचरण ही आपका जीवन है।
राममंदिर विवाद खत्म कर देश में शांति बहाली की बात करके आपने अपने चेलो को मथुरा-काशी के एजेंडे पर लगवा देते हो। देश की जनता को कोविड-वोविड से क्या मतलब उन्हे तो मथुरा-काशी चाहिए। अब उखाड़ो गड़े मुर्दे, निकालो यात्राएं।

हरिद्वार में कोविड संक्रमण के बावजूद चल रहे महाकुंभ को लेकर तुम्हारी पार्टी के उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत कहते हैं की हरिद्वार के कुंभ को मरकज़ से जोडऩा नहीं चाहिए, क्योंकि मरकज एक कोठी की तरह की बंद जगह में हुआ था, जबकि कुंभ का क्षेत्र बहुत बड़ा, खुला हुआ और विशाल है। सबसे महत्वपूर्ण है कि कुंभ गंगा नदी के किनारे है। मां गंगा का आशीर्वाद यहां बह रहा है, इसलिए यहां कोरोना नहीं होना चाहिए। जब बड़े पैमाने पर यहां साधु-संत संक्रमति होने लगे तो दो गज दूरी और मास्क है जरूरी सीख की जब खुले आम धज्जियां उडऩे लगी तब लोकलाज के डर से आपने संत समाज से हरिद्वार में चल रहे कुंभ को 'प्रतीकात्मकÓ रखने की अपील की। आप तो विश्व नेता हैं, आपको अपना विजन बड़ा रखकर दुनिया की मदद करनी है। कोरोना की इस महामारी के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ी जा सके। इसके लिए आपने जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि से फोन पर बात की। ये बातचीत थोड़ी जल्दी हो गई अभी तो बंगाल में तीन चरण का चुनाव बाकी है।

21 मार्च को जब कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच कई राष्ट्रीय अखबारों में आपकी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की ओर से कुंभ आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए उन्हें बताया गया था कि इसमें शामिल होना 'स्वच्छÓ और 'सुरक्षितÓ है। मरकज में मुस्लिम इकठ्ठे हों तो गुनाह, मानव बम। हरिद्वार में श्रध्दालु, साध-संत इकठ्ठे हो तो स्वागत। लोग घर से बाहर बिना मास्क निकले तो फाईन, पुलिस के डंडे और साधु-संतो का स्वागत।

कोरोना संक्रमण से जुझ रहे, लॉकडाउन की वजह से बंद मंदिर-मस्जिद के कारण घर में बैठे लोगों के बदले आपने 26 और 27 मार्च को बांग्लादेश जाकर वहां के ईश्वरीपुर में मां जशोरेश्वरी देवी के मंदिर के दर्शन किये। ये मां काली का मंदिर है और शक्तिपीठ है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में ममता बैनर्जी पर मुस्लिम वोटो के ध्रुवीकरण का आरोप लगाने वाले आप जब ये सब करके हिन्दू वोटो को प्रभावित करें तो कोई सवाल भी ना करे। आपका हर काम, हर वक्तव्य राष्ट्रहित में, आपका जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित और बाकी कोरोना की भेंट।
आकाशवाणी, दूरदर्शन से 3 अक्टूबर 2014 से मन की बात करके आपने अब तक प्रसारित 75 से अधिक एपिसोड के जरिये से गरीबों की समृद्धि, स्वच्छ भारत अभियान, भारत के मंगल मिशन की सफलता, कौशल विकास आदि विषयों पर देश का मार्ग प्रशस्त किया है।

आपकी सारी बातें एकागी या अपने पसंद के लोगों से जो आपके अनुकूल सवाल पूछे, उन्ही से बात होती है। देश के सबसे मुखर समझे जाने वाले आप देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जो खुले संवाद से बचते हैं। आपको सब कुछ अपने अनुकूल चाहिए फिर वो चाहे कपड़े हों या आसपास के लोग।

आपने वादा किया था कि बिगड़ी अर्थव्यवस्था सुधारेंगे और हर साल 1.2 करोड़ नौकरियां पैदा करेंगे। लोग कोविड में बेरोजगार होकर अपनी नौकरी सहित उन नौकरियों को ढूंढ रहे हैं जिसका वादा आपने किया था। जीडीपी की दर चार दशकों में पहली बार इतनी गिरी है। आपने तो कहा था कि वो 2024 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी बना देंगे लोग पूछ रहे हैं कहां गये वो वादे।

पूरा देश कोरोना की चपेट में है। ये बात चुनाव आयोग और उसको हुक्म देने वाले उसके आका शायद नहीं जानते। यही वजह है की बढ़ते कोरोना संकट को देखते हुए एक साथ बचे चुनाव कराने की मांग को आयोग ने खारिज कर दिया। उसका बस चले तो वो खुद ही ईवीएम में अपनी मर्जी से वोट डाल आये। चुनाव आयोग भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय के अधीन आता है, लेकिन देश के संविधान ने उसे एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था का दर्जा दिया है। चुनाव की तारीख तय करने से लेकर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का जिम्मा चुनाव आयोग का होता है और इस काम में सरकार या कोई भी मंत्रालय उसे सलाह या निर्देश नहीं दे सकता है। लेकिन आपकी सरकार ने यह संवैधानिक व्यवस्था और परंपरा को उसी तरह नष्ट किया है जैसी बाकी स्वायत्त और निष्पक्ष समझी जाने वाली संस्थाओं को। हाल ही चार राज्यों में संपन्न हो चुके और पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनाव में भी चुनाव आयोग ने सरकार के इशारे पर काम किया है और अभी भी कर रहा है। उसे भी साधु-संतो की तरह मोदीजी से अपील की उम्मीद है। मोदी है तो मुमकीन है।