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सिख वोट बैंक की राजनीति चमकाने के लिए भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी कर रहे ट्रूडो

सिख वोट बैंक की राजनीति चमकाने के लिए भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी कर रहे ट्रूडो

नईदिल्ली।  वैश्विक स्तर पर कनाडा के प्रधानमंत्री की वो हैसियत नहीं है कि वो कुछ कहे तो उसको पूरी दुनिया सुने. कनाडा का न तो संयुक्त राष्ट्र में कोई दबदबा है और न ही सैन्य कारोबार में. ट्रूडो के सात दिवसीय दौरे को मोदी सरकार ने बहुत तवज्जो नहीं दी थी. ऐसा लगा कि जस्टिन ट्रूडो भारत में पर्यटन पर आए हैं और बिल्कुल खामोशी के साथ एक हफ्ते तक घूमते रहे. जस्टिन ट्रूडो जब 17 फरवरी 2018 को नई दिल्ली पहुंचे तो उनका कोई हाई प्रोफाइल स्वागत नहीं हुआ.

पीएम मोदी ने अपने कृषि मंत्री को ट्रूडो के स्वागत के लिए भेजा था. जब भी कोई नेता भारत का दौरा करता है, मोदी ट्विटर पर भी उसका स्वागत करते हैं लेकिन ट्रूडो के दौरे के वक्त मोदी ने कोई ट्वीट नहीं किया.

ट्रूडो परिवार संग आगरा में ताजमहल देखने गए लेकिन वहां उनके स्वागत के लिए ना तो कोई मुख्यमंत्री पहुंचा और ना ही कोई जूनियर मंत्री. जिला अधिकारियों ने ही ट्रूडो को ताजमहल घुमाया. ट्रूडो मोदी के गृहराज्य गुजरात भी गए लेकिन यहां भी वो अकेले-अकेले ही घूमते रहे.

ट्रूडो का यह दौरा काफी विवादित रहा. इसी दौरे में 20 फरवरी 2018 को मुंबई में ट्रूडो एक इवेंट में शामिल हुए. इस इवेंट की गेस्ट लिस्ट में जसपाल सिंह अटवाल का भी नाम था. जसपाल सिंह अटवाल खालिस्तानी अलगाववादी रहे हैं. वो कनाडा के नागरिक हैं और उन्होंने 1986 में पंजाब के कैबिनेट मंत्री रहे मलकिअत सिंह सिद्धू पर कनाडा के वैंकूवर शहर में गोलीबारी की थी.

मलकिअत सिंह को गोली लगी लेकिन उनकी जान बच गई थी. इस मामले में जसपाल अटवाल को हत्या की कोशिश के लिए दोषी ठहराया गया था और 20 साल की कैद हुई थी. 

उसी जसपाल अटवाल को ट्रू़डो के कार्यक्रम में गेस्ट बनकर आना भारत के लिए चिढ़ाने वाला था. अटवाल कई तस्वीरों में ट्रूडो की पत्नी के साथ भी नजर आए थे. बाद में अटवाल ने इसे लेकर माफी मांगी थी कि उनकी वजह से कनाडा के पीएम को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी.

मंगलवार को किसानों के आंदोलन पर ट्रूडो के बयान पर भारत में काफी विवाद हुआ. सरकार ने ट्रूडो के बयान को खारिज करते हुए कड़ी आपत्ति जताई तो सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई. कुछ लोगों ने समर्थन किया तो ज्यादातर लोगों ने यही कहा कि ट्रूडो सिख वोट बैंक की राजनीति चमकाने के लिए भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी कर रहे हैं. ट्रूडो ने कहा था कि भारत में किसानों के चल रहे आंदोलन पर सरकार के रुख से वो चिंतित है और कनाडा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का समर्थन करता है. कनाडा की राजनीति में ट्रूडो की लिबरल पार्टी, कन्जरवेटिव पार्टी और जगमीत सिंह की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी तीनों के लिए सिख वोट बैंक मायने रखता है. 3.6 करोड़ की आबादी वाले कनाडा में पांच लाख के करीब सिख हैं. 

साल 2015 में जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि भारत की कैबिनेट से ज्यादा सिख उनकी कैबिनेट में हैं. तब ट्रूडो की कैबिनेट में चार सिख मंत्री थे. ट्रूडो पर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह भी ट्रूडो पर कनाडाई सिख अलगाववादियों के साथ सहानुभूति रखने का आरोप लगा चुके हैं. 

कनाडा की कुल आबादी में 5.6 फीसदी लोग भारतीय मूल के हैं. इनकी आबादी 19 लाख है. कनाडा की कैबिनेट में भी कई भारतीय मूल के लोग शामिल हैं. भारतीय मूल की अनीता आनंद जस्टिन ट्रूडो की कैबिनेट में हैं और वो हिंदू हैं.