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संविधान राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को दिशा अवश्य प्रदान करता है, लेकिन उसकी गति को निर्धारित करना हर भारतीय नागरिक का काम–राजीव शर्मा

संविधान राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को दिशा अवश्य प्रदान करता है, लेकिन उसकी गति को निर्धारित करना हर भारतीय नागरिक का काम–राजीव शर्मा

जगदलपुर। बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर द्वारा आज अम्बेडकर वार्ड में संविधान दिवस मनाया गया। सर्वप्रथम उनके आदमकद मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया। इस अवसर पर आंगन बाड़ी कार्यकर्ताओं का अतिथियों द्वारा सम्मान किया गया। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजीव शर्मा ने प्रदेश सहित बस्तर वासियों को संविधान दिवस की बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत विश्व का महानतम कार्यशील लोकतंत्र है ऐसा ना केवल इसके विशाल, आकार, अपितु इसके  बहुलतावादी स्वरूप और समय की कसौटी पर खरा उतरने के कारण है लोकतांत्रिक परंपराओं और सिद्धांत भारतीय सभ्यता के अभिन्न अंग है तथा लोकतंत्र की जड़ें हमारी राजनीतिक चेतना में गहराई तक समाई हुई है।

हर भारतीय नागरिक के लिए हर साल 26 नवंबर का दिन बेहद खास होता है।  दरअसल यही वह दिन है जब देश की संविधान सभा ने मौजूदा संविधान को विधिवत रूप से अपनाया था।  यह संविधान ही है जो हमें एक आजाद देश का आजाद नागरिक की भावना का एहसास कराता है, जहां संविधान के दिए मौलिक अधिकार हमारी ढाल बनकर हमें हमारा हक दिलाते हैं, वहीं इसमें दिए मौलिक कर्तव्य में हमें हमारी जिम्मेदारियां भी याद दिलाते हैं।


हर वर्ष 26 नवंबर का दिन देश में संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है।  डॉ. भीमराव अंबेडकर के द्वारा सभी वर्गों को ध्यान में रखकर लिखा गया यह संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।  संविधान की असली कॉपी प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने हाथ से लिखी थी, ये बेहतरीन कैलीग्राफी के जरिए इटैलिक अक्षरों में लिखी गई है।  इसके हर पन्ने को शांतिनिकेतन के कलाकारों ने सजाया था।  संविधान निर्माता को कोटिशः कोटिशः नमन।

संसदीय सचिव/विधायक रेखचन्द जैन सविधान निमाता डॉ.भीमराव अंबेडकर को नमन कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते कहा कि आज ही के दिन 26 नवंबर, 1949 को ही देश की संविधान सभा ने वर्तमान संविधान को विधिवत रूप से अपनाया था, हालांकि इसे 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था।  संवैधानिक मूल्यों के प्रति नागरिकों में सम्मान की भावना को बढ़ावा देने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। 

भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है इसके कई हिस्से यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, जर्मनी, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान के संविधान से लिये गये हैं। इसमें देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों, सरकार की भूमिका, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री की शक्तियों का वर्णन किया गया है विधानपालिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का क्या काम है, उनकी देश को चलाने में क्या भूमिका है, इन सभी बातों का जिक्र संविधान में है।

महापौर सफीरा साहू, सभापति कविता साहू ने भी सविधान निर्माता को याद कर उन्हें नमन किया और बताया कि उन्ही के बनाये हुए सविधान कई देशों को आईना दिखा रहे हैं तथा इस सविधान को अपनाने के लिए मजबूर हो गए है इसे तैयार करने में कितने दिन में 2 वर्ष, 11 माह 18 दिन लगे थे यह 26 नवंबर, 1949 को पूरा हुआ था 26 जनवरी, 1950 को भारत गणराज्य का यह संविधान लागू हुआ था।

यह रहे मौजूद...

समाज प्रमुख तिरुपति झाड़ी, बीआर मोरला,बीएन दूधी,केशव जुमार्ग,पार्षद अनिता नाग,कोमल सेना,बी ललिता राव,कमलेश पाठक,जिला महामंत्री अनवर खान,कैलाश नाग,शहनाज़ बेगम,अंजना नाग, पापिया गाईन,नीला,महेश द्विवेदी, वेंकट राव,नन्दू साहू,राजेन्द्र हाबिल,मनसिंग,अनिता दूधी,सोनमती बघेल, सहित वार्डवासी उपस्थित रहे।