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मंडीः बारीक की बारी कब, गहरे तक हैं गतिरोध की जड़ें

मंडीः बारीक की बारी कब, गहरे तक हैं गतिरोध की जड़ें

राजकुमार मल

भाटापारा, 29 मई। चार दिन से चला आ रहा गतिरोध खत्म हुआ। शनिवार की सुबह कृषि उपज मंडी की बेपटरी हो चुकी व्यवस्था पटरी पर लौटती दिखाई दी, लेकिन कृषि उपज लेकर आ रही वाहनों को आज भी सुबह 9 बजे तक प्रवेश की अनुमति नही मिली। क्यों? किसकी अनुमति नही थी,जैसे सवाल मंडराते रहे क्योंकि जवाब नही मिलना था।

कृषि उपज मंडी की परेशानी अभी भी समूल दूर नहीं हुई है। क्योंकि समझाइश और नोटिसों का दौर अभी भी चल रहा है। राहत बस इतनी ही है कि पांच जिले से उपज लेकर आए किसानों  को, चार दिन बाद प्रांगण में जगह मिली। चार दिन का समय गंवा चुके किसान, यह जानना चाह रहे हैं कि समय की बर्बादी के लिए किसे जिम्मेदार माना जाए ? अर्थ और समय दोनों का नुकसान उठा चुके किसानों को सवाल के जवाब के लिए फिलहाल इंतजार ही करना होगा।


अब यह चुनौती

गतिरोध भले ही खत्म हो चुका है लेकिन कुछ ऐसी बातें भी हैं जिनका समाधान, समय रहते नहीं निकाला गया तो आने वाले दिन गंभीर हो सकते हैं। आवक के दिन ही नीलामी और तौलाई जैसी व्यवस्था चुस्त बनानी होगी ताकि किसान उसी दिन अपने गांव वापस लौट सकें। प्रयास होंगे, इसके लिए  केवल उम्मीद ही की जा सकती है।

कोना- कोना पैक

दो दिन का अवकाश । बाद के दिन की आवक के बाद मंडी का कोना- कोना पैक हो चुका है। कटाई के बाद केवल आवाजाही के रास्ते ही खुले हुए हैं ।उपज लेकर आने वाली गाड़ियों की आवाजाही  ही चल  रही है। शनिवार की सुबह जो गाड़ियां आई उन्हें प्रवेश की अनुमति दोपहर बाद ही मिलने की संभावना है। जबकि नियम यह है कि आपात स्थिति में ही इसे बंद किया जाना है। फिलहाल ऐसी स्थिति है नहीं।

बारीक की बारी कब

दलहन- तिलहन को पूरे 45 दिन इंतजार करना पड़ा। अब बारी है, धान की बारीक किस्म की। जिसे जगह नहीं मिल रही है क्योंकि इसके लिए ना व्यवस्था बनाई गई , ना प्रयास किए जा रहे हैं। लिहाजा यही कहा जा सकता है कि इंतजार के दिन लंबे हो सकते हैं।