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मकर संक्रांति को कुंभ का पहला स्नान, जानें महत्व

मकर संक्रांति को कुंभ का पहला स्नान, जानें महत्व

श्रध्दालुओं के लिए कुंभ मेले का इंतजार समाप्त होने जा रहा है। इस बार कुंभ मेला हरिद्वार में आयोजित किया जाना है। हरिद्वार में इस बार कुंभ 12 वर्ष बाद नहीं बल्कि 11 वर्ष बाद लग रहा है। ज्योतिष गणना के आधार पर कुंभ का आयोजनकिया जाता है।

लेकिन वर्ष 2022 में बृहस्पति ग्रह कुंभ राशि में नहीं होंगे। यही वजह है कि 11वें साल में कुंभ का आयोजन किया जा रहा है। 14 जनवरी 2021 से कुंभ मेले का आयोजन किया जाना है। पंचांग के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व है। इस दिन पौष मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा।

मेले के प्रमुख स्नान

कुंभ मेले में इस बार 6 प्रमुख स्नान पड़ने वाले हैं। पहला स्नान मकर संक्रांति को हैं। इसके बाद दूसरा स्नान 11 फरवरी को मौनी अमावस्या की तिथि पर पड़ेगा। इसके बाद तीसरा स्नान 16 फरवरी को बसंत पंचमी के पर्व पर होगा। चौथा स्नान 27 फरवरी को माघ पूर्णिमा की तिथि पर होगा। पांचवा स्नान 13 अप्रैल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा इस दिन हिन्दी नववर्ष का आरंभ होगा। छठा प्रमुख स्नान 21 अप्रैल को राम नवमी पर रहेगा।

कब होगा शाही स्नान

कुंभ में शाही स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार कुंभ में कुल 4 शाही स्नान पड़ रहे हैं।

पहला शाही स्नान: 11 मार्च शिवरात्रि

दूसरा शाही स्नान: 12 अप्रैल सोमवती अमावस्या

तीसरा मुख्य शाही स्नान: 14 अप्रैल मेष संक्रांति

चौथा शाही स्नान: 27 अप्रैल बैसाख पूर्णिमा

कुंभ स्नान का महत्व

मान्यताओं के अनुसार कुंभ में स्नान करने से कई प्रकार की बाधाओं से छुटकारा मिलता है। इस बार पहला प्रमुख स्नान मकर संक्रांति के दिन पड़ रहा है। इस दिन 5 ग्रही योग भी बन रहा है जो प्रथम स्नान को और भी अधिक विशेष बना रहा है। इस दिन मकर राशि में सूर्य का प्रवेश होगा। मकर राशि में इस दिन सूर्य के साथ गुरु, शनि, बुध और चंद्रमा भी मौजूद रहेंगे। कुंभ स्नान से शनि की अशुभता और राहु केतु से बनने वाले दोषों से भी निजात मिलती है। कुंभ में स्नान, दान और पूजा से जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है।