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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -ठकुर सुहाती सबको भाती

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -ठकुर सुहाती सबको भाती

-सुभाष मिश्र
जो तुमको हो पसंद वहीं बात कहेंगे, तुम दिन को यदि रात कहो रात कहेंगे। सत्ता मीडिया में ऐसा ही कुछ सुनना चाहती है। बहुत सारा मीडिया जिसके लिए आज तक गोदी मीडिया शब्द चलन में है, वह कहता भी है जैसा जी चाहो बजाओ इस सभा में, हम नहीं है आदमी, हम झुन-झुने है। जब देश में मातमी धुन बजना चाहिए तब बहुत से लोग राग जयजय वंती गाने में लगे है। जिस सोशल मीडिया प्लेटफार्म का उपयोग भाजपा ने अपने एजेंडे को जन एजेंडा बनाने में किया वही सोशल मीडिया आजकल उसकी आंखों की किरकिरी बना हुआ है। ट्विटर से टूलकिट विवाद से पहले केंद्र सकार ट्विटर से बहुत से पोस्ट हटाने को कह चुकी है। ट्विटर कहता है कि हमारे मंच से बिना किसी डर के खुलकर लोग अपनी बात कह सके, हम इसके लिए प्रतिबद्ध है। ट्विटर ऐसे वीडियो, आडियो, फोटो और सामग्री को मेनिपुलेटेड मीडिया के रूप में चिन्हित कर टैग करता है जिसके साथ छेडख़ानी गई हो जिसके तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया है। इस बार संबित पात्रा द्वारा टैग की गई सामग्री है जिसे मैनिपुलेटे किया गया है जिसके सबूत ट्विटर के अनुसार उसके पास है।

भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय द्वारा गजट नोटिफिकेशन के जरिये एक अधिसूचना जारी कर सोशल मीडिया प्लेटफार्म के संचालन हेतु नियम कानून बनाए गए थे, जिन्हें तीन माह यानी 25 मई तक लागू करना था। अधिकांश सोशल मीडिया प्लेटफार्म जिसमें वाट्सअप, यूट्यूब, फेसबुक, इंस्ट्राग्राम और ट्विटर शामिल है, अभी तक जारी नियमों की शर्तों का पालन नहीं किया है। सरकार ने आज चिठ्ठी जारी कर सभी से तुंरत जानकारी मांगी है। सरकारी नियमों के अनुसार आपत्तिजनक सामग्री को 36 घंटे के भीतर हटाना होगा। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर की जाने वाली पोस्ट को लेकर होने वाली शिकायतों के निराकरण करने सक्षम अधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी। जब चारों ओर डिजीटाईजेशन का बोलबाबा है, लोग ज्यादा से ज्यादा डिजिटल प्लेटफार्म की ओर जा रहे हैं। ऐसे में सूचना संवाद, मनोरंजन, अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम बना ऐसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म चलाने वाली विदेशी कंपनियों को भारतीय कानून के पालन हेतु कहा जा रहा है। इस प्लेट फार्म के जरिए बहुत से लोग ऐसी-ऐसी जानकारी, टिप्पणी शेयर कर रहे हैं जो आपत्तिजनक है। किसी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की गरिमा को प्रभावित करने वाले हैं। विदेशों से संचालित होने वाली बहुत सी कंपनियों ने निजता संबंधी अधिकारों का उल्लंघन कर हमारे देश के नागरिकों का बहुत सा डाटा शेयर किया है। ये कंपनियों यूरोपियन देशों के मामले और हमारे देश के जनता संबंधी मामले में दोहरी नीति और मापदंड अपनाती है, ऐसे आरोप इन पर लगातार लगते रहे हैं। वर्तमान में हमारे देश में 53 करोड़ लोग व्हाट्सअप, 41 करोड़ लोग फेसबुक, 21 करोड़ लोग इस्ट्राग्राम, पौने दो करोड़ लोग ट्विटर तथा करीब 45 करोड़ लोग यूट्यूब से जुड़े हैं।

