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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -कोरोना का कोहरा छंटेगा या घना होगा

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -कोरोना का कोहरा छंटेगा या घना होगा

-सुभाष मिश्र
कोरोना संक्रमण और उससे उपजी स्थितियां, निर्णय और नीति को लेकर जितना ऊहापोह, भ्रम और घना कोहरा समूचे देश में व्याप्त है, उसे लेकर कोई निश्चित रूप से यह कहने की स्थिति में नहीं है कि इस महामारी का कोहरा घना होगा या छंटेगा। कुछ राज्य 15 जुलाई से शिक्षण संस्थान खोलने, परीक्षा लेने की तैयारी कर रहे हैं तो कुछ जगहों पर लॉकडाउन के हालात हैं। कोरोना की दूसरी लहर में दूध से जले प्रधानमंत्री अब तीसरी लहर की प्रतीक्षा में छाछ भी फूंक-फूंक कर पीना चाहते हैं। वे अपने गिरते लोकप्रियता के ग्राफ और विश्व गुरू बनने की अपनी छवि को जैसे-तैसे मेंटेन रखना चाहते हैं। देश के प्रधानमंत्री आक्सीजन की आपूर्ति बनाये रखने के लिए उच्च स्तरीय बैठक ले रहे हैं। थोड़ी सी आक्सीजन कभी उत्तरप्रदेश सहित अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए भी जरूरी होगी। पंचायत चुनाव में सत्ता के जरिए जुटाई गई आक्सीजन कहीं ब्लेक ऑफ व्हाइट फंगस जैसी साबित न हो जाए।

टीकाकरण अभियान को लेकर बार-बार होने वाले इवेंट के बावजूद देश में अभी भी टीकाकरण कार्यक्रम वह रफ्तार नहीं पकड़ पाया है जिसके दावे किये जा रहे थे। टीकाकरण कार्यक्रम को लेकर सरकार का बड़बोलापन कालांतर में उसे भारी न पड़ जाये इसकी आशंका बनी हुई है।
अभी हमारे देश में केवल 4.6 प्रतिशत आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया गया है, जबकि 20.8 प्रतिशत को एक खुराक मिली है, जो अमेरिका 47.1 प्रतिशत, यूके 48.7 प्रतिशत, इजराइल 59.8 प्रतिशत, स्पेन 38.5 प्रतिशत, फ्रांस 31.2 में अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है। हम आंकड़ों की बाजीगरी और मीडिया की हेडलाईन के जरिए अपने आपको अमेरिका से आगे बताने में लगे हुए हैं।   

दूसरी लहर में आई देशव्यापी आक्सीजन की कमी से विचलित सरकार इस बार थोड़ी सतर्क नजर आ रही है। अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति की कमी को कम करने के लिए देश भर में 1,500 से अधिक पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में उन्होंने कहा है कि आक्सीजन संयंत्र जल्द चालू करने कहा है ताकि कोविड-19 महामारी की संभावित तीसरी लहर से पहले चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हों।  
कोविड-19 महामारी के साथ देश भर में स्कूल-कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान लंबे समय से बंद हैं। जबकि कुछ राज्यों ने पिछले वर्ष में कुछ समय के लिए शैक्षणिक संस्थानों को फिर से खोलने की अनुमति दी थी और इस साल की शुरुआत में जब कोविड-19 मामलों की संख्या कम थी, महामारी की दूसरी लहर ने एक बार फिर से बंद शैक्षणिक संस्थाएं बंद कर दी गई जिन्हें राज्य फिर से खोलने की तैयारी कर रहे हैं।

