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राजस्व,एवं नजूल भूमि पर दलालों का कब्जा : मृतक कन्हैया गावड़े भी हुआ शिकार

राजस्व,एवं नजूल भूमि पर दलालों का कब्जा : मृतक कन्हैया गावड़े भी हुआ शिकार

भानुप्रतापपुर। जिस तरह कन्हैया गावड़े को जमीन दलालों ने ठगा ऐसे कई मामला और भी हो सकता है क्योंकि सम्बलपुर निवासी कपड़ा एवं सोना चांदी दुकान के संचालक यू तो देखा जाए तो व्यपार के अलावा कई वर्षों से जमीन दलाली का काम करते आ रहे है। जानकारी मिली है कि ये व्यपारी पट्टे शुदा जमीन के अलावा भारी मात्रा में शासकीय भूमि को भी कब्जेधारी से सस्ते दामों पर लेते और उसे उच्चे कीमत पर बेचते हैं। इसमें कई लोग ठगी का शिकार हो जाते है। भानुप्रतापपुर एवं संबलपुर में प्रमुख-प्रमुख जगहों पर देखा जाए तो इन्ही का ही जमीन बताया जाता है। जानकारी मिली है कि इसके अलावा भी आसपास के गांवों में भी इन्होंने अच्छी खासी जमीन खरीद कर रखा है कुछ लोगों ने जानकारी दी है इन्होंने मुल्ला में स्थित वन भूमि को भी खरीद लिया है जबकी वन भूमि अंतर्गत वन अधिकार पट्टा का किसी प्रकार का कोई रजिस्ट्री भी नही होता राजस्व विभाग को इसकी प्रमुखता से जांच  करना चाहिए।  इस मामले में प्रशासन को कोई ठोस पहल करना चाहिए। ताकि ऐसे क्या गणित बिठाया गया है वन भूमि को भी दलाल खरीद रहें हैं जांच से सच्चाई भी बाहर निकल सकता है कि वाक्य में वन भूमि की जमीन को ये दलालों ने लिया है या नही। वहीं इनकी जमीन कहा कहा पर कितना है इसकी जानकारी जुटाई जा रही है जल्द ही सामने लाया जाएगा।

 प्रशासनिक कार्यालयों में जमीन विवाद के मामले पहुंच रहे हैं। फिर भी प्रशासन कोई पहल नहीं कर पा रहा। वही आदिवासी की जमीन की खरीदी-बिक्री के एक सख्त नियम है, इसके बावजूद भी जमीन दलालों के द्वारा बहुत ही आसानी ख़रीदी बिक्री का खेल खेला जा रहा है  इसी प्रकार मृतक कन्हैया गावड़े को ही ले लीजिए  मृतक कन्हैया गावड़े ने अपने जीते जी अपने साथ हुए धोखाधड़ी को लेकर थाने से लेकर जिला कलेक्टर तक को भी शिकायत के माध्यम से आवेदन किया था पर उस पर तो कोई कार्यवाही नहीं हुआ वहीं आमलोगों का कहना है कि यदि जमीन दलालों पर अंकुश नहीं लगाया जाता  तो वहा दिन दूर नहीं जब आम लोगों के लिए शहर में रहने का सपना कभी पूरा नहीं होगा। तरह-तरह की बातों को बता कर जमीन दलाल ऐसा भ्रमित कर रहे हैं कि लोग भी उनके चंगुल में फंस जा रहे हैं।

जल्दी आ सकता है कहाँ और किस जगह कितनी आदिवासी जमीन व कितनी शासकीय भूमि कितनी वनाधिकार की शासकीय भूमि है ????️