सरकारी अधिसूचना के माध्यम से जारी नियमों और शर्तों को फेसबुक ने मानने की सहमति दी है किन्तु अभी उसे भी अपने कुछ संदेहों को दूर करना है।
सोशल मीडिया ने निस्संदेह एक वैश्विक लोकतांत्रिक स्पेस संभव किया है जिसमें विचारों की सुगम अभिव्यक्ति की जा सकती है। लेकिन मीडिया कम्पनियों के व्यावसायिक हित और विभिन्न देशों के राष्ट्रीय हित भी संवाद की इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदार होते हैं। ऐसी स्थिति में दोनों के बीच टकराव की नौबत आती है। भारत में मीडिया कम्पनियों ने सोशल मीडिया में सूचना पर नियंत्रण के लिए 26 जून से नई नियमावली लागू की है। उन्होंने उपभोक्ताओं को सहमति या असहमति का विकल्प देकर व्यावसायिक सूचनाओं को साझा करने की नीति का ऐलान किया है और आश्वासन दिया है कि उपभोक्ताओं की निजी सूचनाएं इससे अप्रभावित रहेंगी।

दूसरी तरफ़ केंद्र सरकार उन सूचनाओं से आहत है जो कोरोना प्रबंधन में उसकी कथित अक्षमता और निष्क्रियता पर सवाल उठाती हैं। ऐसी सूचनाओं पर नियंत्रण के लिये सरकार मीडिया कम्पनी को ही नियंत्रण के दायरे में खींच लाना चाहती है। ट्विटर के साथ सरकार के टकराव को इस संदर्भ में ही देखना चाहिए।
भाजपा का आरोप है कि ट्विटर के माध्यम से कोरोना संकट में कांग्रेस सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बिगाडऩे का काम कर रही है। 18 मई को बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा की तरह से एक स्क्रीन शाट शेयर करते हुए कांग्रेस पर गंभीर सवाल उठाए। बीजेपी नेता की ओर से कहा गया कि कांग्रेस टूलकिट के जरिये कोरोना मैनेजमेंट को लेक पीएम मोदी की छवि को धूमिल करना चाहती है। कांग्रेस ने तुरंत इसका विरोध करते हुए इसी फर्जी बताया था। टूलकिट मामला सुर्खियों में ही था कि ट्विटर की तरफ से संबित पात्रा के ट्विट पर मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग लगा दिया। केंद्र सराकर की तरह से ट्विटर को इस तरह की टैगिंग हटाने की हिदायत दी गई। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ट ने कथित कोविड टूलकिट मामले की जांच के संबंध में ट्विटर इंडिया को नोटिस भेजा और दो उसकी टीमें दिल्ली और गुडग़ांव स्थित माइक्रोब्लागिंग साइट के दफ्तर पहुंची।

दरअसल जन सामान्य तक सोशल मीडिया की पहुंच बढऩे के साथ उसकी ताकत भी तेजी से बढ़ रही है। दुनिया भर में शासक वर्ग उसे नियंत्रित करने, उससे साँठगाँठ करने या उस पर कब्ज़ा करने का प्रयत्न करती हैं। भारत में शासक दल के हितों को राष्ट्रीय हित मान लिया गया है। नतीजतन सरकार की नाकामी को रेखांकित करने का मतलब हो गया है, देश को बदनाम करना। कांग्रेस के कथित टूलकिट को प्रधानमंत्री को बदनाम करने की साजिश करार देने का प्रच्छन्न अर्थ है कि वह देश को बदनाम करने की नीयत से सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार कर रही है।  

सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने वैसा नहीं किया जैसा सरकार चाहती है तो हो सकता है कि उन्हें भी अमेरिका के फ्लोरिडा प्रांत के गवर्नर टॉन डीसेटस के द्वारा जारी आदेश को ही भांति फाईन किया जाए और देश के नागरिकों को ऐसी कंपनियों से सुरक्षा देने के नाम पर उन पर नियंत्रण भी करें।
मीडिया, सत्ता और प्रतिपक्ष के बीच यह खींचतान आगे क्या रूप लेगी, कहना मुश्किल है। लेकिन यह तो तय है कि यह खेल चलता रहेगा।