महाराष्ट्र सरकार ने उन क्षेत्रों में स्कूलों को फिर से खोलने का फैसला किया है जहां पिछले महीने कोई भी सक्रिय कोविड-19 मामला सामने नहीं आया है। स्कूलों को कक्षा 8 से 12 के छात्रों के लिए 15 जुलाई से ऑफलाइन कक्षाएं फिर से शुरू करने की अनुमति दी गई है। दिल्ली में सोमवार, 28 जून से शिक्षण गतिविधियों को फिर से शुरू कर दिया है। 31 जुलाई तक, स्कूल छात्रों की काउंसिलिंग कर 2 अगस्त से कक्षा 9 से 12 तक की ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने की तैयारी है। हरियाणा सरकार 16 जुलाई से कक्षा 9 से 12 तक सोशल डिस्टेंसिंग के साथ स्कूल खोलने जा रही है। कक्षा 6 से 8 के लिए स्कूल 23 जुलाई से फिर से खुलेंगे। आंध्र प्रदेश सरकार का कहना है कि हम कक्षाएं कैसे शुरू करते हैं यह कोविड-19 की तीसरी लहर पर निर्भर करता है। सामाजिक दूरी के मानदंडों का पालन करने की अनुमति देने के लिए अलग-अलग दिनों में अलग-अलग पालियों वाला तरीका अपनाया जा रहा है।

उड़ीसा में शारीरिक कक्षाएं फिर से शुरू करने के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। मध्य प्रदेश ने भी स्कूल/कॉलेजों को फिर से खोलने पर अंतिम निर्णय की घोषणा अभी नहीं की गई है। पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन की अवधि बढ़ाते हुए में 15 जुलाई तक पाबंदियां रहेंगी।
विशेषज्ञों के अनुसार हमारे देश में अगस्त के मध्य तक खतरनाक कोरोना वायरस की तीसरी लहर आने की संभावना है, जबकि मामले सितंबर में चरम पर पहुंच सकते हैं। हालांकि भारत देश में दूसरी लहर अभी खत्म भी नहीं हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक डेटा से पता चलता है कि औसतन, तीसरी लहर के मामले दूसरी लहर के समय चरम मामलों के लगभग 1.7 गुना हैं।

बहुत सारे राज्यों में अभी भी कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव बना हुआ है। वहीं देश के 12 राज्यों से अब तक डेल्टा प्लस संस्करण के 51 मामलों का पता चला है। मामला चाहे कोरोना संक्रमण से निपटने का हो या कोरोना जैसी आपदा के प्रबंधन और नीतिगत निर्णयों का हो, हमने अभी तक इस दिशा में कोई ठोस राष्ट्रीय नीति नहीं बनाई है। तीसरी लहर की संभावनाओं के बीच अलग-अलग राज्यों का नजरिया, कार्यवाही अपने-अपने स्तर पर अलग-अलग है जिसका आपस में कोई तालमेल नहीं है। कोरोना से लोग स्थानीय परिस्थिति और बीमारी की तरह निपटना चाहते हैं, जबकि इसका चरित्र वैश्विक है। एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच होने वाली आवाजाही और खुले बाजार, उत्सव, चुनाव आदि के चलते कहीं हम फिर से वही गलती न दोहराएं जिसके चलते हमें जान के लाले पड़े थे। विशेषज्ञों की सलाह है कि स्वास्थ सेवाओं का विकेंद्रीकरण होना चाहिए। सरकार को डेटा संग्रह और माउलिंग में पारदर्शी होना चाहिए। उपचार के लिए कीमतों का निर्धारण होना चाहिए। एक पारदर्शी राष्ट्रीय मूल्य नीति बननी चाहिए।

कोविड-19 को आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए आबंटित 23,123 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी। इस पैकेज में बाल चिकित्सा देखभाल के लिए और अधिक बुनियादी ढांचे का निर्माण, कोविड प्रबंधन के लिए अस्पताल के बिस्तरों का पुनर्निर्माण, जीनोम अनुक्रमण को मजबूत करना, आईसीयू सुविधाओं को बढ़ाना, अधिक ऑक्सीजन टैंकों की स्थापना और आवश्यक दवाओं के बफर स्टॉक का निर्माण शामिल होगा।  

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया के अनुसार भीड़ बढऩे के साथ, संक्रमण की अपरिहार्य तीसरी लहर अगले छह से आठ सप्ताह में देश में आ सकती है। महामारी की पहली और दूसरी लहर के दौरान देश में जो कुछ हुआ उससे भारतीयों ने कोई सबक नहीं सीखा है। फिर से भीड़ बढ़ रही है, कोविड संक्रमण की रफ़्तार सब इस बात पर निर्भर करती है कि हम कोविड-उपयुक्त व्यवहार और भीड़ को रोकने के मामले में कैसे आगे बढ़ते हैं।