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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से- मुझे तुम याद करना और मुझको याद आना तुम

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से- मुझे तुम याद करना और मुझको याद आना तुम


कोरोना की तीसरी लहर की वापसी के साथ ही सुपरहिट फिल्म मशाल का गाना जिसे किशोर कुमार, लता मंगेश्कर ने गाया है और अनिल कपूर रति अग्निहोत्री पर फिल्माया गया है। 'मुझे तुम याद करना और मुझको याद आना तुम 'मैं एक दिन लौट के आऊंगा, ये मत भूल जाना तुम। याद आ रहा है।

देश-दुनिया के लोगों धीरे-धीरे कोरोना वायरस को भूलकर अपनी सामान्य दिनचर्या में बिना मास्क और बिना दो गज दूरी का ध्यान रखे लौट रहे थे। अचानक ठंड के साथ कोरोना की तीसरी लहर ने एक बार फिर कहर बनकर अपना वैश्विक महामारी के रूप दिखाना शुरू कर दिया। अभी तक दुनिया के बहुत सारे देशों में फिर से एक बार लॉकडाउन हो गया है। हमारे अपने देश की राजधानी दिल्ली को कोर्ट ने देश की कोरोना कैपिटल का नाम देकर सरकार को फटकार लगाई है। 

बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते यूरोप के कई देश फिर से लॉकडाउन लगा रहे हैं। पहले फ्रांस ने लॉकडाउन के एलान कर 1 दिसंबर तक लॉकडाउन कर दिया है। अब इंग्लैंड ने दोबारा लॉकडाउन का फैसला लिया है। इस बीच दुनिया में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 4,90,35,146 हो गई है। इस वायरस के चलते अब तक 12,39,665 लोगों की मौत हो चुकी हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कोरोना के खतरे को देखते हुए देश में 5 नवंबर से लॉकडाउन लगा दिया है। वहां 4 हफ्ते के लिए लॉकडाउन लगाया गया है। इसके तहत पब, रेस्तरां, गैर जरूरी दुकानें और दूसरी सुविधाओं पर रोक रहेगी। इस बीच, दुनियाभर में अब तक इस बीमारी से 3,49,84,524 लोग ठीक हो चुके हैं। अमेरिका में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 99,26330 हो गई है, जबकि वहां 2,41,026 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। भारत संक्रमित लोगों की संख्या के लिहाज से दूसरे नंबर पर हैं।

हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दी गई नसीहत को पहले तो लोगों ने गंभीरता से लिया। उन्होंने जो-जो कहा वह-वह किया। किन्तु अब धीरे-धीरे उनकी मन की बात को लोग अनसुना करने लगे हैं। यही वजह है कि जान है तो जहान है के नारे को भूल कर लोग उत्सवधर्मिता पर उतर आयें हैं और इसका सबसे पहला शिकार दिलवालों की दिल्ली हुई है।

हमारे देश की राजधानी दिल्ली कोरोना की तीसरी लहर से सर्वाधिक प्रभावित है। वैश्विक महामारी कोविड-19 की 128 दिन बाद आई इस तीसरी लहर में कोरोना वायरस से एक दिन में 27 जून को सबसे अधिक 66 मरीजों की मौत हुई है। कोरोना महामारी अब तक दिल्ली में 6769 मरीजों की जान ले चुकी है। दिल्ली में कोरोना से मौत के मामलों का 4 महीने का रिकॉर्ड टूटा है। दिल्ली में लगातार तीसरे दिन कोरोना के छह हजार से ज्यादा नए केस सामने आए हैं। दिल्ली में कोरोना के कुल 4,16,653 केस हो गए हैं।

दिल्ली सरकार का मानना है कि त्योहारों की वजह से बाजारों में भीड़-भाड़ बढऩे से कोरोना वायरस के मामले बढ़े हैं। दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय किया गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चिकित्सा सुविधाओं को और मजबूत किया जा रहा है। इनमें सरकारी अस्पतालों में आक्सीजन और आईसीयू बिस्तरों की संख्या बढ़ाई जा रही है।

पूरे देश में कोरोना संक्रमण की इस 10 महीने के अधिक के अवधि में यह सीख नहीं ली है कि स्वास्थ्य सेवाएं सबसे जरूरी हैं। लॉकडाउन के दौरान जब सरकार को दस महीनों में बहुत सारी स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करने थी, तब होटल, धर्मशाला, सामुदायिक भवन के जरिये काम चलाया गया। सभी यह मान कर चल रहे थे कि कोरोना थोड़े दिनों का है, लोगों ने कोरोना भगाने के लिए न जाने कौन-कौन से अनुष्ठान किये। ताली, थाली बजाने वाले, दीया जलाने वाले देश के लोगों ने अस्पताल की व्यवस्था को लेकर उतनी गंभीरता नहीं दिखाई जो जरूरी थी। सब तरफ ठोस व्यवस्था के बदले दिखावा और तत्कालिक उपाय ज्यादा होते रहें।

