II पिक्चर अभी बाकी है दोस्त : कोरोना' से जंग जीतने की स्थिति में छत्तीसगढ़, लेकिन खतरा अभी टला नही है! प्रधान संपादक सुभाष मिश्र का परिणात्मक विश्लेषण

II पिक्चर अभी बाकी है दोस्त : कोरोना' से जंग जीतने की स्थिति में छत्तीसगढ़, लेकिन खतरा अभी टला नही है! प्रधान संपादक सुभाष मिश्र का परिणात्मक विश्लेषण
  • सुभाष मिश्र

कोरोना संक्रमण से निपटने के लिये आज पूरे देश में छत्तीसगढ़ की प्रशंसा हो रही है। संक्रमित पाये गये दस में से 9 मरीज स्वस्थ होकर सकुशल अपने-अपने कर लौट गये हैं। एक जो भर्ती है, वह भी जल्दी ही अपने घर चला जायेगा। छत्तीसगढ़ कोरोना मुक्त हो जायेगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चाहें तो इस उपलब्धि पर अपना सीना 56 इंच चौड़ा करके घूम सकते हैं पर वे ऐसा नही करेंगे क्योंकि वे जमीनी हंकीकत से वाकिफ हैं और वे परिणाम देने में विश्वास करते हैं। जो लोग कोरोना वायरस की गंभीरता नही समझते, वे अतिरेक में छत्तीसगढ़ के 'कोरोना—फ्री' जोन होने की सूचना के वायरल होते ही पहले की तरह बेखौफ सड़कों पर आकर सोशल डिस्टेसिंग की धज्जियां उड़ाने लगेंगे। लॉकडाउन के समय भी सरकार की जरा सी छूट पर बहुत से लोग बेवजह सड़क पर निकल आये थे जिन्हें 48 घंटे के अघोषित कर्फू से नियंत्रित किया गया। नागरिक कर्तव्यों से अनभिज्ञ बहुत से लोग जल्दी ही किसी भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं। फिर चाहे ये भीड़ किसी तमाशों की ही क्यों ना हो!

बहुत सारे चिकित्सक साथियों से कोरोना के मौजूदा हालात पर बातचीत की तो उन्हें कहा कोरोना का लाकडाउन लगा रहने दिया जाना चाहिए। डब्ल्यूएचओ की सलाह के अनुसार इस 90 दिन में चरणबद्ध ढंग से हटाना उचित होगा। लोगों को बेफिक्र नहीं होना चाहिए। आने वाले महिनों में यह कुछ क्लस्टर में यह कोरोना संक्रमण उठ सकता है। फिलहाल तो कोरोना के उपचार में लगे चिकित्सकों और सहयोगियों को जरूरी सुविधाएं देनी होगी ताकि वे संक्रमित ना हों। डाक्टरों के पास पीपीई पर्सनल प्रोटेक्शन इंक्वीपमेंट की कमी है। पीपीई को एक डाक्टर को दस घंटे में बदल देना चाहिए, वो उसका उपयोग 24-24 घंटे कर रहा है। अस्पतालों में सेनेटाइजर, मास्क की सप्लाई भी बहुत कम है। वेंटिलेटर, आईसीयू की व्यवस्था की मुंबई जैसी आपात स्थिति के लिये नहीं के बराबर है। अभी पूरे छत्तीसगढ़ में 450 वेंटिलेटर ही है। सरकार को चाहिए कि चिकित्सकों का भी ध्यान रखें अगर चिकित्सक ही वायरस के संक्रमण में आ जाएंगे तो फिर इलाज कैसे होगा!

रायपुर के एक प्रतिष्ठित चिकित्सक ने बातचीत में बताया कि कोविड-19 के मरीज की संख्या भले ही कम हो गई हो, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। ऐसा संभावित है कि सरकार फिर से लॉकडाउन लगा दे, यदि नहीं लगाती है तो भी राज्य सरकार को बाहरी राज्यों से आने वालों पर पाबंदी लगाना चाहिए, बाहरी बार्डर को नहीं खोलना चाहिए। अगर सरकार बाहरी लोगों को आने देती है तो स्थिति बिगड़ सकती है। छत्तीसगढ़ में 70 हजार के करीब कोरोना संक्रमण के संदिग्ध लोग होम क्वारंटाइन में रखे गए हैं. कोविड़-19 का 15 दिन का तो लैटिन पीरियड़ होता है। ये एक लंबी लड़ाई है जिसमें एक-दो साल तक इस प्रकार की छिटपुट मामले आते ही रहेंगे। वायरस पूरी तरह से खत्म नहीं होगा। कोरोना सुरक्षा के तहत सरकार को बेसिक सेनेटाइजेशन से शुरुआत करनी चाहिए। लोगों को इसके लिए जागरुक होना होगा। एक कुशल चिकित्सक, नर्स, वेटिंलेटर आदि नहीं होने से आने वाले दिनों में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।