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नगर निगम के ज़ोन – 3 में तीन साल के भीतर छह कमिश्नरों के कार्यकाल में पौन करोड़ रूपये का वेतन घोटाला, मंत्री के ओएसडी अरुण साहू के कार्यकाल में 50 लाख का वेतन घोटाला,

नगर निगम के ज़ोन – 3 में तीन साल के भीतर छह कमिश्नरों के कार्यकाल में पौन करोड़ रूपये का वेतन घोटाला, मंत्री के ओएसडी अरुण साहू के कार्यकाल में 50 लाख का वेतन घोटाला,


चमन प्रकाश केयर

रायपुर । छत्तीसगढ़ की राजधानी जिसे सरकार नगर निगम के आला अफसरों के पदस्थापना के दौरान, भरोसे स्मार्ट सिटी बनाने पर तुली हुई हैं । उन्ही जोन कमिश्नरों के कार्याकाल में पौन करोड रूपये का वेतन घोटाला हो गया । प्रदेश के बहुचर्तित नगर निगम जोन 3 में नायब तरीके से किये गये वेतन घोटाले में एक नया खुलासा सामने आया हैं । जिसमें तीन साल के भीतर छह जोन कमिश्नर रहे और लगभग पौन करोड़ रूपये वेतन के नाम से सरकारी खजाने से पार हो गया ।

वारदात को अंजाम देने वाले मास्टर माइंड स्थापना लिपिक प्रभारी गंगाराम सिन्हा और प्लेसमेंट कर्मचारी नेहा परवीन ने अपने- अपने रिश्तेदारों के अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिये बड़े ही शातिर अंदाज में तीन वर्षों तक सरकारी खजाने को लुटने का काम किये हैं । इस घोटाले में एक नया नाम लेखापाल रहे सदानंद परमार का भी नाम जुड़ गया हैं, जिसे सिविल पुलिस ने गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया हैं ।

हाईटेक तरीके से किया वेतन घोटाला :-

हाईटेक और शातिर तरीके से वेतन घोटाले की शुरुवात वर्ष 9 सितम्बर 2016 में हुई । इस दौरान 9 मार्च 2017 तक में गंगाराम सिन्हा ने अपनी पत्नि देवकुमारी सिन्हा का नाम वेतन सूची में शामिल कर सेन्ट्रल बैंक के खाता नम्बर 3229873690 में सरकारी खजाने से एक लाख साढ़े 16 हजार रूपये पार दिए । इस दौरान गंगाराम सिन्हा और नेहा परवीन की करतूत किसी को भनक लगी । इसी का फायदा उठाकर 14 मार्च 2017 में आये कमिश्नर रमेश जायसवाल वर्तमान में नगर निवेश रायपुर के संयुक्त संचालक के कार्यकाल में गंगाराम सिन्हा ने पत्नि के बाद  बेटे शुभम सिन्हा के बैंक ऑफ बडौदा का खाता नम्बर 50420100002021 और साला अशोक सिन्हा के बैंक ऑफ बडौदा का खाता नम्बर 50420100002063 को वेतन सूची में शामिल किया । इस दौरान सरकारी खजाने से पांच लाख 42 हजार 157 रूपये इनके खातों में ट्रांसफर किया गया ।


नेहा ने गंगाराम को ब्लेकमेलिंग कर कैश ट्रांसफर कराया :-

वर्तमान में नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया के ओएसडी अरुण साहू आठ दिसम्बर 2017 से आठ जून 2020 तक जोन कमिश्नर के पद पर पदस्थ रहे । उनके तीन साल के कार्यकाल में नेहा परवीन ने गंगाराम सिन्हा की करतूत को देख ब्लेकमेलिंग करने लगी । इसके बाद गंगाराम सिन्हा ने नेहा परवीन के बहन निगार परवीन के सेंट्रल बैंक का खाता नम्बर 3182810000,  माँ सरवरी बेगम के सेंट्रल बैंक का खाता नम्बर 3623869483 और  रिश्तेदार खालिदा अख्तर के बैंक ऑंफ बडौदा का खाता नम्बर 50420100002063 को वेतन लिस्ट में शामिल किया । इस दौरान सरकार के करीब 50 लाख रूपये में वेतन के नाम से हाथ साफ कर लिए ।


सप्ताह भर प्रभारी कमिश्नर और  पार हो गया 27 लाख 9 हजार :-

नगर निगम के जोन कार्यालय 3 में प्रभारी कमिश्नर सीएस प्रधान ने दो सितम्बर 2020 से 13 सितम्बर 2020 तक पदस्थ रहे । इनके कार्यकाल में दो लाख 30 हजार रूपये वेतन के नाम से निकाला लिया गया । इसके बाद आठ अक्टूबर 2020 से 13 अक्टूबर 2020 तक प्रभारी जोन कमिश्नर रहे राजेश राठौर के समय 27 लाख 9 हजार 857 रूपये उक्त लोगों के खाते में ट्रांसफर किया गया । इसके बाद वर्तमान में सूरजपुर के सीएमओ प्रवीन सिंह गहलोत जब जोन में आठ जून 2020 से 23 फरवरी 2021 तक कमिश्नर के पद पर पदस्थ थे तब उनके कार्यकाल में 10 लाख चार हजार 114 रूपये वेतन के नाम से गंगाराम सिन्हा और नेहा परवीन के द्वारा रिश्तेदारो के खातों में गोलमाल किया गया ।

अब सवाल उठना लाजमी हो गया हैं कि इतने सारे अनुभवी जोन कमिश्नर तीन सालों में पदस्थ रहे, और आम जनता की गाढ़ी कमाई इन अधिकारीयों के नाक के नीचे से पार हो गई । इसको लेकर प्रदेश के आम लोगों में चर्चा काफी गर्म हैं । वहीं लोगों का कहना हैं कि बिना अधिकारी के संरक्षण बगैर प्लेसमेंट के कर्मचारी और एक बाबू सरकारी खजाने लुटने का षड्यंत्र भरा कार्य कैसे कर सकता हैं ।

बहरहाल वेतन घोटाले का मास्टर माइंड गंगाराम सिन्हा, उसका साला अशोक सिन्हा और रिटायर्ड हो चुके लेखापाल सदानंद परमार को सिविल लाईन पुलिस ने गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे धकेल दिया हैं । वहीं इस कांड में मुख्य रूप से अंजाम देने वाली आरोपी नेहा परवीन अब तक पुलिस की गिरफ्त से फरार हैं, जिसकी खोजबीन सिविल लाईन पुलिस द्वारा की जा रही हैं ।

इस घटना के बाद स्थापना शाखा के लिपिक गंगाराम सिन्हा, को निलम्बित कर दिया गया हैं । वहीं नगर निगम मुख्यालय के वित्त विभाग में सविंदा पर पदस्थ रहे सदानंद परमार को बर्खास्त कर दिया गया हैं । इसके साथ ही पुलिस ने गंगाराम सिन्हा और नेहा परवीन के रिश्तेदारों को आरोपी बनाया गया हैं । इसके अलावा पुलिस ने सभी आरोपियों के बैंक खाते को भी सीज कर जाँच में जुट गयी हैं ।

नगर निगम के जोन 3 में हुए वेतन घोटाले कांड में शामिल मास्टर माइंड आरोपी गंगाराम सिन्हा सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका हैं । बाकी फरार चल रहे सभी आरोपी की तलाश में पुलिस जुटी हुई हैं । इसके साथ ही सभी आरोपियों के बैंक खाते को सीज कर जाँच की जा रही हैं ।

आर के मिश्रा, थाना प्रभारी सिविल लाईन रायपुर