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आदिवासी एवं लोक- संस्कृति के लेखक डॉ महेन्द्र कुमार मिश्रा का निधन

आदिवासी एवं लोक- संस्कृति के लेखक डॉ महेन्द्र कुमार मिश्रा का निधन


रायपुर, 4 अप्रैल। वरिष्ठ लेखक, बुद्धिजीवी, आदिवासी एवं लोक- संस्कृति के लेखक डॉ महेन्द्र कुमार मिश्रा का रविवार सुबह 5 बजे निधन हो गया। बहुत सक्रिय, अध्ययनशील, यारबाज चिंतक ,विचारक महेन्द्र मिश्र का निधन सांस्कृतिक साहित्यिक जगत के लिए बड़ी क्षति है। उनका मित्र संसार व्यापक था। एप्सो के संरक्षक रहे महेन्द्र मिश्र आईआरटीएस में अपनी सेवाएं दी थी इसके अलावा वे रेलवे बोर्ड के सदस्य भी थे। वे वामपंथी विचारक थे।  वे सेवानिवृत्ति के बाद रायपुर के  VIP रोड स्थित मौलश्री विहार के पास मल्टीस्टोरी गोल्डन स्काई के जी-201-202 निवासरत थे।


 महेन्द्र मिश्र संस्कृत, अरबी और फारसी में काम करने के साथ ही साथ अंग्रेजी साहित्य के जाने माने स्कॉलर भी थे। उन्होंने फलीस्तीनी मूवमेंट के ऊपर किताब भी लिखी। सिनेमा के 100 वर्ष, ऋग्वेद के भाष्य लिख रहे थे जो छपने वाली थी। संस्कृत साहित्य की परम्परा में उन ग्रन्थों को भाष्य कहते हैं जो दूसरे ग्रन्थों के अर्थ की वृहद व्याख्या या टीका प्रस्तुत करते हैं। मुख्य रूप से सूत्र ग्रन्थों पर भाष्य लिखे गये हैं। भाष्य, मोक्ष की प्राप्ति हेतु अविद्या का नाश करने के साधन के रूप में जाने जाते हैं।


डॉ महेन्द्र कुमार मिश्रा प्रसिद्ध आदिवासी एवं लोक- संस्कृति लेखक थे।