दिल्ली में कोरोना का संक्रमण दोबारा बढऩे से आईसीयू बेड की कमी हो गई है। केन्द्र सरकार के एक अस्पताल और 39 प्राइवेट अस्पतालों में वेटिंलेटर की सुविधा वाले आईसीयू बेड खाली नहीं बचे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले फिर से तेजी से बढऩे लगे हैं। दिल्ली के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित प्राइवेट अस्पतालों में आईसीयू बेड 100 फीसदी भरे हैं। उधर सरकारी अस्पतालों में भी आईसीयू वाले बेड की संख्या कुछ ही बची है। 

जब देश में कोरोना की दस्तक हुई और जब उसकी रफ्तार बढऩे लगी तो सरकार ने पूरे देश में लॉकडाऊन लागू किया। तीन महिने तक लॉकडाऊन के बाद मोदी सरकार ने अनलॉक-1 को लेकर देश में सभी चीजों को चरणबद्ध तरीके से खोलने की प्रक्रिया चालू की थी जिसमें कंटेनमेंट जोन्स में 30 जून तक पाबंदियां जारी रखी गई। राज्यो को यह अधिकार दिया गया था की वे अपने मूल्यांकन के मुताबिक पाबंदियां लगा सकते थे। राज्यो ने कलेक्टरों के माध्यम से अपने राज्य की स्थिति देखकर इसे लागू भी किया। कंटेनमेंट जोन में जो चीजें खोली जानी थी, उनके लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (एसओपीएस) जारी किया था।

जनवरी 2020 से देश में दस्तक देने वाले कोरोना वायरस की चपेट से देशवासियों को बचाने के लिए 24 मार्च से पहला लॉकडाउन किया गया। केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी गाइडलाइंस के अनुसार 8 जून से कुछ सेवाओ को खोलने की अनुमति दी गई थी। उसके बाद अनलॉक-2 की गाइडलाइंस के अनुसार 1 जुलाई से लागू की गई। इस दौरान सीमित संख्या में घरेलू उड़ानों और यात्री ट्रेनों की अनुमति दी गई है। वंदे भारत मिशन के तहत सीमित तरीके से यात्रियों की अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा की अनुमति दी गई। नाइट कफ्र्यू रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक रखा गया। 

15 जुलाई से केंद्र और राज्य सरकारों के ट्रेनिंग इंस्टट्यूट में कामकाज शुरू करने की अनुमति दी गई थी। सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए चरणबद्ध तरीके से अनलॉक-4 के जरिये हिदायतों के साथ ऐसी दूरी दी थी जिससे कोरोना का संक्रमण न फैले।

सरकार द्वारा 21 सितम्बर से शादी समारोह व अंतिम संस्कार में अधिकतम 100 लोग शामिल होने की अनुमति दी गई। इसके साथ ही 100 लोग राजनीतिक, सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजन में शामिल होने की अनुमति भी दी गई। ओपन एयर थिएटर को 21 सितम्बर से खोले जाने की अनुमति दी गई है। अनलॉक पांच के जरिये सिनेमा, थिएटर, मल्टीप्लेक्स को उनकी बैठने की क्षमता के 50 फीसदी तक के लिए खोलने की अनुमति दी गई। 

अनलॉक-6 के अंतर्गत शादियों में 200 मेहमान के लिए, केरल में समुद्री तट खोलने, मुंबई ट्रेने और बाकी ट्रेने खोलने, गोवा के कैसिनो खोलने तथा पर्यटन की अनुमति दी गई। केंद्र और राज्य सरकारों ने नागरिकों को अलग-अलग अवसरों पर आवश्यक हिदायतें जारी की गई। किन्तु धीरे-धीरे नागरिकों ने अपनी उकताहट को दूर करने या काम के नाम पर वैसे ऐहतियात नहीं बरतें जिसकी अपेक्षा की गई। तीज-त्यौहार के मौके पर बाजारों, मॉल में नागरिक की भीड़ ने ऐसा मान लिया था कि कोरोना अब चला गया है। अभी तक पूरी दुनिया में कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं बनी किन्तु इसे बांटने का प्रोग्राम जरूर बन गया। मोदीजी अभी भी कह रहे हैं की 'जब तक दवाई नहीं तब तक ढिलाई नहीं।

कोविड-19 यानी कोरोना वायरस से फैलने वाली महामारी का प्रकोप पिछले महीनों से दुनिया भर में आतंक मचाए हुए हैं। भारत में इस रोग की चपेट में आने वालों की तादात एक लाख तक पहुंचने में 110 दिन का समय लगा था, लेकिन उसके बाद गति बढ़ती चली गई और देश में एक लाख नए केस सिर्फ एक-दो दिन में जुडऩे लगे। भारत को 84 लाख पुष्ट कोविड-19 मामलों का आंकड़ा पार करने में कुल 281 दिन लगे हैं।

कोरोना एक बार फिर अपने पांव पसार रहा है और हमारी तैयारी अभी भी पहले लॉकडाऊन के समय जैसी ही है। प्रायवेट अस्पताल, होटल फिर एक बार कोविड-19 के अस्पताल बनने तैयार है।