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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-बढ़ती रौनक घटता भय

   प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-बढ़ती रौनक घटता भय


गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा था बिन भय होय न प्रीत गोसाई। लोगों ने कोरोना संक्रमण के भय से मास्क और सैनेटाइजर से प्रीत करके अपने आपको दो गज की दूरी वाले डिस्टेंस रिलेशनशिप में ढाल लिया था। भय वाली प्रीत धीरे-धीरे कम होने लगी और बाजार की चमक-दमक उत्सवधर्मिता और जीवन में आई एकरूपता और नीरसता को तोड़कर लोगों ने भय के आगे जीत है, इस स्लोगन को अपनाना शुरू कर दिया है। मार्च 2020 से अपने-अपने घरों में सिमटे, डर के सावधानी बरत कर निकलने वालों ने नवदुर्गा त्यौहार के आते-आते लगभग मास्क को नमस्ते करके सैनेटाईजर को भी सजावट या दिखावे तक सीमित कर दिया है। रावण दहन के साथ ही ऐसा लगा कि लोगों ने कोरोना वायरस का भी दहन कर दिया है। जिधर देखो उधर अब बिना मास्क और दो गज की दूरी वाला जनसैलाब दिखाई दे रहा है।

बाजार बम्पर ऑफर के साथ पूरी आक्रमकता लिए हुए उपभोक्ता को लुभाने में लगा हुआ है। हवाई यात्रा करने वालों की भीड़ देखकर समझा जा सकता है कि लोगों का भय कम हुआ है। इसी तरह धीरे-धीरे ट्रेनें भी पटरी पर दौडऩे लगी हैं। यात्री बसों में जरूर अभी उतने यात्री नहीं जा पा रहे हैं, जैसे पहले आते जाते थे। देवउठनी एकादशी के बाद से जब शादियों का सीजन प्रारंभ होगा तब बसों, ट्रेनों में भी भीड़ दिखाई देगी। सारे पर्यटन स्थलों पर भी पर्यटकों की संख्या अचानक से बढ़ी है। घर में बैठे-बैठे उबे हुए लोग अब कोरोना की अनदेखी कर यात्रा पर निकल रहे हैं। स्कूल-कालेज के खुलते ही सड़कों पर पहले जैसे भीड़ दिखने लगेगी। अब बच्चे-बूढ़े सब पार्क में सुबह-शाम दिखने लगे हैं। उत्सवधर्मी हिन्दुस्तानी अब अपने को उत्सवों की रौनक और बाजार की चकाचौंध के चलते घर में नहीं रोक पा रहे हैं।

बहुत दिनों से घर में बंद लोगों ने अब कोरोना से डरना कम कर दिया है। नौ दिनों तक पंडालों में विराजित देवी प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना कर, दुर्गा प्रतिमा, जंवारों का विसर्जन धूमधाम से बिना मास्क और दो गज की दूरी से ध्यान हटाकर पूरे जोश-खरोश उत्साह के वातावरण में किया गया। नवरात्रि के समारोह में अलग-अलग मोहल्लों से बच्चे, युवा, बुजुर्ग महिलाएं नाचते, जसगीत गाते और जयकारे लगाते हुए उत्साह से विसर्जन समारोह में शामिल हुए। श्रद्धा-आस्था का उत्साह इस तरह से छलका कि किसी को कोरोना महामारी का भय नहीं रहा। अबीर, गुलाल उड़ाते हुए भक्त खुशी से झूम उठे।  

दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए बनाए गये नियम कानून धरे रह गए। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम के लिए किए प्रयास और उपाय लोगों की लापरवाही को देखते हुए नाकाम साबित हो रहे हैं। लोग बिना मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग के घूम रहे हैं। बाजार में लोगों की भीड़ लग रही है। दुकानदार भी मास्क का उपयोग नहीं कर रहे हैं। इससे संक्रमण की आशंका रहती है। बाजार में लोगों को देखकर लगता है मानो कोरोना का डर ही खत्म हो गया हो। आमजन बिना मास्क और बगैर डिस्टेंसिंग के खरीदारी कर रहे हैं। दुकानदार भी अब ग्राहक को भगवान समझकर टोकाटाकी नहीं कर रहे हैं।

त्यौहार का सीजन होने के कारण लोग खरीदारी करने उमड़ पड़े हैं। होलसेल मार्केट से मालवाहक वाहनों की बड़ी संख्या में आवाजाही बनी हुई है। नये घर और प्लाट खरीदने वाले भी नई-नई कालोनियों के चक्कर लगाते देखे जा रहे हैं। सराफा व्यापारियो की दुकानें सज गई हैं। धनतेरस पर खूब बिक्री की संभावना दिखाई दे रही है।

