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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कल से - न्याय अन्याय की लड़ाई और किसान

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कल से - न्याय अन्याय की लड़ाई और किसान

-सुभाष मिश्र

पिछले दस माह से किसान दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं लेकिन केन्द्र सरकार की संवेदनहीनता और हठधर्मिता के मारे उनकी मांगों को अनसुना कर रही है। लोकतंत्र में ऐसी जिद का अर्थ साफ है-जनता के असंतोष की अनदेखी करना। किसानों की तकलीफ न सुनना लोकतंत्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है। केन्द्र सरकार के रवैये से साफ है कि गंभीरता के साथ किसानों की समस्याओं को समझने की बजाय उनके साथ वार्ता का स्वांग किया गया।

दूसरी ओर राहत की बात है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के प्रति हमदर्दी दिखाई और 2018 में सत्ता पर आते ही उनकी समस्याओं को समझते हुए सबसे पहले उनकी उपज का उचित समर्थन मूल्य तय किये गये और पिछले  तीन सालों से उसे लागू भी किया। स्व. राजीव गांधी की जन्मतिथि पर बीस अगस्त से छत्तीसगढ़ सरकार राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना प्रारंभ करने जा रही है। छत्तीसगढ़ के दस लाख से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार को 6 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। छत्तीसगढ़ की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि मजदूरी पर आश्रित है। धान की एक फसली उपज के चलते ऐसे लोगों को 6-7 महिने दीगर मजदूरी करनी पड़ती है। कोरोना संक्रमण के चलते यहां वहां शहरों में कमाने खाने गये मजदूर अपने घर गांव लौट आये हैं। ऐसे लोगों को पिछले साल मनरेगा और आजीविका मिशन के जरिए काम उपलब्ध कराया गया। सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने बहुत से उपाय किये। भूपेश बघेल सरकार ने अपने गठन के साथ ही किसानों की ऋण माफी की। किसानों की धान उपज को खरीदने के लिए 2500 रुपए क्विंटल का मूल्य तय करके राजीव गांधी न्याय योजना के जरिए 22 लाख से अधिक किसानों को चार किश्तों में भुगतान किया। इस साल की पहली फसल पर पहला भुगतान राजीव गांधी की जयंती पर जारी किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ जहां अपने किसान हितैषी निर्णयों के जरिए किसानों को राहत देने में लगी हुई है। वहीं दूसरी ओर पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों के किसान बड़ी संख्या में पिछले दस माह से आंदोलनरत है। मोदी सरकार ने किसानों को लाभ के नाम पर कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए 14 सितंबर 2020 को तीन अध्यादेशों को बदलने के लिए जिन विधेयक को पास करवाया है उनमें पहला कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 दूसरा कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 और तीसरा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कृषि बिल को किसानों को नये अधिकार देने वाला बताते हुए कहा कि यह बदलाव किसान और कृषि उपज मंडियों के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश के उन ताकतवर गिरोह से किसानों को छुटकारा दिलाने के लिए है, जो अब तक उनकी मजबूरी का फायदा उठाते रहे हैं।
सरकार द्वारा पारित कृषि बिल में मंडियों को खत्म करने की बात कहीं पर भी नहीं लिखी है, लेकिन इसका इंपैक्ट मंडियों को तबाह कर सकता है। इसका अंदाजा लगाकर किसान डरा हुआ है। इसलिए आढ़तियों को भी डर सता रहा है। इस मसले पर भी किसान और आढ़ती एक साथ है। उनका मानना है कि मंडियां बचेंगी तभी तो किसान उसमें एमएसपी पर अपनी उपज बेच पाएगा।

छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार किसान हितैषी सरकार के रूप में जानी जाती है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के नारे के साथ किसानों का हित सर्वोपरि रख जन घोषणा पत्र में बहुत सी घोषणाएं की जिनमें कृषि ऋण की माफी 2500 रूपए क्विंटल में धान की खरीदी, सिंचाई कर माफ करना आदि शमिल हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ फसल के लिए 7.65 लाख किसानों को  2 हजार 721 करोड़ रूपए का ब्याज मुक्त कृषि ऋण दिया है। पिछले वर्ष हरेली से गोधन न्याय योजना में शुरुआत की गई। देश में गोबर खरीदने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य बना। यहां 2400 गोठानों में 400 करोड़ की लागत से वर्मी कम्पोस्ट बनाने की शुरुआत की गई। आज गांव-गांव में गोठान दिखाई देने लगे हैं।

छत्तीसगढ़ में 37.46 लाख किसान हैं जिनमें 80 फीसदी से अधिक छोटे किसान हैं और राज्य की 46.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा असिंचित है। भारत में रुरल बैंकिंग की रेगुलेटरी एजेंसी नाबार्ड की तरफ से साल 2016-17 में कराए गए सर्वे में पाया गया था कि किसान परिवारों के हर महीने औसतन आमदनी 8931 रुपए है और इसका तकरीबन 50 फीसदी हिस्सा मजदूरी और सरकार या किसी और का कुछ काम करके आता। लॉकडाउन के कारण किसानों की आमदनी का ये हिस्सा बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। भारत में लगभग 80 प्रतिशत किसान सीमांत या छोटे किसान श्रेणी के हैं।

सीएम भूपेश बघेल ने बजट के दौरान भूमिहीन किसानों के लिए किसान न्याय योजना की घोषणा की थी। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 22 लाख किसानों को कृषि इनपुट सहायता की पहली किश्त के 1500 करोड़ रुपए किसानों के खाते में डाले गए। इसके साथ ही गोधन न्याय योजना के तहत 15 मार्च से 15 मई तक पशुपालकों से गोबर खरीदी की राशि 7 करोड़ 17 लाख रुपए और गौठान समितियों व महिला स्व-सहायता समूहों को 3 करोड़ 6 लाख रुपए भी ऑनलाइन ट्रांसफर किया गया। छत्तीसगढ़ सरकार ने धान उत्पादक किसानों को बोनस बंद होने के बाद राज्य सरकार ने 21 मई 2020 को राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर किसान न्याय योजना शुरु की थी। इस योजना के तहत खरीफ सीजन 2019-20 में पंजीकृत लगभग 19 लाख किसानों को कृषि आदान सहायता के रुप में 5 हजार 628 करोड़ रुपए की सहायता राशि दी गई थी। अभी तक छत्तीसगढ़ में गोबर विक्रेताओं को गोधन न्याय योजना के तहत पशु पालको को भुगतान की 25वीं किश्त दी जा चुकी है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के तहत खाली पड़े खेतों में पेड़ लगाने पर किसानों को दस हजार रुपए हर साल दिए जाएंगे। अब इस योजना को राज्य की राजीव गांधी किसान न्याय योजना के साथ भी जोड़ दिया गया है। योजना के अंतर्गत जिन किसानों ने 2020 में खरीफ वर्ष में धान की फसल ली है और अब अगर वह धान की फसल के बदले अपने खेतों में वृक्षारोपण करते हैं तो उन्हें अगले तीन साल तक सरकार की तरफ से 10 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

यह सारी बातों का लेखा-जोखा देने के पीछे मंशा यह है कि किसान और खेतीहर मजदूरों के लिए जो कुछ संभव हो, वह सरकार को करना चाहिए। हमारे गांव हमारी आर्थिक अर्थव्यवस्था की धुरी है। यदि किसान समृद्घ और सुखी नहीं होगा तो देश के अन्न-जल की चिंता कौन करेगा। केन्द्र सरकार को किसानो की मांगों पर अविलंब निर्णय लेकर अपनी जिद छोडऩी चाहिए वहीं किसान नेताओं को भी आंदोलन का सकारात्मक हल खोजने की दिशा में सोचना चाहिए।