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बड़े मियां तो बडे़ मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह..?

बड़े मियां तो बडे़ मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह..?

मालखरौदा, 25 फरवरी। सरकार का मालखरौदा उपतहसील को तहसील का दर्जा दिये जाने का उदेश्य चाहें जितना भी पवित्र एवं कल्याण कारी क्यो न हो पर अनुसूचित जाति पिछडा वर्ग बाहुल्य मालखरौदा तहसील में राजस्व अमला पैसा वसुली में मशगूल है। जी....हाँ.....राजस्व प्रकरणों में राजस्व संहिता की धज्जियां उडा़या जारहा है। 

वर्षों से तहसीलदार  का पद रिक्त होने से प्रभार में काम चलाया जा रहा है  नायब तहसीलदार तहसीलदार के ठाठबाट में  चपरासी  बाबू .... कोटवार.......  रीडर के भरोसे  किसानों का किस्मत लिखा जा रहा है। राजस्व विभाग में दलालों का जलवा है। यहाँ दलालों का ग्रेट है,ABCचाहे पटवारी दफ्तर हो RI   दफ्तर हो या तहसीलदार दफ्तर बिना भेंट पूजा दिये कोई काम नहीं होता है।

क्षेत्र की जनता गरीब विधायक और किसान पुत्र मुख्यमंत्री से बड़ी उम्मीद लिए बैठे थे कम से कम किसानों के मंदिर तहसील में लूट पाट नही होगा पर मालखरौदा तहसील ऐसा तहसील है जहाँ प्रशिक्षु नायब तहसीलदार कानूनों को बला ए ताक में रख कर खुले आम पैसा बटोरने में लगे है। जिसका जीता जागता उदाहरण विभिन्न राजस्व प्रकरणबढ़ रहे  बेजाकब्जा के मामलों में देखा जा सकता है। जिससे यह चर्चा लखनवी अन्दाज में  बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह वाली कहावत मालखरौदा तहसील में फिट बैठता है।