छह-सात महीने से बंद और ठप पड़े बाजारों में बिक्री बढऩे लगी है। शुभ मुहूर्त होने के कारण हर साल दशहरे पर सबसे ज्यादा घर, गोल्ड, ज्वेलरी और वाहन बिकते हैं, परंतु इस साल कोरोना महामारी के घोर संकट के कारण पिछले साल के मुकाबले तो कारोबार 30 से 50 फीसदी कम है। क्योंकि कोरोना संकट के कारण लोगों की आमदनी घट गई है और टूर-ट्रैवल्स, हॉस्पिटलिटी, इवेन्ट बिजनेस सहित कई कारोबारी क्षेत्र तो अभी भी मंदी की गिरफ्त में हैं, लेकिन कोरोना का खतरा घटने से अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने लगी है। कंपनियां, डेवल्पर और व्यवसायी अपनी तरफ से भारी छूट और विशेष ऑफर देकर ग्राहकों को लुभा रहे हैं, जिससे बाजारों में मांग बढ़ती दिख रही है। व्यवसायियों का कहना है कि नवरात्रि-दशहरे से कारोबार में वृद्धि हुई है। कोरोना महामारी की मार झेलने के बाद ऑटो बाजार में बिक्री बढ़ी है, हालांकि पिछले साल के मुकाबले तो नवरात्रि की बिक्री करीब 20 फीसदी कम है, लेकिन अनलॉक के बाद बाजार खुलने पर हर माह मांग बढ़ रही है।

चारों ओर लोगों की बढ़ती भीड़ और कोरोना के प्रति बरती लापरवाही को देखकर लगता है कि शहरों में जो लॉकडाउन और अन्य पाबंदियों से उभर चुके हैं, वहां सुबह-शाम वॉक के लिए सड़कों पर निकले या सब्जी या किराने की दुकानों पर सामान खरीदने के लिए आते-जाते अधिकांश लोगों को मास्क न पहने हुए और भौतिक दूरी रखने की सावधानी को नजरअंदाज करते हुए देखा जा सकता है। मास्क से जुड़ी प्रशासनिक और चिकित्सकीय हिदायतों को न सिर्फ भुला रहे हैं, बल्कि कई लोगों ने तो इन हिदायतों का यह कहकर पालन करने से मना कर दिया है कि इनसे कुछ होने वाला नहीं। कई बार लोगों को निवेदन करना होता है कि वे मास्क पहन लें या थोड़ा दूरी बरतें, लेकिन कोई भड़क न उठे, इसका भी डर है। अगर संक्रमण होना है तो होकर रहेगा-नहीं होगा तो नहीं होगा एक नैरेटिव यह है। दूसरा तर्क यह चल पड़ा है कि हमें नहीं होगा क्योंकि हमारा तो खानपान ठीक है, हमारा शरीर मजबूत है। जब अब तक नहीं हुआ तो अब क्या होगा। हम तो रोज काढ़ा पीते हैं। मामूली सर्दी-खांसी को लोग कोरोना बताकर नाहक डराते हैं।

कोरोना संक्रमण को लेकर अनावश्यक भय या अतिरंजित कोशिशों से बचे जाने की जरूरत है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अब इसके साथ जीना पड़ेगा वाली धारणा के आगे नतमस्तक होकर बचाव के तरीकों को अनदेखा कर दिया जाए और जैसा चलता है चलने दिया जाए। यह यथास्थितिवाद ही सामाजिक गतिशीलता के सामने सबसे बड़ा अवरोधक है। जनता सिर के ऐन ऊपर तने हुए कानूनों और आदेशों पर तो अमल कर लेती है। कोविड-19 कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में पहले से कमी आई है। इनमें गंभीर लक्षण वाले मरीज भी कम मिल रहे हैं। इसके चलते अस्पतालों में बेड की समस्या दूर हुई है। कोरोना के मौजूदा हालात की बात करें तो यह सही है कि सितंबर 2020 में, मालगाडिय़ों में कुल माल लदान 102.12 मिलियन टन था, जो कि 2019 के इसी महीने 88.53 मिलियन टन था, इन अंाकड़ों की तुलना की जाए तो 2020 में 15.3फीसदी अधिक ट्रेनों में लदा है।

यात्री हवाई यातायात में भी गति दिख रही है, हालांकि यह पीआरई कोविड की तुलना से दूर है। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के मुताबिक इस साल सितंबर में कुल 39.43 लाख घरेलू यात्रियों ने हवाई यात्रा की, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 66 फीसदी कम है। वहीं जुलाई और अगस्त में क्रमश: 21.07 लाख और 28.32 लाख लोगों ने हवाई यात्रा की।

भारत में एक दिन में कोरोना वायरस से संक्रमण के 45,149 नए मामले सामने आए। इससे संक्रमित मामलों की कुल संख्या बढ़कर 79.06 लाख हो गई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सुबह कोरोना के आंकड़े जारी किए हैं। पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 480 रही। देश में अब तक कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 1,19,014 हो गई। अब ये आंकड़े लोगों को नहीं डराते। लोग मानकर चल रहे हैं कि डर के आगे जीत है।